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व्यक्तिगत IRCTC आईडी से टिकट बुकिंग के मामले में धारा 143 को लेकर हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

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जबलपुर। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने रेलवे टिकटों की बुकिंग से जुड़े एक मामले में रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 143 के प्रावधानों की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी दृष्टिकोण सामने रखा है। मामले में यह प्रश्न विचारणीय था कि यदि कोई अधिकृत रेलवे एजेंट अपनी व्यावसायिक आईडी के बजाय व्यक्तिगत IRCTC आईडी के माध्यम से रेलवे टिकट बुक करता है, तो क्या ऐसी कार्रवाई रेलवे अधिनियम की धारा 143 के अंतर्गत आपराधिक दायित्व का आधार बन सकती है। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना द्वारा बताए गए निर्णय के अनुसार, न्यायालय ने धारा 143 के दायरे और उसके उद्देश्य पर विचार करते हुए इस प्रावधान की व्याख्या की। उन्होंने बताया कि धारा 143 मुख्य रूप से ऐसे व्यक्तियों को रेलवे टिकटों की खरीद या आपूर्ति के व्यवसाय से रोकने के लिए बनाई गई है, जो रेलवे की अधिकृत व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आते। निर्णय में धारा 143 के प्रावधानों को उसके विधायी उद्देश्य और संबंधित परिस्थितियों के संदर्भ में देखा गया। इस प्रकार मामले में यह महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आया कि अधिकृत रेलवे एजेंट द्वारा व्यक्तिगत आईडी का इस्तेमाल किए जाने की स्थिति को सीधे धारा 143 के तहत आपराधिक अपराध के रूप में देखा जा सकता है या नहीं।
धारा 143 के उद्देश्य और दायरे पर न्यायालय का विचार। रेलवे अधिनियम, 1989 की धारा 143 रेलवे टिकटों की खरीद या आपूर्ति के व्यवसाय से संबंधित एक विशेष प्रावधान है। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना के अनुसार, न्यायालय ने इस प्रावधान की व्याख्या करते हुए उसके मूल उद्देश्य को महत्वपूर्ण माना। धारा 143 का उद्देश्य ऐसे व्यक्तियों को रेलवे टिकटों की खरीद अथवा आपूर्ति का कारोबार करने से रोकना है, जो रेलवे की अधिकृत व्यवस्था से बाहर रहकर इस प्रकार की गतिविधि करते हैं। रेलवे टिकटों की बुकिंग और वितरण के लिए रेलवे द्वारा निर्धारित नियम एवं अधिकृत एजेंसी व्यवस्था लागू होती है। इसी व्यवस्था के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि टिकटों की बिक्री निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार हो और अनधिकृत रूप से टिकटों की खरीद-बिक्री अथवा आपूर्ति का व्यवसाय न किया जाए। मामले में न्यायालय के समक्ष यह प्रश्न था कि अधिकृत एजेंट द्वारा व्यक्तिगत IRCTC आईडी का उपयोग करने की स्थिति इस धारा के तहत अपराध की श्रेणी में आती है या नहीं। न्यायालय ने धारा 143 के प्रावधानों को उसके विधायी उद्देश्य के अनुरूप समझने पर जोर दिया। इस कानूनी दृष्टिकोण के अनुसार, किसी व्यक्ति की अधिकृत स्थिति और उसके द्वारा की गई कार्रवाई के बीच अंतर करना आवश्यक है। केवल यह तथ्य कि एजेंट ने व्यावसायिक आईडी के स्थान पर व्यक्तिगत आईडी का उपयोग किया, अपने आप में धारा 143 के तहत आपराधिक दायित्व स्थापित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना गया।
अधिकृत रेलवे एजेंटों की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी पहलू। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना के अनुसार, न्यायालय ने अधिकृत रेलवे एजेंट और अनधिकृत टिकट कारोबार करने वाले व्यक्ति के बीच अंतर को भी महत्वपूर्ण माना। रेलवे द्वारा अधिकृत एजेंट रेलवे की निर्धारित व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं और उनके लिए अलग-अलग नियम एवं शर्तें लागू हो सकती हैं। यदि कोई अधिकृत एजेंट निर्धारित व्यावसायिक प्रक्रिया का पालन नहीं करता और व्यक्तिगत IRCTC आईडी के माध्यम से टिकट बुक करता है, तो उस आचरण के संबंध में रेलवे या संबंधित प्राधिकरण द्वारा प्रशासनिक अथवा संविदात्मक स्तर पर कार्रवाई का प्रश्न उठ सकता है। हालांकि, अधिवक्ता द्वारा बताए गए निर्णय के अनुसार, ऐसी स्थिति को मात्र इसी आधार पर रेलवे अधिनियम की धारा 143 के तहत आपराधिक अपराध के रूप में स्थापित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने धारा 143 के दायरे को उन व्यक्तियों की गतिविधियों के संदर्भ में देखा जो रेलवे की अधिकृत व्यवस्था के बाहर टिकटों की खरीद और आपूर्ति का व्यवसाय करते हैं। इस दृष्टिकोण से अधिकृत एजेंट की स्थिति अलग मानी गई। इसका अर्थ यह नहीं है कि अधिकृत एजेंट व्यक्तिगत आईडी के उपयोग के लिए सभी प्रकार की कार्रवाई से मुक्त हो जाते हैं। एजेंसी से संबंधित नियमों, IRCTC की शर्तों अथवा रेलवे की प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लंघन होने पर संबंधित स्तर पर कार्रवाई की संभावना बनी रह सकती है। महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ऐसे आचरण के लिए कौन-सा कानूनी प्रावधान लागू होगा और क्या उसके आवश्यक तत्व उस मामले में मौजूद हैं, इसका निर्धारण मामले के तथ्यों और लागू कानून के आधार पर किया जाना होगा।
प्रशासनिक या संविदात्मक कार्रवाई और आपराधिक दायित्व में अंतर। इस मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू प्रशासनिक कार्रवाई और आपराधिक दायित्व के बीच अंतर से जुड़ा है। किसी अधिकृत एजेंट द्वारा रेलवे या IRCTC के निर्धारित नियमों का उल्लंघन किए जाने पर संबंधित प्राधिकरण एजेंसी की आईडी, लाइसेंस या अनुबंध की शर्तों के अनुसार कार्रवाई कर सकता है। ऐसी कार्रवाई और किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने की स्थिति कानूनी रूप से अलग-अलग प्रश्न हैं। आपराधिक दायित्व निर्धारित करने के लिए संबंधित कानून में दिए गए अपराध के आवश्यक तत्वों का मौजूद होना आवश्यक होता है। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना द्वारा बताए गए हाईकोर्ट के निर्णय में इसी अंतर को महत्वपूर्ण माना गया है। उनके अनुसार, यदि अधिकृत एजेंट द्वारा व्यक्तिगत IRCTC आईडी का इस्तेमाल नियमों के विपरीत पाया जाता है, तो इससे संबंधित प्रशासनिक अथवा संविदात्मक परिणाम हो सकते हैं, लेकिन केवल इसी आधार पर धारा 143 के तहत आपराधिक दायित्व स्थापित करने के लिए कानून की आवश्यक शर्तों का पूरा होना भी जरूरी है। यह कानूनी दृष्टिकोण इस बात को रेखांकित करता है कि किसी नियम या प्रक्रिया का उल्लंघन होने मात्र से प्रत्येक स्थिति में आपराधिक अपराध स्वतः स्थापित नहीं हो जाता। संबंधित प्रावधान की भाषा, उद्देश्य और मामले के तथ्य सभी महत्वपूर्ण होते हैं।
रेलवे टिकट बुकिंग से जुड़े मामलों में निर्णय का कानूनी महत्व। रेलवे टिकटों की ऑनलाइन बुकिंग के बढ़ते उपयोग के साथ अधिकृत एजेंटों और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं के लिए IRCTC की विभिन्न व्यवस्थाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में व्यक्तिगत और व्यावसायिक आईडी के उपयोग से संबंधित नियमों को समझना आवश्यक है। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना के अनुसार, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इस निर्णय में धारा 143 के दायरे पर विचार करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि किसी अधिकृत एजेंट द्वारा व्यक्तिगत आईडी का इस्तेमाल करने की स्थिति का मूल्यांकन धारा 143 के उद्देश्य और उसके कानूनी तत्वों के आधार पर किया जाना चाहिए। निर्णय का व्यापक कानूनी महत्व इस बात में है कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक प्रावधान लागू करने से पहले यह देखना आवश्यक है कि संबंधित कानून की सभी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं या नहीं। साथ ही अधिकृत एजेंटों को भी रेलवे और IRCTC द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों का पालन करना चाहिए। व्यक्तिगत आईडी के माध्यम से टिकट बुकिंग से जुड़े मामलों में संबंधित एजेंट की अधिकृत स्थिति, टिकट बुकिंग का उद्देश्य, लेन-देन की प्रकृति और लागू नियमों को ध्यान में रखना आवश्यक होगा। इसलिए इस निर्णय को रेलवे टिकट बुकिंग से जुड़े प्रत्येक मामले पर स्वतः लागू मानने के बजाय उसके विशिष्ट तथ्यों और मूल न्यायिक आदेश के संदर्भ में समझना उचित होगा। अधिवक्ता विवेक नन्दवाना ने बताया कि निर्णय रेलवे अधिनियम की धारा 143 के आपराधिक प्रावधानों और अधिकृत एजेंटों की स्थिति के बीच कानूनी अंतर को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
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