
नई दिल्ली | राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को राष्ट्रीय एकता की शपथ दिलाई गई। इस अवसर पर देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराया गया। कार्यक्रम के दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्र निर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों और विचारों के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया। सरदार पटेल ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद विभिन्न रियासतों को एकीकृत कर भारत को एक मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। उनका जीवन दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित शपथ कार्यक्रम इसी भावना को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर बना। अधिकारियों और कर्मचारियों ने देश की एकता एवं अखंडता की रक्षा करने तथा राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखने के संकल्प को दोहराया। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि राष्ट्र की मजबूती केवल संस्थाओं और व्यवस्थाओं से नहीं, बल्कि नागरिकों के साझा विश्वास, जिम्मेदारी और एकजुट प्रयासों से सुनिश्चित होती है।
राष्ट्रीय एकता दिवस भारत के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। सरदार पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आजादी के बाद देश के प्रथम उप प्रधानमंत्री तथा गृह मंत्री के रूप में राष्ट्र की एकता को मजबूत करने के लिए ऐतिहासिक कार्य किया। उस समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक देश की सैकड़ों रियासतों का एकीकरण था। सरदार पटेल ने अपनी असाधारण राजनीतिक कुशलता, दृढ़ निर्णय क्षमता और दूरदर्शिता से इस चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारी को निभाया। उनके प्रयासों से अनेक रियासतें भारतीय संघ में सम्मिलित हुईं और एक मजबूत, एकीकृत भारत की नींव तैयार हुई। यही कारण है कि उन्हें अखंड भारत का शिल्पी और लौह पुरुष कहा जाता है। राष्ट्रीय एकता दिवस पर उन्हें याद करना केवल उनके ऐतिहासिक योगदान को सम्मान देना नहीं, बल्कि वर्तमान और भावी पीढ़ियों को राष्ट्रहित, एकता और सामूहिक जिम्मेदारी का महत्व समझाना भी है। उनका जीवन हमें प्रेरित करता है कि कठिन परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों से बड़े राष्ट्रीय लक्ष्य प्राप्त किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्रीय एकता की शपथ ली। इस शपथ का मूल भाव देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करना है। केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों की भूमिका शासन की नीतियों और योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण होती है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय देश की स्वास्थ्य सेवाओं, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। वहीं रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय रसायन, उर्वरक और औषधि से संबंधित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नीतिगत एवं प्रशासनिक कार्यों से जुड़ा है। इन मंत्रालयों के अधिकारी और कर्मचारी अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए देश के विकास में योगदान देते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस पर ली गई शपथ उन्हें यह स्मरण कराती है कि सार्वजनिक सेवा केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्र और नागरिकों के प्रति जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम भी है। ईमानदारी, निष्पक्षता, सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा के साथ कार्य करना राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
राष्ट्रीय एकता और अखंडता किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति होती है। भारत विविध भाषाओं, संस्कृतियों, परंपराओं, धर्मों और भौगोलिक परिस्थितियों वाला देश है। इतनी विविधताओं के बावजूद देशवासियों के बीच एकता, आपसी सम्मान और साझा राष्ट्रीय पहचान भारत की विशिष्ट ताकत है। राष्ट्रीय एकता दिवस हमें इस महत्वपूर्ण विरासत को समझने और इसे और मजबूत बनाने का अवसर प्रदान करता है। सरदार पटेल ने जिस एकीकृत भारत की कल्पना को साकार करने में अपना जीवन समर्पित किया, उसकी रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। राष्ट्रीय एकता का अर्थ केवल भौगोलिक सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में सद्भाव, परस्पर विश्वास, समान अवसर और संवैधानिक मूल्यों के प्रति सम्मान बनाए रखना भी है। जब देश के नागरिक एक-दूसरे की विविधताओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रहित में मिलकर कार्य करते हैं, तब सामाजिक और राष्ट्रीय विकास को नई गति मिलती है। मंत्रालयों में आयोजित शपथ कार्यक्रम इसी भावना को संस्थागत स्तर पर मजबूत करने का प्रयास है। ऐसे आयोजन अधिकारियों और कर्मचारियों को अपने दायित्वों के साथ राष्ट्रीय मूल्यों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया। यह विचार देश की विविधता को एकता की शक्ति में बदलने और विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं तथा संस्कृतियों के बीच आपसी जुड़ाव बढ़ाने का संदेश देता है। एक मजबूत और विकसित भारत के निर्माण के लिए सभी नागरिकों, संस्थाओं और सरकारी विभागों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। विकास का वास्तविक अर्थ केवल आर्थिक प्रगति नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सामाजिक समानता, मजबूत आधारभूत संरचना और प्रत्येक नागरिक के लिए सम्मानजनक अवसर सुनिश्चित करना भी है। इसके लिए शासन और समाज के बीच विश्वास तथा सहयोग का वातावरण जरूरी है। स्वास्थ्य और रसायन एवं उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े मंत्रालयों के अधिकारी-कर्मचारी अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी निर्वहन करके देश की विकास यात्रा में योगदान दे सकते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस पर दोहराया गया संकल्प इसी व्यापक लक्ष्य की ओर प्रेरित करता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्यक्षेत्र में निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ काम करे तथा राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाने में अपनी भूमिका निभाए। सरदार पटेल की विरासत हमें बताती है कि मजबूत राष्ट्र का निर्माण सामूहिक इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नेतृत्व और निरंतर प्रयासों से होता है।
राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित यह शपथ कार्यक्रम सरदार वल्लभभाई पटेल के महान योगदान को स्मरण करने और उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारने का प्रेरणादायक अवसर रहा। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता को बनाए रखने के सामूहिक संकल्प को दोहराया। यह संकल्प प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने, समाज में सद्भाव बनाए रखने और राष्ट्र के विकास में सक्रिय योगदान देने की प्रेरणा देता है। सरदार पटेल का जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण से असंभव दिखाई देने वाले कार्य भी संभव बनाए जा सकते हैं। आज उनके विचारों को आत्मसात करते हुए देश को एकजुट, सशक्त और विकसित बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का संकल्प तभी सार्थक होगा, जब सभी नागरिक आपसी सम्मान, सहयोग और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे। राष्ट्रीय एकता दिवस का यही संदेश है कि देश की एकता और अखंडता केवल किसी एक दिन का संकल्प नहीं, बल्कि प्रत्येक दिन निभाई जाने वाली सामूहिक जिम्मेदारी है। सरदार वल्लभभाई पटेल की अमर विरासत आने वाली पीढ़ियों को सदैव एक मजबूत, एकजुट और विकसित भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेगी।