Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

भावना की यात्रा किस ओर जाती… संजीव जैन

Author Image
Written by
HQ Report

समकालीन हिंदी कविता में आत्ममंथन और आत्मखोज की परंपरा सदैव महत्वपूर्ण रही है। कवि संजीव जैन की कविता “भावना की यात्रा किस ओर जाती…” इसी परंपरा का सशक्त प्रतिनिधित्व करती है। यह रचना मनुष्य के अंतर्मन में उठने वाले उन प्रश्नों को स्वर देती है, जो जीवन, अस्तित्व, चेतना और आत्मबोध से जुड़े हैं।

कवि अपनी छाया को एक ऐसे मौन साथी के रूप में प्रस्तुत करता है, जो हर क्षण उसके साथ चलता है और बिना कुछ कहे भी दिशा प्रदान करता है। यह छाया केवल भौतिक उपस्थिति नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर निवास करने वाली चेतना, विवेक और आत्मसंवाद का प्रतीक बन जाती है। जीवन की राह पर चलते हुए व्यक्ति अक्सर यह नहीं जान पाता कि वह किस दिशा में अग्रसर है, लेकिन उसके भीतर की अनुभूति और संवेदनाएं उसे निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहती हैं। इसी भाव को कवि ने बड़ी सहजता से व्यक्त किया है।

कविता का दूसरा पक्ष आत्मखोज की प्रक्रिया को सामने लाता है। कवि स्पष्ट करता है कि जिसे लोग उसका द्वंद्व समझते हैं, वह वास्तव में स्वयं को पहचानने का प्रयास है। मन के भीतर अनगिनत प्रश्न जन्म लेते हैं, जिनके उत्तर तुरंत प्राप्त नहीं होते। जीवन की यात्रा में व्यक्ति अनेक बार स्वयं से ही प्रश्न करता है कि वह कौन है, उसका उद्देश्य क्या है और उसके अस्तित्व का वास्तविक अर्थ क्या है। यही जिज्ञासा उसे आत्मबोध की ओर ले जाती है।

Advertisement Box

रचना का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि इसमें मनुष्य की चेतना को एक सक्रिय शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कवि की छाया नींद में भी उससे संवाद करती है और स्वप्नों के माध्यम से उसे जगाने का प्रयास करती है। यह संकेत करता है कि आत्मचेतना कभी निष्क्रिय नहीं होती। वह निरंतर मनुष्य को उसके वास्तविक स्वरूप से परिचित कराने का प्रयास करती रहती है।

कविता के अंतिम चरण में कवि जीवन के मूलभूत दार्शनिक प्रश्नों को सामने रखता है। वह जानना चाहता है कि मनुष्य का वास्तविक संसार क्या है, उसकी सीमाएं और उसका विस्तार क्या है तथा मन, वचन और कर्म के बीच संबंध किस प्रकार स्थापित होता है। ये प्रश्न केवल कवि के नहीं, बल्कि प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति के प्रश्न हैं। यही कारण है कि यह कविता पाठकों के मन में गहरा प्रभाव छोड़ती है।

सरल भाषा, सहज अभिव्यक्ति और गहन दार्शनिक चिंतन से परिपूर्ण यह रचना आत्मनिरीक्षण के लिए प्रेरित करती है। कविता यह संदेश देती है कि जीवन की सबसे महत्वपूर्ण यात्रा बाहरी दुनिया की नहीं, बल्कि अपने भीतर की यात्रा है। जब तक मनुष्य स्वयं को नहीं समझता, तब तक उसके लिए संसार का वास्तविक अर्थ भी अधूरा रहता है। संजीव जैन की यह कविता पाठकों को अपने भीतर झांकने और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ने का प्रेरक संदेश देती है।

सेंसेक्स 500 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,250 के नीचे फिसला; बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव
आज फोकस में

सेंसेक्स 500 अंक लुढ़का, निफ्टी 24,250 के नीचे फिसला; बैंकिंग शेयरों में बिकवाली से बाजार पर दबाव

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों को सलाह: ऑयल शेयरों से फिलहाल दूरी रखें, अच्छी SIP जारी रखें
आज फोकस में

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच निवेशकों को सलाह: ऑयल शेयरों से फिलहाल दूरी रखें, अच्छी SIP जारी रखें

तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा कंपनियों का रेवेन्यू, लेकिन बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबाव
आज फोकस में

तिमाहियों में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा कंपनियों का रेवेन्यू, लेकिन बढ़ती लागत से मार्जिन पर दबाव

20 जुलाई 2026 का पंचांग: भगवान शिव की आराधना, गुप्त नवरात्र की साधना और शुभ योगों से आलोकित रहेगा सोमवार
आज फोकस में

20 जुलाई 2026 का पंचांग: भगवान शिव की आराधना, गुप्त नवरात्र की साधना और शुभ योगों से आलोकित रहेगा सोमवार

15 जुलाई 2026 का पंचांग: गुप्त नवरात्र का शुभारंभ, चंद्र दर्शन और धार्मिक आस्था के बीच दिनभर रहेगी आध्यात्मिक ऊर्जा
आज फोकस में

15 जुलाई 2026 का पंचांग: गुप्त नवरात्र का शुभारंभ, चंद्र दर्शन और धार्मिक आस्था के बीच दिनभर रहेगी आध्यात्मिक ऊर्जा

आज का पंचांग, योगिनी एकादशी का महत्व और सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल: जानिए 9 जुलाई 2026 का संपूर्ण ज्योतिषीय विश्लेषण
आज फोकस में

आज का पंचांग, योगिनी एकादशी का महत्व और सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल: जानिए 9 जुलाई 2026 का संपूर्ण ज्योतिषीय विश्लेषण

आज का राशिफल

वोट करें

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने राहत कार्यक्रम की अगली किस्त जारी करने के लिए पाकिस्तान पर 11 नई शर्तें लगाई हैं। वैश्विक मंच पर क्या यह भारत की बड़ी जीत है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें