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खनिज संपदा से विकास को नई गति, मध्यप्रदेश में खनिज राजस्व संग्रहण ने पकड़ी रफ्तार

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2026-27 में ₹13,720 करोड़ खनिज राजस्व का लक्ष्य, अगस्त 2026 तक लक्ष्य के मुकाबले 106 प्रतिशत राजस्व प्राप्ति; प्रमुख जिलों में ₹3,147.10 करोड़ की डीएमएफ निधि से स्थानीय विकास को बढ़ावा
भोपाल। मध्यप्रदेश में खनिज संपदा को आर्थिक विकास और स्थानीय क्षेत्र के विकास से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए खनिज राजस्व से ₹13,720 करोड़ प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अगस्त 2026 तक निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 106 प्रतिशत राजस्व प्राप्ति दर्ज की गई है। खनिज क्षेत्र से प्राप्त राजस्व राज्य की आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए भी महत्वपूर्ण आधार उपलब्ध कराता है। खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन, राजस्व संग्रहण में प्रभावी निगरानी और नियमों के अनुपालन पर जोर दिए जाने से इस क्षेत्र की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
राजस्व प्राप्ति में उल्लेखनीय प्रगति खनिज राजस्व राज्य के गैर-कर राजस्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹13,720 करोड़ का लक्ष्य निर्धारित किया जाना खनिज क्षेत्र से अपेक्षित आर्थिक योगदान को दर्शाता है। अगस्त 2026 तक 106 प्रतिशत राजस्व प्राप्ति का आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य की दिशा में हुई प्रगति को रेखांकित करता है। राजस्व संग्रहण में वृद्धि का सीधा संबंध खनिज संसाधनों के व्यवस्थित दोहन, खनन गतिविधियों की निगरानी, वैधानिक प्रक्रियाओं के पालन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर प्रबंधन से है। इससे राज्य को विकास योजनाओं और विभिन्न सार्वजनिक गतिविधियों के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में सहायता मिलती है।

खनिज क्षेत्रों में स्थानीय विकास पर जोर खनन गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व का महत्व केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं है। खनिज बहुल और खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) की निधि महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार 10 प्रमुख जिलों में ₹3,147.10 करोड़ की डीएमएफ निधि से स्थानीय विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है। इस प्रकार की निधि का उद्देश्य खनन गतिविधियों से प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक बुनियादी सुविधाओं और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को मजबूत करना है, जिससे खनिज संपदा से मिलने वाले आर्थिक लाभ का प्रभाव स्थानीय स्तर तक पहुंच सके।
शिक्षा, स्वास्थ्य और आधारभूत सुविधाओं को मिल सकता है लाभ डीएमएफ निधि के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय प्राथमिकताओं के अनुरूप विभिन्न विकास कार्य किए जा सकते हैं। इनमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, स्वच्छता, सड़क, सामुदायिक सुविधाएं और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे से जुड़े कार्य शामिल हो सकते हैं। खनिज संसाधनों वाले क्षेत्रों में विकास की जरूरतें कई बार सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अलग होती हैं। ऐसे में स्थानीय परिस्थितियों और नागरिकों की आवश्यकताओं के आधार पर योजनाओं को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण माना जाता है। ₹3,147.10 करोड़ की निधि का उपयोग इसी दृष्टिकोण से स्थानीय विकास को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय आधार के रूप में देखा जा सकता है।
खनिज संपदा का जिम्मेदार उपयोग आवश्यक खनिज संसाधन सीमित और प्राकृतिक संपदा का हिस्सा हैं। इसलिए इनके उपयोग के साथ पर्यावरण संरक्षण, नियमों का पालन, सुरक्षित खनन और प्रभावित क्षेत्रों के संतुलित विकास पर ध्यान देना आवश्यक है। राजस्व में वृद्धि के साथ यह भी महत्वपूर्ण है कि खनन गतिविधियों से जुड़े क्षेत्रों में पर्यावरणीय और सामाजिक आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाए। पारदर्शी व्यवस्था, नियमित निगरानी और निर्धारित नियमों के प्रभावी पालन से खनिज क्षेत्र को अधिक व्यवस्थित और टिकाऊ बनाया जा सकता है। इससे राजस्व संग्रहण के साथ स्थानीय समुदायों को भी दीर्घकालिक लाभ मिल सकेगा।
आर्थिक विकास और जनकल्याण के बीच बनेगा बेहतर संतुलन मध्यप्रदेश की खनिज संपदा राज्य की आर्थिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ₹13,720 करोड़ के वार्षिक राजस्व लक्ष्य और अगस्त तक 106 प्रतिशत राजस्व प्राप्ति का आंकड़ा इस क्षेत्र की वित्तीय भूमिका को सामने रखता है। वहीं प्रमुख खनिज जिलों में ₹3,147.10 करोड़ की डीएमएफ निधि स्थानीय विकास को आर्थिक आधार प्रदान कर रही है। खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व का प्रभावी उपयोग, खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच बेहतर समन्वय से खनिज संपदा को व्यापक जनहित और विकास की दिशा में अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

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