
Written by
HQ Report
सेवा भारती ग्वालियर के सुपोषण जागरूकता अभियान के अंतर्गत 12 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई, करीब 70 माताओं की रही सहभागिता
ग्वालियर। सेवा भारती ग्वालियर द्वारा संचालित सुपोषण जागरूकता अभियान के अंतर्गत शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को महलगांव स्थित दिव्यांग बालक छात्रावास परिसर में विशेष सामूहिक गोद भराई कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को गर्भावस्था के दौरान संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। आयोजन के दौरान क्षेत्र की 12 गर्भवती महिलाओं की सामूहिक गोद भराई की रस्म पारंपरिक एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न कराई गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी देने के साथ गर्भवती माताओं को अपने स्वास्थ्य और खान-पान का विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर लगभग 70 माताओं की सहभागिता रही, जिससे कार्यक्रम में सामुदायिक भागीदारी का वातावरण बना रहा। आयोजन में उपस्थित महिलाओं ने पारंपरिक बधाई गीत प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम का माहौल उत्सवपूर्ण और आत्मीय बना रहा।
गोद भराई कार्यक्रम के माध्यम से सुपोषण का संदेश— सामूहिक गोद भराई भारतीय सामाजिक एवं पारिवारिक परंपरा से जुड़ा ऐसा अवसर है, जिसमें गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है। सेवा भारती द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को इसी पारंपरिक भावना के साथ स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता से जोड़ा गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अतिथियों ने गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त एवं संतुलित पोषण लेने के महत्व पर चर्चा की। महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान शरीर में पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है और भोजन में विविधता बनाए रखना आवश्यक है। संतुलित आहार के साथ चिकित्सकीय परामर्श, नियमित स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त आराम और स्वच्छता जैसी बातों पर भी ध्यान देना उपयोगी होता है। आयोजन का उद्देश्य किसी एक दिन तक सीमित न रहकर महिलाओं और परिवारों में ऐसी आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा, जो गर्भावस्था और मातृत्व की अवधि में स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
गर्भवती माताओं के पोषण पर दिया गया विशेष जोर— कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को ऐसे खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी गई, जिनसे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। भोजन में अनाज, दालें, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध अथवा उपलब्ध अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को संतुलित रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री का उपयोग भी परिवार अपने खान-पान की आदतों और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कर सकते हैं। गर्भावस्था में भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान किसी भी प्रकार की कमजोरी, असुविधा या स्वास्थ्य संबंधी समस्या को नजरअंदाज न करते हुए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इस तरह कार्यक्रम में पारंपरिक आयोजन को स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश के साथ जोड़कर गर्भवती माताओं तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया।










