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दिव्यांग बालक छात्रावास में आयोजित हुआ सामूहिक गोद भराई कार्यक्रम, गर्भवती महिलाओं को दिया सुपोषण का संदेश

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सेवा भारती ग्वालियर के सुपोषण जागरूकता अभियान के अंतर्गत 12 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई, करीब 70 माताओं की रही सहभागिता
ग्वालियर। सेवा भारती ग्वालियर द्वारा संचालित सुपोषण जागरूकता अभियान के अंतर्गत शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को महलगांव स्थित दिव्यांग बालक छात्रावास परिसर में विशेष सामूहिक गोद भराई कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को गर्भावस्था के दौरान संतुलित एवं पोषणयुक्त आहार के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। आयोजन के दौरान क्षेत्र की 12 गर्भवती महिलाओं की सामूहिक गोद भराई की रस्म पारंपरिक एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न कराई गई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी देने के साथ गर्भवती माताओं को अपने स्वास्थ्य और खान-पान का विशेष ध्यान रखने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर लगभग 70 माताओं की सहभागिता रही, जिससे कार्यक्रम में सामुदायिक भागीदारी का वातावरण बना रहा। आयोजन में उपस्थित महिलाओं ने पारंपरिक बधाई गीत प्रस्तुत किए, जिससे कार्यक्रम का माहौल उत्सवपूर्ण और आत्मीय बना रहा।
गोद भराई कार्यक्रम के माध्यम से सुपोषण का संदेश— सामूहिक गोद भराई भारतीय सामाजिक एवं पारिवारिक परंपरा से जुड़ा ऐसा अवसर है, जिसमें गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ जीवन की कामना की जाती है। सेवा भारती द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम को इसी पारंपरिक भावना के साथ स्वास्थ्य एवं पोषण जागरूकता से जोड़ा गया। कार्यक्रम में उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अतिथियों ने गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त एवं संतुलित पोषण लेने के महत्व पर चर्चा की। महिलाओं को बताया गया कि गर्भावस्था के दौरान शरीर में पोषक तत्वों की आवश्यकता बढ़ जाती है और भोजन में विविधता बनाए रखना आवश्यक है। संतुलित आहार के साथ चिकित्सकीय परामर्श, नियमित स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त आराम और स्वच्छता जैसी बातों पर भी ध्यान देना उपयोगी होता है। आयोजन का उद्देश्य किसी एक दिन तक सीमित न रहकर महिलाओं और परिवारों में ऐसी आदतों के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा, जो गर्भावस्था और मातृत्व की अवधि में स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हो सकती हैं।
गर्भवती माताओं के पोषण पर दिया गया विशेष जोर— कार्यक्रम के दौरान गर्भवती महिलाओं को ऐसे खाद्य पदार्थों को भोजन में शामिल करने की सलाह दी गई, जिनसे शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। भोजन में अनाज, दालें, हरी सब्जियां, मौसमी फल, दूध अथवा उपलब्ध अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को संतुलित रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक खाद्य सामग्री का उपयोग भी परिवार अपने खान-पान की आदतों और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार कर सकते हैं। गर्भावस्था में भोजन की मात्रा के साथ उसकी गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण होती है। इस दौरान किसी भी प्रकार की कमजोरी, असुविधा या स्वास्थ्य संबंधी समस्या को नजरअंदाज न करते हुए समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। इस तरह कार्यक्रम में पारंपरिक आयोजन को स्वास्थ्य जागरूकता के संदेश के साथ जोड़कर गर्भवती माताओं तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया गया।

माता और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को बताया महत्वपूर्ण— कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सेवा भारती महानगर ग्वालियर के सचिव डॉ. सुरेंद्र प्रधान ने गर्भावस्था के दौरान माता और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को महत्वपूर्ण बताते हुए उचित पोषण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गर्भावस्था में सही खान-पान और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां मां तथा बच्चे दोनों के लिए महत्वपूर्ण हैं। कार्यक्रम में इसी संदेश को केंद्र में रखते हुए उपस्थित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित किया गया। गर्भावस्था के दौरान चिकित्सकीय जांच और विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार आहार तथा आवश्यक देखभाल करना स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यक्रम में दिए गए संदेश का उद्देश्य महिलाओं को भय या चिंता में डालना नहीं, बल्कि उन्हें अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के प्रति जागरूक बनाना और परिवार के स्तर पर सहयोगपूर्ण वातावरण तैयार करने के लिए प्रेरित करना रहा।
लगभग 70 माताओं की सहभागिता से उत्सवमय हुआ वातावरण— कार्यक्रम में क्षेत्र की लगभग 70 माताओं की गरिमापूर्ण उपस्थिति रही। सामूहिक सहभागिता के कारण गोद भराई कार्यक्रम केवल एक पारंपरिक रस्म तक सीमित नहीं रहा, बल्कि महिलाओं के बीच संवाद और सामाजिक सहभागिता का अवसर भी बना। उपस्थित महिलाओं ने पारंपरिक बधाई गीत गाकर गर्भवती माताओं के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। गीत-संगीत और पारंपरिक वातावरण के बीच आयोजित कार्यक्रम से परिसर में उत्साह और आत्मीयता का माहौल दिखाई दिया। इस तरह के सामुदायिक कार्यक्रम महिलाओं को एक-दूसरे से जुड़ने, अनुभव साझा करने और स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित उपयोगी जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। आयोजन में गर्भवती महिलाओं को सम्मान और शुभकामनाओं के साथ उनके स्वास्थ्य के प्रति परिवार और समाज की जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया।
सेवा भारती के कार्यकर्ताओं ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका— आयोजन में सेवा भारती से जुड़े विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता और संबंधित संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में पूर्व बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सुश्री संदीपा मल्होत्रा, छात्रावास समिति अध्यक्ष सुबोध माथुर, स्वावलंबन एवं वैभव महानगर प्रमुख स्वराज माथुर, ग्वालियर जिला सचिव डॉ. दिनेश चौहान, वर्षा शर्मा, सदस्य रीना शर्मा, पूर्णकालिक कार्यकर्ता अजय माहोर, छात्रावास अधीक्षक राहुल उपाध्याय और रेनू सिसोदिया सहित सेवा भारती के अन्य कार्यकर्ताओं की सहभागिता रही। सभी ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और आयोजन में सहयोग किया। उपस्थित अतिथियों एवं कार्यकर्ताओं ने गर्भवती महिलाओं से संवाद करते हुए उनके स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषयों को समझने तथा जागरूकता संदेश को आगे बढ़ाने की दिशा में सहभागिता की।
सामुदायिक जागरूकता से मजबूत हो सकता है सुपोषण का संदेश— गर्भावस्था के दौरान पोषण की आवश्यकता केवल गर्भवती महिला तक सीमित नहीं रहती, बल्कि परिवार की भोजन संबंधी आदतें और सहयोगपूर्ण वातावरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी कारण स्वास्थ्य एवं पोषण से संबंधित जागरूकता कार्यक्रमों में परिवार और समुदाय की सहभागिता उपयोगी हो सकती है। सेवा भारती के इस आयोजन में सामूहिक रूप से महिलाओं की भागीदारी ने इसी सामुदायिक दृष्टिकोण को सामने रखा। कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि गर्भवती महिलाओं को पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम, स्वच्छता और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच उपलब्ध कराने में परिवार के सदस्यों को सहयोग करना चाहिए। स्थानीय स्तर पर नियमित जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होने से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
पोषण के साथ नियमित स्वास्थ्य देखभाल भी जरूरी— गर्भावस्था के दौरान संतुलित आहार के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच का भी विशेष महत्व होता है। चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार आवश्यक जांच, दवाओं और पोषक तत्वों का सेवन, पर्याप्त आराम तथा किसी भी असामान्य लक्षण की स्थिति में स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना सुरक्षित मातृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। कार्यक्रम में पोषण के महत्व को इसी व्यापक स्वास्थ्य देखभाल के संदर्भ में समझाया गया। महिलाओं को अपने स्वास्थ्य संबंधी सवालों को खुलकर पूछने और आवश्यकता होने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। जागरूकता का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गर्भवती महिलाएं अपनी आवश्यकताओं को समझें और स्वास्थ्य सेवाओं का समय पर उपयोग करें। इस तरह सामुदायिक कार्यक्रम स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव के बीच एक उपयोगी कड़ी बन सकते हैं।
पारंपरिक संस्कृति और स्वास्थ्य जागरूकता का संगम— गोद भराई भारतीय समाज की पारंपरिक रस्मों में शामिल रही है, जिसमें गर्भवती महिला को शुभकामनाएं देने और आने वाले शिशु के स्वस्थ जीवन की कामना करने की परंपरा है। सेवा भारती ने इस पारंपरिक अवसर को सुपोषण जागरूकता से जोड़कर कार्यक्रम को सामाजिक उपयोगिता का स्वरूप दिया। बधाई गीतों और पारंपरिक वातावरण के बीच स्वास्थ्य संबंधी जानकारी साझा किए जाने से आयोजन में सांस्कृतिक और जागरूकता दोनों पहलू देखने को मिले। ऐसी गतिविधियों में यदि वैज्ञानिक स्वास्थ्य जानकारी को सरल भाषा में प्रस्तुत किया जाए तो लोगों के लिए उसे समझना और अपने दैनिक जीवन में अपनाना आसान हो सकता है। कार्यक्रम में भी महिलाओं को पोषण और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का संदेश इसी उद्देश्य से दिया गया।
महिलाओं के स्वास्थ्य के प्रति परिवार की भूमिका पर भी जोर— गर्भवती महिला के स्वास्थ्य की देखभाल में परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है। भोजन की उपलब्धता, समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंच, नियमित जांच, आराम के लिए उचित वातावरण और मानसिक रूप से सहयोगपूर्ण माहौल जैसी छोटी-छोटी बातें गर्भवती महिला के लिए उपयोगी हो सकती हैं। कार्यक्रम के माध्यम से उपस्थित महिलाओं और परिवारों को इसी प्रकार की सहयोगात्मक भूमिका के प्रति जागरूक करने का प्रयास किया गया। सुपोषण केवल किसी एक खाद्य पदार्थ के सेवन से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि संतुलित भोजन, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग और परिवार के सहयोग से जुड़ी व्यापक प्रक्रिया है। इसलिए गर्भावस्था के दौरान महिला की जरूरतों को समझना और उसके स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना परिवार की सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जा सकता है।
क्षेत्र की महिलाओं तक जागरूकता पहुंचाने का प्रयास— सेवा भारती ग्वालियर द्वारा चलाया जा रहा सुपोषण जागरूकता अभियान पोषण संबंधी विषयों को सामुदायिक स्तर तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है। महलगांव स्थित दिव्यांग बालक छात्रावास परिसर में आयोजित कार्यक्रम में 12 गर्भवती महिलाओं को शामिल कर सामूहिक गोद भराई की गई। इसके माध्यम से गर्भावस्था के दौरान भोजन और स्वास्थ्य देखभाल के महत्व को प्रमुखता से सामने रखा गया। लगभग 70 माताओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को सामूहिक स्वरूप दिया। महिलाओं के बीच पारंपरिक बधाई गीतों के साथ आयोजित कार्यक्रम ने सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत किया। इस तरह का आयोजन महिलाओं के लिए संवाद, जानकारी और शुभकामनाओं का एक साझा मंच बना।
सुपोषण के प्रति निरंतर जागरूकता की आवश्यकता— मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों में जागरूकता की निरंतर आवश्यकता रहती है। एक कार्यक्रम के माध्यम से मिली जानकारी तभी अधिक प्रभावी हो सकती है, जब परिवार उसे दैनिक जीवन में व्यवहार के रूप में अपनाने का प्रयास करे। संतुलित भोजन, पर्याप्त आराम, स्वच्छता, नियमित स्वास्थ्य जांच और विशेषज्ञों की सलाह का पालन गर्भावस्था के दौरान महत्वपूर्ण है। सामुदायिक संगठनों द्वारा इस तरह की गतिविधियां आयोजित किए जाने से स्वास्थ्य संबंधी संदेश स्थानीय स्तर पर सरल तरीके से पहुंच सकता है। महिलाओं के बीच आपसी संवाद और अनुभवों का आदान-प्रदान भी उन्हें अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के प्रति अधिक सजग बनाने में सहायक हो सकता है। कार्यक्रम में भी इसी व्यापक जागरूकता की दिशा में प्रयास किया गया।
दिव्यांग बालक छात्रावास परिसर बना सामाजिक जागरूकता का केंद्र— महलगांव स्थित दिव्यांग बालक छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम ने परिसर को एक सामाजिक एवं जागरूकता गतिविधि के मंच के रूप में सामने रखा। यहां एक ओर गर्भवती महिलाओं की पारंपरिक गोद भराई की रस्म संपन्न हुई, वहीं दूसरी ओर उपस्थित महिलाओं को सुपोषण और स्वास्थ्य देखभाल के बारे में जानकारी दी गई। आयोजन में सेवा भारती के पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने बधाई गीतों के माध्यम से उत्सव का वातावरण बनाया। इस तरह धार्मिक-सामाजिक परंपरा, महिला सहभागिता और स्वास्थ्य जागरूकता को एक साथ जोड़कर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
स्वस्थ मातृत्व और स्वस्थ बचपन की दिशा में सामूहिक प्रयास— किसी भी समाज में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए परिवार, स्वास्थ्य सेवाओं और समुदाय के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होता है। गर्भावस्था के दौरान महिला को पौष्टिक भोजन और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के साथ उसे भावनात्मक एवं सामाजिक सहयोग भी मिलना चाहिए। सुपोषण जागरूकता अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में इन्हीं पहलुओं को सरल तरीके से सामने लाने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अतिथियों ने पोषणयुक्त आहार के महत्व पर जानकारी दी तथा महिलाओं की शंकाओं और जिज्ञासाओं को समझने का प्रयास किया। इससे उपस्थित महिलाओं को अपने स्वास्थ्य के प्रति अधिक सजग रहने का संदेश मिला।
आयोजन का संदेश व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर जोर— सुपोषण से जुड़ी जानकारी को केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित रखने के बजाय परिवार और आसपास के समुदाय तक पहुंचाना भी ऐसे अभियानों की महत्वपूर्ण कड़ी है। गर्भवती महिलाओं के साथ परिवार के अन्य सदस्यों को भी यह समझना आवश्यक है कि गर्भावस्था में महिला की भोजन संबंधी जरूरतों और स्वास्थ्य देखभाल में बदलाव आते हैं। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं का उपयोग किसी भी परेशानी की स्थिति में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसी प्रकार बच्चों के जन्म के बाद भी माता और शिशु दोनों के पोषण तथा स्वास्थ्य की निरंतर देखभाल आवश्यक रहती है। इसलिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों का प्रभाव दीर्घकालिक बनाने के लिए संदेश को परिवारों के दैनिक व्यवहार से जोड़ना उपयोगी रहेगा।
कार्यक्रम में सामूहिक सहभागिता ने बढ़ाई गरिमा— आयोजन में मौजूद लगभग 70 माताओं ने कार्यक्रम को सामूहिक और आत्मीय स्वरूप प्रदान किया। पारंपरिक बधाई गीतों ने गोद भराई की रस्म को सांस्कृतिक रंग दिया और गर्भवती महिलाओं के प्रति शुभकामना एवं अपनत्व का भाव व्यक्त किया। अतिथियों और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी से कार्यक्रम में समन्वय और सहयोग का वातावरण रहा। आयोजन में शामिल सभी लोगों ने अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग किया। गोद भराई जैसी पारंपरिक रस्म के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सम्मान देना और उसी अवसर पर स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी संदेश साझा करना कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता रही।
सेवा, जागरूकता और सामाजिक सहभागिता का संदेश— सेवा भारती ग्वालियर द्वारा आयोजित यह कार्यक्रम सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता के बीच समन्वय का उदाहरण रहा। कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं को केंद्र में रखते हुए सुपोषण की आवश्यकता पर जानकारी दी गई तथा सामूहिक गोद भराई की रस्म के माध्यम से उन्हें शुभकामनाएं दी गईं। उपस्थित महिलाओं की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि मातृ स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि परिवार और समुदाय की साझा जिम्मेदारी भी है। स्वस्थ मां और बच्चे के लिए पोषण, स्वास्थ्य देखभाल, स्वच्छता तथा समय पर चिकित्सा परामर्श को महत्व देना आवश्यक है। कार्यक्रम में उपस्थित पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर सहभागिता की।
भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रमों से बढ़ सकती है जागरूकता— स्थानीय स्तर पर आयोजित होने वाले स्वास्थ्य एवं सुपोषण संबंधी कार्यक्रम ग्रामीण और शहरी समुदायों में महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचाने का माध्यम बन सकते हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं को उनके स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े विषयों की जानकारी सरल भाषा में उपलब्ध कराना उपयोगी है। ऐसे कार्यक्रमों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी से महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य परिस्थितियों के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेने के लिए भी प्रेरित किया जा सकता है। सामुदायिक सहभागिता से महिलाओं को अकेलेपन के बजाय सहयोग और संवाद का वातावरण मिलता है। सेवा भारती के इस आयोजन ने भी पारंपरिक सामाजिक कार्यक्रम को जागरूकता के उद्देश्य से जोड़ते हुए इसी दिशा में एक प्रयास प्रस्तुत किया।
सुपोषित परिवार की दिशा में जागरूकता जरूरी— स्वस्थ समाज की नींव स्वस्थ परिवारों से बनती है और स्वस्थ परिवार के लिए मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य का विशेष महत्व है। गर्भावस्था के दौरान महिला के भोजन, स्वास्थ्य जांच, आराम और देखभाल पर पर्याप्त ध्यान दिया जाना आवश्यक है। सुपोषण का अर्थ केवल पर्याप्त भोजन नहीं, बल्कि पौष्टिक और संतुलित आहार के साथ सुरक्षित स्वास्थ्य व्यवहार अपनाना भी है। इस संदेश को समाज के प्रत्येक परिवार तक पहुंचाने में स्थानीय संगठनों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। 11 सितंबर को महलगांव स्थित दिव्यांग बालक छात्रावास में आयोजित सामूहिक गोद भराई कार्यक्रम ने इसी संदेश को सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया।
कार्यक्रम ने छोड़ा जागरूकता और शुभकामना का संदेश— सेवा भारती ग्वालियर के सुपोषण जागरूकता अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में 12 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी और लगभग 70 माताओं की सहभागिता रही। कार्यक्रम में पारंपरिक बधाई गीतों ने उत्सव का वातावरण बनाया, जबकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और अतिथियों ने गर्भावस्था में पोषण की उपयोगिता को रेखांकित किया। सेवा भारती के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सहभागिता से आयोजन व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि गर्भवती माताओं के स्वास्थ्य और गर्भस्थ शिशु के विकास के लिए परिवार और समाज को सहयोगी भूमिका निभानी चाहिए।
सुपोषण, स्वास्थ्य जागरूकता और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से स्वस्थ मातृत्व एवं स्वस्थ बचपन की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा सकते हैं।

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