Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

क्या हैं ऑफिसर ट्रेनिंग कैम्प…………….राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजबूत रीढ़ की हड्डी

Author Image
Written by
Bureau Report

नई दिल्ली :-  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कार्यप्रणाली और परंपराओं को लेकर अक्सर लोगों में जिज्ञासा रहती है। संघ की शब्दावली में बीते 100 सालों में एक शब्द प्रचलित रहा, जो कि ओटीसी (ऑफिसर ट्रेनिंग कैम्प) है। यह दरअसल यहीं वहां शिविर है, जिसे 1950 के दशक से आधिकारिक रूप से संघ शिक्षा वर्ग (एसएसवी) कहा जाने लगा। आज भी संगठन के भीतर पुराने स्वयंसेवक इस शिविर को ओटीसी नाम से ही पुकारते हैं। संघ के ये प्रशिक्षण शिविर केवल दो बार रोके गए 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद लगे प्रतिबंध के दौरान और 1975 में इमरजेंसी में। हाल ही में कोरोना महामारी के दौरान दो साल तक शिविर नहीं हो सके। संघ शिक्षा वर्ग की शुरुआत 1927 में हुई, तब तय किया गया कि स्वयंसेवकों को घर-परिवार से दूर रखकर संघ की विचारधारा और संगठनात्मक जीवन का अनुभव कराया जाए। गर्मियों की छुट्टियों में 1 मई से 10 जून तक 40 दिन के इन शिविरों का आयोजन होता था। शुरुआती दौर में इन्हें ग्रीष्मकालीन शिविर कहा गया, बाद में अंग्रेज़ी प्रभाव के चलते नाम पड़ गया ऑफिसर ट्रेनिंग कैम्प। संघ शिक्षा वर्ग तीन स्तरों पर होता है। प्रथम वर्ष का वर्ग प्रांत स्तर पर आयोजित होता है, इसमें स्थानीय जिलों के स्वयंसेवक भाग लेते हैं। द्वितीय वर्ष का वर्ग क्षेत्रीय स्तर पर होता है, जिसमें कई प्रांतों के प्रतिभागी शामिल होते हैं। तृतीय वर्ष का वर्ग हमेशा नागपुर में आयोजित होता है, जहां स्वयं सरसंघचालक और देश की प्रख्यात विभूतियां स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन करती हैं। इन शिविरों में स्वयंसेवकों को शारीरिक प्रशिक्षण, खेल, नियुद्ध, योगाभ्यास, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और बौद्धिक चर्चाओं से गुजरना होता है। पहले 40 दिन का प्रशिक्षण आज घटकर प्रथम वर्ष के लिए 15 दिन, द्वितीय वर्ष के लिए 20 दिन और तृतीय वर्ष के लिए 25 दिन हो गया है। खास बात यह है कि इस दौरान स्वयंसेवक पूरी तरह अनुशासित जीवन जीते हैं और बिना मोबाइल-गैजेट्स के रहते हैं। संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार स्वयं इन वर्गों में भाग लेते और हर स्वयंसेवक से व्यक्तिगत संवाद करते थे। 1938 में लाहौर में भी ऐसा शिविर आयोजित हुआ। गांधीजी और डॉ. भीमराव अंबेडकर जैसे राष्ट्रीय नेताओं ने भी संघ शिक्षा वर्गों में भाग लेने वाले स्वयंसेवकों की अनुशासनप्रियता और समर्पण भावना की सराहना की थी। संघ के अनुसार, इन शिविरों का उद्देश्य केवल शारीरिक या बौद्धिक प्रशिक्षण नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के लिए कार्यकर्ताओं को तैयार करना है। आज भी स्वयंसेवक वर्गों से लौटकर नई शाखाओं की स्थापना करते हैं और समाजसेवा में जुट जाते हैं।

Advertisement Box

आज का राशिफल

वोट करें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें