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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आज नई दिल्ली प्रवास, नागपंचमी पर भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी में होंगे शामिल

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का सोमवार, 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली प्रवास प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री के दौरा कार्यक्रम के अनुसार वे नागपंचमी के पावन अवसर पर भगवान महाकालेश्वर जी की तृतीय सवारी के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इसके बाद वे नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां विभिन्न निर्धारित कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे।

जारी कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रातः 8:30 बजे ब्रीफिंग में शामिल होंगे। इसके बाद 8:40 से 8:55 बजे के बीच स्टेट हैंगर, भोपाल से प्रस्थान/आगमन संबंधी कार्यक्रम निर्धारित है। कार्यक्रम में उनके भोपाल से नई दिल्ली रवाना होने की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री का नई दिल्ली प्रवास राज्य से जुड़े विभिन्न विषयों और निर्धारित कार्यक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री प्रातः 9:00 बजे से 10:10 बजे के बीच वायुयान से स्टेट हैंगर भोपाल से इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नई दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद नई दिल्ली में उनके स्थानीय कार्यक्रम आयोजित होंगे। जारी कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया है कि पश्चातवर्ती कार्यक्रम पृथक रूप से जारी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह प्रवास ऐसे समय हो रहा है जब देशभर में नागपंचमी का पर्व धार्मिक आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में भी इस अवसर पर विभिन्न धार्मिक स्थलों पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जा रहे हैं। भगवान शिव और नाग देवता की आराधना के इस पावन पर्व पर उज्जैन स्थित भगवान महाकालेश्वर मंदिर में विशेष धार्मिक महत्व रहता है।

भगवान महाकालेश्वर की सवारी मध्यप्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली भगवान महाकाल की सवारियों में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में सहभागिता रहती है। नागपंचमी के अवसर पर भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी को लेकर धार्मिक वातावरण विशेष रूप से भक्तिमय रहता है। इस अवसर पर भगवान महाकाल की आराधना और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं उज्जैन से जुड़े रहे हैं और भगवान महाकालेश्वर की नगरी उज्जैन का धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व प्रदेश की पहचान से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में नागपंचमी के अवसर पर महाकालेश्वर की तृतीय सवारी से जुड़े कार्यक्रमों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सहभागिता से धार्मिक आयोजन में उनकी आस्था और प्रदेश की सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता भी सामने आती है।

नागपंचमी के अवसर पर भगवान शिव और नाग देवता की पूजा की विशेष परंपरा है। सनातन धर्म में नागों को भगवान शिव से जुड़ा हुआ माना जाता है। भगवान महाकालेश्वर की आराधना और नागपंचमी का पर्व एक ही अवसर पर होने से उज्जैन में धार्मिक उत्साह और बढ़ जाता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है।

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी आवश्यक तैयारियां की जाती हैं। धार्मिक आयोजन में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जाती है। महाकालेश्वर मंदिर और सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए संबंधित विभागों के स्तर पर व्यवस्थाओं का समन्वय महत्वपूर्ण रहता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नई दिल्ली प्रवास का अगला चरण भी महत्वपूर्ण रहेगा। भोपाल से वायुयान के माध्यम से नई दिल्ली पहुंचने के बाद उनके निर्धारित स्थानीय कार्यक्रम होंगे। हालांकि उपलब्ध कार्यक्रम पत्र के अनुसार नई दिल्ली पहुंचने के बाद के विस्तृत कार्यक्रम अलग से जारी किए जाने की बात कही गई है। ऐसे में आगामी कार्यक्रमों की जानकारी संबंधित स्तर से पृथक रूप से सामने आएगी।

मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आयोजन और प्रशासनिक दायित्वों के बीच संतुलन का उदाहरण है। एक ओर वे प्रदेश की महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा से जुड़े भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी के अवसर पर अपनी सहभागिता दर्ज करेंगे, वहीं दूसरी ओर नई दिल्ली में निर्धारित कार्यक्रमों में शामिल होकर राज्य से जुड़े विषयों पर अपनी भूमिका निभाएंगे।

नागपंचमी के अवसर पर प्रदेशभर में श्रद्धालुओं द्वारा भगवान शिव और नाग देवता की पूजा-अर्चना की जा रही है। घरों और मंदिरों में धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। श्रद्धालु परिवार की सुख-शांति, समृद्धि, आरोग्य और मंगल की कामना कर रहे हैं। उज्जैन में भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी इस धार्मिक माहौल को और अधिक भव्यता प्रदान करेगी।

महाकाल की सवारी मध्यप्रदेश की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सवारी के दौरान भगवान महाकाल का पूजन और दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। उज्जैन को भगवान महाकाल की नगरी के रूप में देशभर में विशेष पहचान प्राप्त है और श्रावण-भाद्रपद के दौरान यहां धार्मिक गतिविधियों का विशेष विस्तार देखने को मिलता है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यक्रम के अनुसार सोमवार का दिन उनके लिए व्यस्त रहेगा। सुबह निर्धारित कार्यक्रम के बाद भोपाल से नई दिल्ली के लिए प्रस्थान और वहां पहुंचने के बाद स्थानीय कार्यक्रमों में सहभागिता प्रस्तावित है। प्रशासनिक एवं राजनीतिक स्तर पर नई दिल्ली प्रवास के दौरान होने वाली गतिविधियों पर भी नजर रहेगी।

नागपंचमी के पावन अवसर पर भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी के साथ मुख्यमंत्री की सहभागिता प्रदेश की धार्मिक विरासत के प्रति सम्मान का संदेश देती है। प्रदेश सरकार द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों के विकास तथा उनसे जुड़ी परंपराओं को संरक्षित करने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। उज्जैन का महाकाल लोक और भगवान महाकालेश्वर मंदिर प्रदेश की धार्मिक पर्यटन पहचान के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिर परिसर और सवारी से जुड़े क्षेत्रों में धार्मिक जयकारों से वातावरण भक्तिमय होने की उम्मीद है। भगवान महाकाल के दर्शन और सवारी के माध्यम से श्रद्धालु अपनी आस्था व्यक्त करेंगे तथा परिवार एवं समाज के सुख-समृद्धि की कामना करेंगे।

कुल मिलाकर, 17 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम धार्मिक आस्था और प्रशासनिक दायित्वों से जुड़ा हुआ है। नागपंचमी के अवसर पर भगवान महाकालेश्वर की तृतीय सवारी से जुड़े कार्यक्रम में सहभागिता के बाद मुख्यमंत्री का नई दिल्ली प्रवास प्रस्तावित है। भोपाल से नई दिल्ली पहुंचने के बाद उनके स्थानीय कार्यक्रम होंगे, जिनका विस्तृत विवरण पृथक रूप से जारी किया जाएगा।

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