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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने धारकुंडी पहुँचकर किए ब्रह्मलीन गुरुदेव स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के अंतिम दिव्य दर्शन

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विंध्य अंचल में शोक की लहर, मुख्यमंत्री ने संत के चरणों में अर्पित किए श्रद्धा सुमन

कहा – आस्था, अध्यात्म और मानव कल्याण के अमर प्रतीक थे स्वामी जी

सतना। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को सतना जिले के धारकुंडी पहुँचकर परम पूज्य संत शिरोमणि स्वामी सच्चिदानंद सद्गुरु महाराज जी के ब्रह्मलीन होने पर उनके अंतिम दिव्य दर्शन किए। मुख्यमंत्री ने धारकुंडी आश्रम में महाराज जी के पार्थिव शरीर के समक्ष भावपूर्ण नमन करते हुए उनके चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस अवसर पर पूरा आश्रम परिसर श्रद्धा, शोक और आध्यात्मिक भावनाओं से ओतप्रोत नजर आया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिव्य दर्शन उपरांत कहा कि स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने से पूरे विंध्य क्षेत्र सहित प्रदेशभर में गहरा शोक व्याप्त है। वे केवल एक संत नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, अध्यात्म, साधना और जीवन मार्गदर्शन का प्रमुख केंद्र थे। उनका सान्निध्य जनमानस को सदैव आध्यात्मिक ऊर्जा, सकारात्मक सोच और जीवन को सही दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा प्रदान करता रहा।

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संत का जीवन, समाज के लिए प्रकाश स्तंभ

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूज्य स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज का संपूर्ण जीवन तप, त्याग, साधना और मानव कल्याण को समर्पित रहा। उन्होंने सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर समाज को सत्य, करुणा, अहिंसा और सेवा का संदेश दिया। स्वामी जी जैसे संत समाज के लिए प्रकाश स्तंभ होते हैं, जो अंधकार में भी मानवता को मार्ग दिखाते हैं।

डॉ. यादव ने कहा कि स्वामी जी की शिक्षाएं केवल प्रवचन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि उनके आचरण और जीवन शैली में भी दिखाई देती थीं। यही कारण है कि उनके विचार और साधना आज भी लोगों के हृदय में जीवित हैं और आने वाली पीढ़ियों को निरंतर प्रेरणा देती रहेंगी।

धारकुंडी आश्रम बना महत्वपूर्ण तीर्थस्थल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धारकुंडी आश्रम, जहां स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज ने वर्षों तक तप और साधना की, आज एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक तीर्थस्थल के रूप में स्थापित हो चुका है। यहां न केवल प्रदेश, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु आत्मिक शांति और मार्गदर्शन की खोज में आते रहे हैं।

उन्होंने कहा कि स्वामी जी के तप, साधना और विचारों की अमिट छाप इस आश्रम और उससे जुड़े लाखों अनुयायियों के जीवन में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। यह आश्रम आने वाले समय में भी अध्यात्म, सेवा और समाज कल्याण का केंद्र बना रहेगा।

विंध्य अंचल में शोक की लहर

स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज के ब्रह्मलीन होने के समाचार से पूरे विंध्य अंचल में शोक की लहर दौड़ गई है। धारकुंडी आश्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, शिष्य और संत-महात्मा अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। आश्रम परिसर में “ॐ शांति” और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच वातावरण अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक बना रहा।

श्रद्धालुओं का कहना है कि उन्होंने स्वामी जी को केवल सुना नहीं, बल्कि उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को बदला। यही कारण है कि उनके देहावसान को व्यक्तिगत क्षति के रूप में महसूस किया जा रहा है।

जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की उपस्थिति

मुख्यमंत्री के साथ नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री श्रीमती प्रतिमा बागरी, सांसद श्री गणेश सिंह, चित्रकूट विधायक श्री सुरेंद्र सिंह गहरवार, जिलाध्यक्ष श्री भगवती प्रसाद पाण्डेय, रीवा संभागायुक्त श्री बी.एस. जामोद, आईजी श्री गौरव राजपूत, कलेक्टर सतना डॉ. सतीश कुमार एस, पुलिस अधीक्षक श्री हंसराज सिंह सहित अनेक स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और साधु-संत उपस्थित रहे।

सभी ने स्वामी जी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें नमन किया और आश्रम परिवार को सांत्वना दी।

स्वामी जी की शिक्षाएं रहेंगी अमर

इस अवसर पर उपस्थित संतों और श्रद्धालुओं ने कहा कि स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज भले ही आज भौतिक रूप में हमारे बीच न हों, लेकिन उनकी शिक्षाएं, विचार और साधना सदैव जीवित रहेंगी। उन्होंने जिस आध्यात्मिक मार्ग का निर्माण किया, वह आने वाली पीढ़ियों को भी सत्य, सेवा और सदाचार की ओर प्रेरित करता रहेगा।

मुख्यमंत्री ने भी यही भाव व्यक्त करते हुए कहा कि स्वामी जी का जीवन और संदेश कभी समाप्त नहीं हो सकता। उनके आदर्श समाज को जोड़ने और मानवता को मजबूत करने का कार्य निरंतर करते रहेंगे।

ईश्वर से प्रार्थना

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित उपस्थित सभी जनप्रतिनिधियों, संतों और श्रद्धालुओं ने ईश्वर से प्रार्थना की कि ब्रह्मलीन पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें तथा उनके शोकाकुल अनुयायियों और श्रद्धालुओं को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।

धारकुंडी आश्रम में श्रद्धा, साधना और शांति के बीच स्वामी सच्चिदानंद जी महाराज को अंतिम विदाई दी गई। उनका जीवन, उनकी साधना और उनका संदेश सदैव समाज को दिशा देता रहेगा।
ॐ शांति।

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