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ग्राम स्तर पर निःशुल्क नेत्र जांच अभियान से लोगों को मिल रहा बेहतर दृष्टि स्वास्थ्य का लाभ

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HQ Report

सीहोर। जिले में 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों की आंखों की रोशनी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए संचालित पेस्बायोपिया परियोजना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। इस परियोजना के माध्यम से ग्राम स्तर पर ही नागरिकों की नजदीकी दृष्टि संबंधी जांच की जा रही है तथा आवश्यकता अनुसार निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में ग्रामीणों को समय रहते दृष्टि दोष की पहचान और उपचार का लाभ मिल रहा है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना का उद्देश्य बढ़ती आयु के साथ होने वाली नजदीक देखने की समस्या अर्थात पेस्बायोपिया की समय पर पहचान करना तथा प्रभावित व्यक्तियों को आवश्यक सहायता प्रदान करना है। परियोजना की शुरुआत जिले के भैरूंदा और इछावर विकासखंडों में की गई, जहां आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने गांव-गांव पहुंचकर लोगों की आंखों की जांच की और उन्हें दृष्टि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी किया।

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विशेषज्ञों के अनुसार 40 वर्ष की आयु के बाद अधिकांश लोगों में नजदीक की वस्तुओं को देखने में कठिनाई होने लगती है। यह एक सामान्य स्थिति है, लेकिन समय पर पहचान और उपयुक्त चश्मे की उपलब्धता से इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण कई लोग वर्षों तक इस समस्या से जूझते रहते हैं, जिससे उनके दैनिक जीवन और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

पेस्बायोपिया परियोजना के अंतर्गत अब तक लगभग 2,500 लोगों की दृष्टि जांच की जा चुकी है। जांच के दौरान ऐसे लोगों की पहचान की गई जिन्हें नजदीक देखने में कठिनाई हो रही थी। इनमें से लगभग 800 लाभार्थियों को निःशुल्क रीडिंग ग्लासेस उपलब्ध कराए गए हैं। चश्मा प्राप्त करने के बाद लाभार्थियों ने पढ़ने-लिखने, दस्तावेजों को देखने, धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन करने तथा अन्य दैनिक कार्यों में सुविधा महसूस की है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेक वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह परियोजना विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है। पहले उन्हें आंखों की जांच के लिए शहरों या बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक जाना पड़ता था, जिससे समय और धन दोनों की आवश्यकता होती थी। अब गांव के निकट ही जांच और चश्मे की सुविधा उपलब्ध होने से लोगों को राहत मिली है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने के साथ-साथ लोगों का स्वास्थ्य तंत्र पर विश्वास भी मजबूत हुआ है।

परियोजना के सफल क्रियान्वयन में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा घर-घर संपर्क स्थापित कर लोगों को जांच के लिए प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने ग्रामीणों को यह भी समझाया कि दृष्टि संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, क्योंकि समय पर उपचार से जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है।

परियोजना को तकनीकी सहयोग प्रदान करने वाली संस्था विलियम जे. क्लिंटन फाउंडेशन भी इस पहल को ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार का प्रभावी मॉडल मान रही है। संस्था के सहयोग से स्क्रीनिंग प्रक्रिया को व्यवस्थित और प्रभावी बनाया गया है, जिससे अधिक से अधिक लोगों तक सेवाएं पहुंचाई जा सकें। स्वास्थ्य विभाग और तकनीकी सहयोगी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है।

जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने परियोजना के उत्साहजनक परिणामों को देखते हुए इसका विस्तार करने का निर्णय लिया है। आगामी चरण में बुधनी, आष्टा और श्यामपुर विकासखंडों को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा। विस्तार के बाद जिले के सभी पांच विकासखंडों में 40 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों को उनके निकटतम आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर निःशुल्क दृष्टि जांच और आवश्यकतानुसार चश्मे की सुविधा उपलब्ध होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि दृष्टि दोष की समय पर पहचान न केवल व्यक्ति की कार्यक्षमता बढ़ाती है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और आत्मविश्वास पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है। जिन लोगों को पढ़ने, लिखने या घरेलू कार्यों में कठिनाई होती है, उनके लिए एक साधारण चश्मा जीवन को अधिक सहज और सुविधाजनक बना सकता है। यही कारण है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन भी सामुदायिक स्तर पर नेत्र स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष बल देता है।

ग्रामीण स्वास्थ्य क्षेत्र में इस प्रकार की पहलें स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण का भी उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। जब स्वास्थ्य सुविधाएं गांव स्तर तक पहुंचती हैं तो लोगों को उपचार के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ती है और समय पर उपचार सुनिश्चित होता है। पेस्बायोपिया परियोजना इसी दिशा में एक सफल प्रयास के रूप में उभर रही है।

परियोजना का एक महत्वपूर्ण पहलू जनजागरूकता भी है। कई बार लोग बढ़ती आयु के साथ होने वाली दृष्टि समस्याओं को सामान्य मानकर उपचार नहीं कराते। स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित जागरूकता गतिविधियों ने लोगों को यह समझाने में मदद की है कि समय पर जांच और सही चश्मे का उपयोग जीवन को अधिक सहज बना सकता है। इससे लोगों में नेत्र स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है और अधिक लोग स्वेच्छा से जांच कराने आगे आ रहे हैं।

जिले में संचालित यह अभियान स्वास्थ्य सेवाओं को जन-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। निःशुल्क जांच और चश्मा वितरण की सुविधा से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को भी विशेष लाभ मिल रहा है। इससे सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से कमजोर वर्गों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल रही है।

स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक पात्र नागरिक तक दृष्टि जांच और उपचार की सुविधा पहुंचे। परियोजना के विस्तार के बाद हजारों और लोगों को इसका लाभ मिलने की संभावना है। इससे न केवल दृष्टि संबंधी समस्याओं का समाधान होगा बल्कि लोगों की कार्यक्षमता, आत्मनिर्भरता और जीवन गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और निःशुल्क नेत्र जांच जैसी पहलें यह दर्शाती हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाकर जनस्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े बदलाव संभव हैं। पेस्बायोपिया परियोजना की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं को स्थानीय स्तर तक पहुंचाया जाए तो आमजन को सीधे और प्रभावी रूप से लाभान्वित किया जा सकता है। यह पहल आने वाले समय में ग्रामीण स्वास्थ्य सुधार के एक आदर्श मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकती है।

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