
भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज अत्यंत व्यस्त कार्यक्रम में शामिल होंगे। राजधानी से लेकर ग्वालियर और फिर मुंबई तक उनका दिन प्रशासनिक बैठकों, विधायी कार्यवाही और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में सहभागिता के साथ बीतेगा।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री प्रातः 9:45 बजे विधानसभा पहुंचेंगे। इसके पश्चात सुबह 10:00 बजे वे मंत्रिपरिषद की बैठक में शामिल होंगे, जहां राज्य सरकार के महत्वपूर्ण नीतिगत विषयों और प्रस्तावों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। यह बैठक आगामी योजनाओं और प्रशासनिक निर्णयों की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री सदन की कार्यवाही में भाग लेंगे। विधानसभा सत्र के दौरान विभिन्न विधायी और वित्तीय विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है, जिनमें सरकार की प्राथमिकताओं और नीतिगत दिशा की झलक देखने को मिलेगी।
दोपहर 1:00 बजे मुख्यमंत्री राजधानी स्थित कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर पहुंचेंगे। यहां वे “कर्म योगी बने” शीर्ष समिति की द्वितीय संगोष्ठी में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में प्रशासनिक दक्षता, जनसेवा में नैतिक मूल्यों और सुशासन की अवधारणा पर विचार-विमर्श किया जाएगा। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस अवसर पर शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर अपने विचार साझा करेंगे।
दोपहर 2:00 बजे मुख्यमंत्री भोपाल से ग्वालियर के लिए रवाना होंगे। ग्वालियर जिले के कुलैथ क्षेत्र में वे एक स्थानीय कार्यक्रम में भाग लेंगे। इस दौरान क्षेत्रीय विकास कार्यों और जनसंपर्क गतिविधियों को लेकर भी उनकी सहभागिता संभावित है।
शाम 4:15 बजे मुख्यमंत्री ग्वालियर से मुंबई के लिए प्रस्थान करेंगे। मुंबई में वे “मुंबई क्लाइमेट वीक 2026” के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस मंच पर जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास जैसे विषयों पर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होने की संभावना है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति को राज्य की पर्यावरणीय प्रतिबद्धता के रूप में भी देखा जा रहा है।
रात्रि 9:00 बजे मुख्यमंत्री मुंबई से पुनः भोपाल के लिए रवाना होंगे। इस प्रकार उनका दिन प्रशासनिक दायित्वों, विधायी सहभागिता, क्षेत्रीय संपर्क और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाते हुए व्यतीत होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार मुख्यमंत्री का यह कार्यक्रम शासन की बहुआयामी प्राथमिकताओं को दर्शाता है—जहां एक ओर राज्य के विधायी और विकास कार्यों पर ध्यान है, वहीं दूसरी ओर पर्यावरणीय मुद्दों पर राष्ट्रीय विमर्श में भागीदारी भी सुनिश्चित की जा रही है।









