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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का व्यस्त दिन: मंत्रालय में बैठकों की श्रृंखला, शुजालपुर नगर पालिका के शताब्दी समारोह में वर्चुअल सहभागिता और जल संरक्षण अभियानों पर विशेष मंथन

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HQ Report

भोपाल, 5 मार्च 2026। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Dr. Mohan Yadav का गुरुवार का दिन प्रशासनिक बैठकों, विकास योजनाओं की समीक्षा और जल संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को समर्पित रहा। राजधानी Bhopal स्थित मंत्रालय में दिनभर चली बैठकों और वर्चुअल कार्यक्रमों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास, नगर निकायों की मजबूती और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अधिकारियों के साथ गहन चर्चा की।

मुख्यमंत्री का दिन सुबह मंत्रालय आगमन से शुरू हुआ और शाम को निवास वापसी तक लगातार बैठकों और संवाद का सिलसिला जारी रहा। इन बैठकों में प्रदेश के प्रशासनिक अधिकारी, विभिन्न विभागों के सचिव, नगर निकाय प्रतिनिधि तथा अन्य जिम्मेदार अधिकारी वर्चुअल माध्यम से जुड़े। मुख्यमंत्री ने राज्य के विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए प्रशासन को समयबद्ध और परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाने के निर्देश दिए।

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सुबह 10 बजकर 55 मिनट पर मुख्यमंत्री मंत्रालय पहुंचे। मंत्रालय पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात की और दिनभर के कार्यक्रमों की रूपरेखा पर संक्षिप्त चर्चा की। इसके बाद सुबह 11 बजे उन्होंने विभागीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। इस चर्चा में प्रदेश में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की स्थिति, आगामी योजनाओं की तैयारी और जनहित से जुड़े मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसके लिए प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना है और इसके लिए प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विभाग अपनी योजनाओं की नियमित समीक्षा करें और जनता से प्राप्त शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करें।

दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर मुख्यमंत्री ने मंत्रालय से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से Shujalpur नगर पालिका के शताब्दी समारोह में सहभागिता की। इस अवसर पर नगर पालिका के जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। वर्चुअल संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने शुजालपुर नगर पालिका के 100 वर्ष पूरे होने पर सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों को बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नगर निकाय लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण इकाइयों में से एक हैं। नगर पालिका और नगर निगम स्थानीय स्तर पर विकास कार्यों को गति देने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 100 वर्षों में शुजालपुर नगर पालिका ने क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और आने वाले समय में भी यह नगर निकाय विकास की नई मिसाल कायम करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार नगर निकायों को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं लागू की गई हैं। उन्होंने नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे जनता के साथ मिलकर अपने शहर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने दोपहर 2 बजे मंत्रालय में आगामी “जल गंगा संवर्धन अभियान” को लेकर वर्चुअल बैठक की। इस बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, जिला कलेक्टर, नगर निकायों के प्रतिनिधि और जल संसाधन विभाग के अधिकारी शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए जनभागीदारी को बढ़ावा देना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल संरक्षण के लिए कई योजनाएं चला रही है और “जल गंगा संवर्धन अभियान” भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इस अभियान का उद्देश्य जल स्रोतों का संरक्षण करना, जल संचय को बढ़ावा देना और लोगों में जल बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस अभियान को प्रदेश के हर जिले में प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संकट केवल सरकार के प्रयासों से नहीं सुलझ सकता, बल्कि इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि हम आज जल संरक्षण के प्रति सजग नहीं हुए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए हमें जल बचाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।

इसके बाद दोपहर 3 बजे मुख्यमंत्री ने “जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम” को लेकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक और महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में विभिन्न जिलों के प्रशासनिक अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि और जल संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि जल संचय और जल संरक्षण के लिए जनभागीदारी सबसे प्रभावी उपाय है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में तालाब, कुएं और अन्य पारंपरिक जल स्रोतों का संरक्षण किया जाना चाहिए। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना भी जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई क्षेत्रों में समुदाय के सहयोग से जल संरक्षण के सफल उदाहरण सामने आए हैं और इन मॉडलों को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वे गांव-गांव और शहर-शहर में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता अभियान चलाएं। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को भी इस अभियान से जोड़ा जाए ताकि समाज के हर वर्ग में जल बचाने की भावना विकसित हो सके।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल पर्यावरण की रक्षा का विषय नहीं है बल्कि यह हमारे भविष्य से भी जुड़ा हुआ है। यदि हम जल संसाधनों का सही तरीके से उपयोग और संरक्षण करेंगे तो आने वाले समय में जल संकट की स्थिति से बचा जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने बैठक में यह भी कहा कि जल संरक्षण के कार्यों को जन आंदोलन का रूप दिया जाना चाहिए। इसके लिए पंचायत स्तर से लेकर राज्य स्तर तक व्यापक अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी आवश्यकता हो वहां तत्काल सुधारात्मक कदम उठाए जाएं।

दिनभर चली बैठकों और कार्यक्रमों के बाद मुख्यमंत्री शाम 5 बजे अपने निवास पहुंचे। पूरे दिन के कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की और प्रदेश के विकास से जुड़े मुद्दों पर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री के इस व्यस्त कार्यक्रम से यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है। प्रशासनिक बैठकों और वर्चुअल कार्यक्रमों के माध्यम से मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित सर्वोपरि है और विकास कार्यों में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों को लेकर भी मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि जन आंदोलन है। इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी जरूरी है।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर इन योजनाओं को लागू करने की प्रक्रिया और तेज होने की उम्मीद है। आने वाले समय में “जल गंगा संवर्धन अभियान” और “जल संचय जन भागीदारी कार्यक्रम” के माध्यम से प्रदेश में जल संरक्षण को लेकर व्यापक जागरूकता और सक्रियता देखने को मिल सकती है।

इस प्रकार मुख्यमंत्री का 5 मार्च का दिन प्रशासनिक गतिविधियों, विकास योजनाओं की समीक्षा और जल संरक्षण के प्रयासों को मजबूत करने के लिए समर्पित रहा। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश में विकास की गति बनी रहे और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ संतुलित विकास का मॉडल तैयार किया जाए।

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