
विक्रमोत्सव 2026, जल संरक्षण अभियान और लोकार्पण कार्यक्रमों के माध्यम से प्रदेश को दी नई दिशा
भोपाल / इंदौर / उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 19 मार्च (गुरुवार) का दिन अत्यंत व्यस्त और महत्वपूर्ण कार्यक्रमों से भरा रहा। इस दौरान उन्होंने राजधानी भोपाल से लेकर इंदौर और उज्जैन तक विभिन्न सांस्कृतिक, सामाजिक और विकासपरक कार्यक्रमों में भाग लेकर प्रदेश की प्रगति, सांस्कृतिक विरासत और जनकल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
यह दौरा न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसमें विक्रमोत्सव 2026 जैसे ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण आयोजन भी शामिल रहे।
भोपाल में दिन की शुरुआत: सूर्य उपासना और श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री का दिन सुबह 10 बजे
रवीन्द्र भवन
में आयोजित विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत सूर्य उपासना कार्यक्रम से प्रारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपरा के अनुसार सूर्य देव की उपासना कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि की कामना की।
इसके पश्चात सुबह 11 बजे उन्होंने विधानसभा परिसर में आयोजित पुष्पांजलि कार्यक्रम में भाग लिया, जहां महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
भोपाल से इंदौर: विकास की ओर बढ़ते कदम
दोपहर 12:20 बजे मुख्यमंत्री भोपाल से इंदौर के लिए रवाना हुए और लगभग 1:05 बजे
इंदौर के बंगाली चौराहा पहुंचे। यहां स्थानीय कार्यक्रमों में भाग लेते हुए उन्होंने जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से संवाद किया।
इंदौर, जो स्वच्छता और स्मार्ट सिटी के रूप में देशभर में अपनी पहचान बना चुका है, वहां मुख्यमंत्री की उपस्थिति ने विकास कार्यों को और गति देने का संदेश दिया।
जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ
इसके बाद मुख्यमंत्री बंगाली चौराहा से ग्राम निपानिया (विधानसभा सांवेर) पहुंचे, जहां उन्होंने जल गंगा संवर्धन अभियान का शुभारंभ किया।
यह अभियान जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि जल ही जीवन है और आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभियान प्रदेश में जल संकट की समस्या को कम करने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे।
उज्जैन आगमन: आस्था और विकास का संगम
दोपहर 2:55 बजे मुख्यमंत्री
उज्जैन पहुंचे, जहां उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लिया।
सबसे पहले वे होटल अंजूश्री में आयोजित स्थानीय कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ चर्चा की।
तरणताल और नैवेद्यम का लोकार्पण
सायं 6:30 बजे मुख्यमंत्री ने उज्जैन में निर्मित आधुनिक तरणताल (स्विमिंग पूल) का लोकार्पण किया। यह परियोजना शहर के युवाओं और खिलाड़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा साबित होगी।
इसके पश्चात सायं 7 बजे उन्होंने नैवेद्यम का लोकार्पण किया, जो धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रकल्प है।
इन लोकार्पण कार्यक्रमों से उज्जैन के विकास और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
विक्रमोत्सव 2026: संस्कृति और गौरव का उत्सव
सायं 7:30 बजे मुख्यमंत्री ने
विक्रमोत्सव 2026
के अंतर्गत आयोजित सृष्टि आरंभ दिवस एवं उज्जयिनी गौरव दिवस कार्यक्रम में भाग लिया।
यह भव्य आयोजन
रामघाट
और
दत्त अखाड़ा
पर आयोजित किया गया, जहां हजारों श्रद्धालु और पर्यटक उपस्थित रहे।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन केवल एक धार्मिक नगरी ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का महत्वपूर्ण केंद्र है।
पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा
मुख्यमंत्री के इस दौरे का एक प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी रहा।
उज्जैन, जो कि भगवान महाकाल की नगरी के रूप में विश्व प्रसिद्ध है, वहां इस प्रकार के आयोजन देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में पर्यटन उद्योग को नई दिशा मिल रही है, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
जनसंवाद और विकास की प्रतिबद्धता
पूरे दौरे के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्थानों पर नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवाद किया।
उन्होंने प्रदेश के समग्र विकास, जनकल्याण योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
19 मार्च का यह दौरा मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन यादव की सक्रिय कार्यशैली और प्रदेश के विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक रहा।
इंदौर में जल संरक्षण अभियान की शुरुआत से लेकर उज्जैन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और विकास परियोजनाओं के लोकार्पण तक, यह दिन मध्यप्रदेश के लिए प्रगति, आस्था और संस्कृति का संगम साबित हुआ।
यह दौरा न केवल प्रशासनिक दृष्टि से सफल रहा, बल्कि इससे प्रदेशवासियों में विकास और सांस्कृतिक गौरव की भावना भी मजबूत हुई।









