
रायगढ़। Mahavir Jayanti के पावन अवसर पर पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में भी श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भगवान Mahavira के सिद्धांतों की गूंज सुनाई दी। इस अवसर पर जिला विद्युत उपभोक्ता फोरम, रायगढ़ के चेयरपर्सन अशोक गोयल ने नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए समाज में अहिंसा, मानवता और शांति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। उनके संदेश ने इस धार्मिक पर्व को एक व्यापक सामाजिक और नैतिक संदर्भ प्रदान किया, जिसमें केवल पूजा-अर्चना ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा भी निहित थी।
महावीर जयंती को लेकर रायगढ़ जिले में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और जनजागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। सुबह से ही जैन मंदिरों और अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भगवान महावीर के समक्ष नमन कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। वातावरण में शांति, संयम और श्रद्धा की अनुभूति स्पष्ट रूप से दिखाई दी। इस दौरान धार्मिक प्रवचन, ध्यान-साधना और सेवा गतिविधियों के माध्यम से समाज को सकारात्मक दिशा देने का प्रयास किया गया।
चेयरपर्सन अशोक गोयल ने अपने संदेश में कहा कि भगवान महावीर का जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्चा धर्म केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हमारे आचरण, व्यवहार और सोच में दिखाई देना चाहिए। उन्होंने कहा कि “अहिंसा परमो धर्मः” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि एक जीवन दर्शन है, जिसे अपनाकर हम समाज में शांति और सद्भाव स्थापित कर सकते हैं। आज के समय में जब समाज विभिन्न प्रकार के तनाव, विवाद और असहिष्णुता का सामना कर रहा है, तब महावीर के सिद्धांत हमें एक संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन जीने की राह दिखाते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अहिंसा का अर्थ केवल शारीरिक हिंसा से दूर रहना नहीं है, बल्कि यह हमारे विचारों और शब्दों में भी झलकना चाहिए। यदि हम अपने मन में द्वेष, क्रोध और नकारात्मकता को समाप्त कर दें, तो समाज में अपने आप ही सकारात्मक परिवर्तन आने लगेंगे। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में सहिष्णुता, संयम और करुणा को अपनाएं और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दें।
महावीर जयंती के अवसर पर करुणा और सह-अस्तित्व के संदेश को भी प्रमुखता से सामने रखा गया। भगवान महावीर ने प्रत्येक जीव में आत्मा की समानता का सिद्धांत दिया, जो यह दर्शाता है कि मनुष्य ही नहीं, बल्कि हर जीव का जीवन समान रूप से महत्वपूर्ण है। इस सिद्धांत को अपनाकर ही हम प्रकृति और पर्यावरण के साथ संतुलन बनाए रख सकते हैं। वर्तमान समय में जब पर्यावरण संरक्षण एक बड़ी चुनौती बन चुका है, तब महावीर का यह संदेश और भी अधिक प्रासंगिक हो जाता है।
कार्यक्रमों में वक्ताओं ने कहा कि सत्य, अपरिग्रह और संयम जैसे मूल्य जीवन को संतुलित बनाते हैं। सत्य हमें ईमानदारी और पारदर्शिता की ओर ले जाता है, जिससे समाज में विश्वास कायम होता है। अपरिग्रह का सिद्धांत हमें यह सिखाता है कि आवश्यकता से अधिक संग्रह करने से बचना चाहिए, ताकि संसाधनों का समान वितरण हो सके। वहीं संयम व्यक्ति को लालच, क्रोध और अहंकार से दूर रखकर उसे एक बेहतर इंसान बनने में मदद करता है।
रायगढ़ जिले में आयोजित कार्यक्रमों में सामाजिक सद्भाव और समानता पर भी विशेष जोर दिया गया। भगवान महावीर ने अपने जीवन में यह स्पष्ट किया कि व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि उसके जन्म या सामाजिक स्थिति से। इस विचार को अपनाकर ही समाज में भेदभाव और असमानता को समाप्त किया जा सकता है। वक्ताओं ने कहा कि यदि हम सभी एक-दूसरे के प्रति सम्मान और सहयोग की भावना रखें, तो समाज में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
महावीर जयंती के अवसर पर कई सामाजिक संगठनों द्वारा सेवा कार्यों का आयोजन भी किया गया। जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इसके साथ ही स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया। इन गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि महावीर के सिद्धांत केवल विचारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भी इस अवसर पर युवाओं को महावीर के विचारों से प्रेरणा लेने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी यदि इन मूल्यों को अपनाती है, तो वह समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार और नैतिक नागरिक बनना भी है। महावीर के सिद्धांत इस दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर नागरिकों में विशेष उत्साह देखा गया। लोगों ने अपने परिवार के साथ इस पर्व को मनाया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ सामाजिक मेल-जोल और सांस्कृतिक गतिविधियों ने भी इस दिन को विशेष बना दिया। वातावरण में शांति और सकारात्मकता का संचार हुआ, जो इस पर्व की मूल भावना को दर्शाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि महावीर जयंती जैसे पर्व केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं होते, बल्कि यह समाज को एकजुट करने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं। ऐसे अवसरों पर लोगों को अपने जीवन के प्रति चिंतन करने और बेहतर बनने का अवसर मिलता है। यही इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है।
समापन में यह कहा जा सकता है कि Mahavir Jayanti का यह पावन पर्व हमें यह सिखाता है कि सच्ची महानता दूसरों को हराने में नहीं, बल्कि अपने भीतर के दोषों—अहंकार, क्रोध और लालच—पर विजय पाने में है। Mahavira के सिद्धांत आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम हैं और यदि उन्हें सही रूप में अपनाया जाए, तो एक शांतिपूर्ण और समरस समाज का निर्माण संभव है।
रायगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से चेयरपर्सन अशोक गोयल का यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि समाज में स्थायी शांति और विकास के लिए हमें अपने भीतर परिवर्तन लाना होगा। जब हर व्यक्ति अपने जीवन में अहिंसा, सत्य और करुणा को अपनाएगा, तभी एक बेहतर और सशक्त समाज का निर्माण संभव होगा।
इस प्रकार महावीर जयंती का यह पर्व रायगढ़ जिले में न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता और नैतिक मूल्यों के प्रसार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी सिद्ध हुआ। नागरिकों ने इस अवसर पर यह संकल्प लिया कि वे अपने जीवन में महावीर के सिद्धांतों को अपनाकर समाज में शांति, सद्भाव और मानवता को बढ़ावा देंगे।









