
सीहोर : जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री बालागुरू के. ने कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में शिक्षा विभाग की गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि जिले के सभी शासकीय विद्यालयों में विद्यार्थियों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए और कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। बैठक के दौरान कलेक्टर ने कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक के विद्यार्थियों के नामांकन की स्थिति का गहन विश्लेषण किया और अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिन क्षेत्रों में नामांकन कम है, वहां विशेष अभियान चलाकर बच्चों को स्कूलों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही समाज और राष्ट्र के विकास का आधार है, इसलिए प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्रीमती सर्जना यादव ने भी संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए कहा कि सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि शिक्षा से संबंधित योजनाओं का लाभ हर पात्र विद्यार्थी तक पहुंचे। कलेक्टर ने विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकों के वितरण की प्रगति की भी समीक्षा की और निर्देश दिए कि सभी विद्यार्थियों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना अत्यंत आवश्यक है।
बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के तहत निर्धारित लक्ष्यों को समय-सीमा में पूरा किया जाए और जल संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाई जाए। इसके साथ ही कलेक्टर ने एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि व्यापक जागरूकता अभियान चलाकर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा दोनों पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
कलेक्टर ने वर्ष 2025-26 के लिए ई-स्कूल ड्रॉपआउट गैप का सत्यापन करने, विद्यार्थियों के आधार अपडेट की स्थिति सुधारने तथा शिक्षकों की उपस्थिति की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्रॉपआउट की समस्या को गंभीरता से लेते हुए इसे पूरी तरह समाप्त करने के लिए ठोस रणनीति अपनाई जाए। बैठक में नवीन शौचालय निर्माण एवं मरम्मत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं का होना विद्यार्थियों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है।
साथ ही सीएम हेल्पलाइन के अंतर्गत लंबित शिकायतों के त्वरित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि आमजन को परेशानी का सामना न करना पड़े। बैठक में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत विद्यालयों को जारी आकस्मिक निधि के उपयोग की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि निधि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और नियमानुसार किया जाए, ताकि विद्यालयों में आवश्यक सुविधाओं का विकास किया जा सके।
समीक्षा के दौरान जानकारी दी गई कि यू-डाइस 2025-26 के अंतर्गत कक्षा 1 से 12 तक नामांकन का कार्य लगभग शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। इस पर संतोष व्यक्त करते हुए कलेक्टर ने कहा कि अब शेष बचे विद्यार्थियों को चिन्हित कर जल्द से जल्द नामांकित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे। बैठक में यह भी बताया गया कि शासन द्वारा जिले के शासकीय स्कूलों के 210 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को स्कूटी की राशि प्रदान की गई है, जिससे वे अपनी सुविधा अनुसार स्कूटी खरीद चुके हैं। इसके अलावा 2752 विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए राशि वितरित की गई है और लगभग 7500 विद्यार्थियों को साइकिल का वितरण किया जा चुका है। इन योजनाओं से विद्यार्थियों को शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिल रहा है और उनकी उपस्थिति में भी सुधार हो रहा है।
बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी श्री संजय सिंह तोमर, डीपीसी श्री रमेशराम उइके सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। कुल मिलाकर, बैठक में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार की गई। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों से यह संकेत मिलता है कि प्रशासन जिले में शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।









