
अनूपपुर जिले में महिला स्वास्थ्य सुरक्षा को नई दिशा देने की पहल के तहत कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लखौरा में आयोजित सर्वाइकल कैंसर रोकथाम जागरूकता एवं एचपीवी टीकाकरण शिविर न केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम रहा, बल्कि यह जनजागरूकता, वैज्ञानिक सोच और सामाजिक उत्तरदायित्व का व्यापक संदेश देने वाला एक महत्वपूर्ण आयोजन बनकर उभरा जहां किशोरियों को न केवल एक गंभीर बीमारी के प्रति सचेत किया गया बल्कि उन्हें भविष्य के लिए सुरक्षित जीवन की दिशा भी प्रदान की गई इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों, स्वास्थ्यकर्मियों और छात्राओं ने मिलकर यह स्पष्ट संदेश दिया कि समय रहते जागरूकता और टीकाकरण ही सर्वाइकल कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। कार्यक्रम की शुरुआत एक सकारात्मक वातावरण के साथ हुई जिसमें विद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में छात्राओं की उपस्थिति ने इस विषय के प्रति बढ़ती जागरूकता और संवेदनशीलता को दर्शाया कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री विनोद परस्ते, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण, आशा कार्यकर्ता और अभिभावक वर्ग की सहभागिता ने इसे एक समन्वित प्रयास का स्वरूप दिया जहां प्रशासन और समाज दोनों मिलकर किशोरियों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध नजर आए।
इस शिविर का मुख्य उद्देश्य 9 से 14 वर्ष आयु वर्ग की किशोरियों को ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी संक्रमण के प्रति जागरूक करना और उन्हें समय रहते टीकाकरण के माध्यम से सुरक्षा प्रदान करना था स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सरल और वैज्ञानिक भाषा में समझाया कि एचपीवी वायरस ही सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है और यदि किशोरावस्था में ही इसका टीका लगवा लिया जाए तो भविष्य में इस बीमारी का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है इस जानकारी ने छात्राओं के मन में व्याप्त भ्रम और डर को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम में स्वास्थ्य अधिकारियों ने विस्तार से बताया कि सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में होने वाले सबसे सामान्य कैंसरों में से एक है लेकिन यह उन कुछ कैंसरों में शामिल है जिन्हें टीकाकरण के माध्यम से रोका जा सकता है उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाया जा रहा यह अभियान पूरी तरह सुरक्षित, वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित और विश्व स्वास्थ्य मानकों के अनुरूप है इस दौरान यह भी बताया गया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह टीका किशोरियों के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं।
शिविर के दौरान छात्राओं के मन में उठ रहे विभिन्न प्रश्नों का समाधान स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा किया गया कई छात्राओं ने टीके की सुरक्षा, प्रभाव और आवश्यकताओं को लेकर सवाल पूछे जिनका उत्तर वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर दिया गया इस संवादात्मक प्रक्रिया ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बना दिया क्योंकि इससे छात्राओं में विश्वास और समझ दोनों का विकास हुआ। कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के निर्देशन में चलाए जा रहे इस अभियान का उद्देश्य केवल टीकाकरण तक सीमित नहीं है बल्कि इसके माध्यम से समाज में महिला स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना, किशोरियों को आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के लिए प्रेरित करना भी है प्रशासन का यह प्रयास “पूर्ण सुरक्षित बचपन” के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कार्यक्रम में यह भी जानकारी दी गई कि जिले में आगामी दिनों में इसी प्रकार के और भी शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि सभी पात्र किशोरियों का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जा सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित कर व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है आशा कार्यकर्ताओं और समता सखियों की भूमिका भी इसमें अहम मानी जा रही है जो गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक करने का कार्य कर रही हैं
इस पहल का सामाजिक प्रभाव भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला जहां छात्राओं ने न केवल स्वयं टीका लगवाने की इच्छा जताई बल्कि अपने परिवार और समाज के अन्य लोगों को भी इस विषय में जागरूक करने का संकल्प लिया यह पहल महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर समाज में व्याप्त संकोच और मिथकों को तोड़ने की दिशा में एक सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देती है। विद्यालय के शिक्षकों ने भी इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन विद्यार्थियों के समग्र विकास में सहायक होते हैं क्योंकि शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य जागरूकता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है उन्होंने कहा कि किशोरियों को सही समय पर सही जानकारी मिलना बेहद जरूरी है ताकि वे भविष्य में स्वस्थ जीवन जी सकें। कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने यह भी बताया कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम केवल टीकाकरण से ही नहीं बल्कि नियमित स्वास्थ्य जांच, स्वच्छता और संतुलित जीवनशैली अपनाने से भी संभव है उन्होंने छात्राओं को व्यक्तिगत स्वच्छता, पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की सलाह दी। इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और समाज मिलकर किसी लक्ष्य के लिए कार्य करते हैं तो सकारात्मक परिणाम निश्चित रूप से सामने आते हैं अनूपपुर जिले में चल रहा यह अभियान अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है जहां स्वास्थ्य जागरूकता को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है। यह कहा जा सकता है कि सर्वाइकल कैंसर रोकथाम हेतु आयोजित यह जागरूकता एवं टीकाकरण शिविर केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि एक व्यापक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है जिसमें किशोरियों को न केवल एक बीमारी से बचाव का साधन मिला बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, जागरूकता और स्वस्थ भविष्य की दिशा भी प्राप्त हुई यह पहल आने वाले समय में महिला स्वास्थ्य सुरक्षा के क्षेत्र में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है









