
अशोकनगर। विगत दिनों जिले में हुई ओलावृष्टि से प्रभावित फसलों की स्थिति का जायजा लेने हेतु कलेक्टर श्री साकेत मालवीय ने सोमवार को प्रभावित ग्रामों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम दमदमा चक्क एवं ग्राम जसैया पहुंचकर गेहूं की फसल को हुए नुकसान का मौके पर निरीक्षण किया तथा किसानों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने संबंधित राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया कि फसल क्षति का तत्काल सर्वे कर वास्तविक स्थिति के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर प्रस्तुत की जाए, ताकि शासन स्तर पर किसानों को शीघ्र राहत प्रदान की जा सके। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री मालवीय ने किसानों को आश्वस्त किया कि प्रशासन उनकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है और प्रभावित किसानों को नियमानुसार सहायता दिलाने के लिए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने तहसीलदार को निर्देश दिए कि सर्वे कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और समयसीमा के भीतर कार्य पूर्ण किया जाए।कलेक्टर ने इस अवसर पर किसानों को फार्मर आईडी के महत्व के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि फार्मर आईडी एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जिसके माध्यम से किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं जैसे प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, फसल बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण एवं उर्वरक वितरण प्रणाली का लाभ सहजता से प्राप्त हो सकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जिले के सभी किसानों की फार्मर आईडी शीघ्रता से तैयार कराई जाए, ताकि कोई भी पात्र किसान योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
भ्रमण के दौरान कलेक्टर श्री मालवीय ने किसानों को फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) न जलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नरवाई जलाने से पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है तथा भूमि की उर्वरता भी प्रभावित होती है। इसके स्थान पर वैज्ञानिक पद्धतियों से नरवाई प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया गया। कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करें तथा उन्हें आधुनिक तकनीकों की जानकारी दें, जिससे वे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अपनी भूमि की उत्पादकता भी बढ़ा सकें। कलेक्टर के इस दौरे से प्रभावित क्षेत्रों के किसानों में भरोसा बढ़ा है और उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन द्वारा शीघ्र ही राहत प्रदान की जाएगी। प्रशासन का यह प्रयास न केवल फसल क्षति के आकलन तक सीमित है, बल्कि किसानों को दीर्घकालिक लाभ देने वाली योजनाओं एवं जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से उनकी स्थिति को सुदृढ़ करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।









