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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर प्रदेशवासियों को दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश

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भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) ऑडिटोरियम में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सहभागिता कर प्रदेशवासियों को प्रकृति संरक्षण, वन्यजीव संवर्धन और पर्यावरण संतुलन के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया। कार्यक्रम में जैव विविधता संरक्षण, चीता परियोजना, पर्यावरणीय संतुलन तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश देश का हृदय होने के साथ-साथ जैव विविधता की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध राज्य है और यहां की प्राकृतिक संपदा को संरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि जनभागीदारी का विषय बन चुका है। यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ जल, शुद्ध वायु और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण देना है तो हमें अभी से गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने कहा कि जैव विविधता केवल वन्यजीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन, कृषि, जलवायु, संस्कृति और आर्थिक विकास से भी सीधे जुड़ी हुई है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में चल रहे विभिन्न संरक्षण अभियानों की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार वन क्षेत्र के विस्तार, जल संरक्षण और दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

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मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चल रही चीता परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। वर्षों बाद भारत की धरती पर चीतों की वापसी ने विश्व स्तर पर भारत की संरक्षण क्षमता को नई पहचान दी है। उन्होंने कहा कि चीता परियोजना के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण के प्रति लोगों में नई जागरूकता आई है तथा इससे पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिल रहा है। कार्यक्रम में चीता संरक्षण पर आयोजित मीडिया वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने पत्रकारों और प्रतिभागियों को परियोजना की वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक महत्ता की जानकारी दी।

डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में बाघ, तेंदुआ, गिद्ध, घड़ियाल और बारहसिंगा जैसे अनेक दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए विशेष योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य देशभर के पर्यावरण प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। राज्य सरकार जैव विविधता संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सहभागिता को भी बढ़ावा दे रही है ताकि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण और आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीता आया है और उनकी पारंपरिक जानकारी पर्यावरण संरक्षण में अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारियों द्वारा प्रदेश में संचालित वृक्षारोपण अभियानों, जल संरक्षण योजनाओं तथा वन्यजीव प्रबंधन गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण के बिना सतत विकास की कल्पना संभव नहीं है। वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन, अंधाधुंध शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण अनेक प्रजातियां संकट में हैं। ऐसे समय में मध्यप्रदेश द्वारा किए जा रहे संरक्षण प्रयास अन्य राज्यों के लिए प्रेरणादायी हैं।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों और युवाओं से पर्यावरण संरक्षण अभियान से जुड़ने का आह्वान करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में पर्यावरण शिक्षा को और अधिक व्यवहारिक बनाने की जरूरत है ताकि विद्यार्थी केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक नागरिक यदि एक पौधा लगाकर उसकी नियमित देखभाल करे तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विभिन्न संस्थानों और व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने सम्मान प्राप्त करने वालों की सराहना करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए ऐसे लोगों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के उन सभी प्रयासों को प्रोत्साहित करेगी जो प्रकृति और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार विकास कार्यों के साथ-साथ पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सड़क, उद्योग और नगरीय विकास परियोजनाओं में पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राज्य में हरित ऊर्जा, जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

कार्यक्रम में वन मंत्री, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पर्यावरण विशेषज्ञ, पत्रकार, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का वातावरण प्रकृति संरक्षण के संदेशों और जनजागरूकता गतिविधियों से प्रेरणादायक बना रहा। विभिन्न प्रदर्शनी स्टॉलों के माध्यम से लोगों को जैव विविधता, वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन की जानकारी दी गई। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रकृति संरक्षण का संदेश प्रमुख रूप से दिखाई दिया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि सभी जीवों की साझी धरोहर है। यदि हम प्रकृति का सम्मान करेंगे तो प्रकृति भी हमें सुरक्षित और स्वस्थ जीवन प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल वर्तमान के लिए नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे जल, जंगल और जमीन के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाएं और पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाएं।

इसके पश्चात मुख्यमंत्री मंत्रालय पहुंचे जहां उन्होंने ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक में प्रदेश में बिजली आपूर्ति, उत्पादन क्षमता और अधोसंरचना विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि गर्मी के मौसम में बिजली आपूर्ति बाधित न हो तथा ग्रामीण क्षेत्रों में भी निर्बाध विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों, किसानों और आम नागरिकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक मजबूत बनाया जा रहा है।

ऊर्जा विभाग की समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मंत्रालय में एक महत्वपूर्ण वेबसाइट का लोकार्पण किया। अधिकारियों ने बताया कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म आम नागरिकों को विभिन्न सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग नागरिकों की सुविधा और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्थिति की जानकारी ली। बैठक में राशन वितरण, खाद्यान्न उपलब्धता और उपभोक्ता हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गरीब और जरूरतमंद परिवारों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए तथा वितरण प्रणाली में किसी भी प्रकार की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आम नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

आयुष विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने आयुर्वेद, योग, यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय चिकित्सा पद्धतियां केवल उपचार का माध्यम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन शैली का आधार हैं। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में आयुष सेवाओं के विस्तार, आयुष अस्पतालों के उन्नयन और जनजागरूकता कार्यक्रमों को गति देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को भी महत्व देना आवश्यक है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का पूरा दिन प्रशासनिक बैठकों, पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रमों और विकास कार्यों की समीक्षा में व्यस्त रहा। विभिन्न विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश को विकास, पर्यावरण संरक्षण, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है।

राजधानी भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस का यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प का प्रतीक बनकर सामने आया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि यदि सरकार, समाज और नागरिक मिलकर प्रयास करें तो पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन स्थापित किया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उठाए जा रहे कदम प्रदेश को हरित, समृद्ध और पर्यावरणीय दृष्टि से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं।

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