
सागर। जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और जनोन्मुखी बनाने की दिशा में सागर कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि आम जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समय-सीमा बैठक में कलेक्टर ने विभिन्न विभागों की प्रगति की समीक्षा करते हुए लंबित प्रकरणों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और कई अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान राजस्व, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित विभिन्न विभागों की योजनाओं और कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ समय पर पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाना प्रत्येक अधिकारी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि किसी स्तर पर उदासीनता या कार्य में लापरवाही पाई जाती है तो उसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय स्वास्थ्य विभाग और नगरीय प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के विरुद्ध लिया गया। कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने सिविल सर्जन द्वारा लगातार निर्देशों की अवहेलना, समय-सीमा बैठक में अनुपस्थिति तथा स्वास्थ्य सेवाओं की असंतोषजनक प्रगति पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए उनका वेतन आगामी आदेश तक रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग सीधे जनता से जुड़ा हुआ विभाग है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
इसी प्रकार कर्रापुर के मुख्य नगरपालिका अधिकारी द्वारा लंबित प्रकरणों के निराकरण में उदासीनता तथा प्रशासनिक निर्देशों का पालन न करने पर उनका वेतन भी तत्काल प्रभाव से रोकने के आदेश दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं और जनहित के मामलों में लापरवाही करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान नामांतरण और सीमांकन जैसे महत्वपूर्ण मामलों में अत्यधिक देरी सामने आने पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पाया कि अनेक प्रकरण तीन से छह महीने तक लंबित पड़े हुए हैं, जिससे आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर उन्होंने संबंधित राजस्व अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने कहा कि नामांतरण और सीमांकन केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि नागरिकों के अधिकारों से जुड़े विषय हैं। इन कार्यों में देरी होने से किसानों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों को आर्थिक तथा सामाजिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए इन मामलों का त्वरित निराकरण सर्वोच्च प्राथमिकता पर किया जाना चाहिए।
सीमांकन से जुड़े लंबित मामलों को लेकर कलेक्टर ने राजस्व अमले को स्पष्ट निर्देश दिए कि आरआई और पटवारी तत्काल फील्ड वेरिफिकेशन पूर्ण करें तथा सभी लंबित मामलों का निराकरण निर्धारित समय में सुनिश्चित करें। उन्होंने 20 जून तक सीमांकन से संबंधित सभी कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया।
बैठक में संबल 2.0 योजना की भी विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि योजना के अंतर्गत लंबित पंजीयन प्रकरणों का तीन दिवस के भीतर निराकरण किया जाए। उन्होंने सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों और मुख्य नगरपालिका अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगली समीक्षा बैठक में यदि पंजीयन लंबित पाए गए तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
संबल योजना के अंतर्गत मिलने वाली आर्थिक सहायता के मामलों को लेकर भी कलेक्टर ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने निर्देश दिए कि सामान्य मृत्यु पर मिलने वाली दो लाख रुपये तथा दुर्घटना मृत्यु पर मिलने वाली चार लाख रुपये की अनुग्रह सहायता राशि के सभी लंबित मामलों का सात दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से निपटारा किया जाए ताकि पात्र परिवारों को समय पर राहत मिल सके।
श्रमयोगी मानधन योजना की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों को प्रतिदिन का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने वाली योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना चाहिए।

जल गंगा संवर्धन अभियान की समीक्षा बैठक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। कलेक्टर ने जल संरक्षण से जुड़े अपूर्ण और प्रगतिरत कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्हें समय पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। जल स्रोतों का संरक्षण, पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण और वर्षा जल संचयन जैसी गतिविधियों को गंभीरता से लागू किया जाना चाहिए।
धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की भी समीक्षा की गई। कलेक्टर ने जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश देते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं का विकास तेजी से किया जाए ताकि जनजातीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
सीएम हेल्पलाइन की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि 50 दिनों से अधिक समय से लंबित शिकायतों का तत्काल निराकरण किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल शिकायत बंद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
कलेक्टर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन शासन और जनता के बीच विश्वास का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि शिकायतों का समय पर समाधान नहीं होगा तो जनता का भरोसा प्रभावित होगा। इसलिए सभी विभाग शिकायतों के निराकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
बैठक के दौरान जनसुनवाई, मुख्यमंत्री मॉनिटरिंग तथा विभिन्न आयोगों से प्राप्त पत्रों के लंबित प्रतिवेदनों की समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि लंबित प्रतिवेदन तत्काल तैयार कर निर्धारित समय सीमा में प्रेषित किए जाएं।
उन्होंने कहा कि शासन द्वारा समय-समय पर जारी निर्देशों और मॉनिटरिंग प्रणाली का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना है। यदि अधिकारी इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं करेंगे तो जवाबदेही तय की जाएगी।
बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विवेक केवी, नगर निगम आयुक्त श्री राजकुमार खत्री, अपर कलेक्टर श्री अविनाश रावत, सिटी मजिस्ट्रेट श्री गगन बिसेन, सभी एसडीएम तथा विभिन्न विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।
कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल की इस सख्त कार्यवाही को प्रशासनिक व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के विरुद्ध वेतन रोकने जैसी कार्रवाई से स्पष्ट संकेत गया है कि शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन और जनहित के मामलों में लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
प्रशासनिक हलकों में यह बैठक चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि इसमें केवल समीक्षा ही नहीं बल्कि जिम्मेदारी तय करने और परिणाम आधारित कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने का स्पष्ट संदेश भी दिया गया। माना जा रहा है कि इस कार्रवाई के बाद विभिन्न विभागों में लंबित प्रकरणों के निराकरण की गति तेज होगी और आम जनता को शासकीय सेवाओं का लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
जनता की समस्याओं का समय पर समाधान, योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना ही सुशासन की पहचान है। सागर जिले में आयोजित यह समय-सीमा बैठक इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है, जिसने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि जनहित सर्वोपरि है और उसके प्रति लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।









