
चंडीगढ़। लोकतांत्रिक संस्थाओं को और अधिक सशक्त, आधुनिक तथा ज्ञान-आधारित बनाने की दिशा में हरियाणा विधानसभा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत संसदीय अनुसंधान और नवाचार केंद्र (Parliamentary Research and Innovation Centre) तथा लोकतंत्र दीर्घा का भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण एवं विभिन्न राज्यों से आए जनप्रतिनिधियों तथा गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।
उद्घाटन समारोह लोकतांत्रिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और आधुनिक संसदीय शोध प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने लोकतंत्र को मजबूत बनाने, जनप्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि तथा संसदीय कार्यों में शोध एवं नवाचार की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र की सफलता केवल विधायी प्रक्रियाओं पर निर्भर नहीं होती, बल्कि उसके पीछे गहन अध्ययन, शोध, संवाद और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण होती है। संसदीय अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र जनप्रतिनिधियों को तथ्यपरक जानकारी, नीति विश्लेषण तथा समकालीन विषयों पर अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराकर उनकी कार्यक्षमता को और अधिक सशक्त बनाएगा।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि लोकतंत्र दीर्घा और अनुसंधान केंद्र नई पीढ़ी को लोकतांत्रिक परंपराओं, संवैधानिक मूल्यों और संसदीय इतिहास से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल शासन प्रणाली नहीं, बल्कि जनभागीदारी, जवाबदेही और विकास का मजबूत माध्यम है। इस प्रकार की पहल लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति लोगों का विश्वास और जुड़ाव बढ़ाने का कार्य करेगी।
हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष श्री हरविंद्र कल्याण ने कहा कि आधुनिक समय में नीति निर्माण और विधायी कार्यों के लिए शोध आधारित दृष्टिकोण अत्यंत आवश्यक है। संसदीय अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र जनप्रतिनिधियों को विभिन्न विषयों पर अध्ययन एवं विश्लेषण की सुविधा प्रदान करेगा, जिससे विधानमंडल में होने वाली चर्चाएं और अधिक प्रभावी एवं सार्थक बन सकेंगी।
लोकतंत्र दीर्घा में भारतीय लोकतंत्र की विकास यात्रा, संविधान निर्माण, संसदीय परंपराओं, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका को आकर्षक और आधुनिक स्वरूप में प्रदर्शित किया गया है। यह दीर्घा विद्यार्थियों, शोधार्थियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को समझने का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने नव स्थापित संसदीय अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र तथा लोकतंत्र दीर्घा का अवलोकन किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं, डिजिटल संसाधनों तथा शोध व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई दिशा और ऊर्जा मिलेगी।
उद्घाटन समारोह में विभिन्न राज्यों से आए विधानसभा अध्यक्षों, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, शिक्षाविदों और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े विशेषज्ञों ने भी सहभागिता की। सभी ने इस पहल को लोकतंत्र के सुदृढ़ीकरण और जनप्रतिनिधियों की क्षमता वृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
कार्यक्रम का समापन लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण, संसदीय परंपराओं के संवर्धन और जनहित आधारित शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के संकल्प के साथ हुआ। उपस्थित अतिथियों ने विश्वास व्यक्त किया कि संसदीय अनुसंधान एवं नवाचार केंद्र तथा लोकतंत्र दीर्घा आने वाले समय में लोकतांत्रिक जागरूकता, शोध और सुशासन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में स्थापित होंगे।









