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हैदराबाद में “हार्ट ऑफ ए जैन – इंटरनेशनल कॉन्क्लेव” का आयोजन, जैन दर्शन और मानवीय मूल्यों पर हुआ वैश्विक विमर्श

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HQ Report
“द हार्ट ऑफ जैनिज़्म” पुस्तक का हुआ विमोचन, आध्यात्मिकता, अहिंसा और विश्व शांति के संदेश पर दिया गया विशेष बल
हैदराबाद। जैन दर्शन, आध्यात्मिक मूल्यों और वैश्विक मानव कल्याण के विचारों को समर्पित “हार्ट ऑफ ए जैन – इंटरनेशनल कॉन्क्लेव” का आयोजन हैदराबाद में किया गया। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों, शिक्षाविदों, आध्यात्मिक चिंतकों तथा समाजसेवियों ने भाग लेकर जैन दर्शन की प्रासंगिकता और मानवीय मूल्यों पर विचार साझा किए।
सम्मेलन के दौरान हार्टफुलनेस फाउंडेशन के वैश्विक मार्गदर्शक कमलेश डी. पटेल ‘दाजी’ द्वारा लिखित पुस्तक “द हार्ट ऑफ जैनिज़्म” का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में विशिष्ट जनप्रतिनिधियों एवं अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। पुस्तक का विमोचन पद्मश्री डॉ. कुमारपाल देसाई तथा नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जैन दर्शन केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अहिंसा, करुणा, आत्मसंयम, सह-अस्तित्व और विश्व बंधुत्व का सार्वभौमिक संदेश है। वर्तमान समय में जब विश्व अनेक सामाजिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब जैन दर्शन के सिद्धांत मानवता को शांति, संतुलन और नैतिक जीवन की दिशा प्रदान करते हैं।
सम्मेलन के दौरान यह भी कहा गया कि आध्यात्मिकता और आंतरिक चेतना के विकास के माध्यम से व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है। पुस्तक “द हार्ट ऑफ जैनिज़्म” जैन दर्शन के मूल सिद्धांतों को सरल, समकालीन और प्रेरक रूप में प्रस्तुत करती है, जिससे नई पीढ़ी भी इन मूल्यों को सहजता से समझ सके।
कार्यक्रम में विभिन्न विद्वानों ने जैन संस्कृति, नैतिक जीवन, आध्यात्मिक साधना और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर अपने विचार रखे। साथ ही समाज में सहिष्णुता, सद्भाव, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय संवेदनाओं को सुदृढ़ बनाने में जैन दर्शन की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव ने यह संदेश दिया कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराएँ आज भी विश्व को शांति, सह-अस्तित्व और मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखाने में सक्षम हैं। ऐसे आयोजन सांस्कृतिक संवाद, आध्यात्मिक जागरूकता और वैश्विक सहयोग को नई दिशा प्रदान करने के साथ-साथ भारत की समृद्ध दार्शनिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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