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मिडिल ईस्ट तनाव से वैश्विक तेल बाजार में उबाल, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार; भारत समेत दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बढ़ी चिंता

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नई दिल्ली/लंदन। मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव तथा क्षेत्रीय अस्थिरता के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जिससे दुनिया भर के ऊर्जा बाजारों में हलचल मच गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार सोमवार को तेल की कीमतों में लगभग 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स लगभग 3.05 प्रतिशत बढ़कर 90.79 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले कई सप्ताह का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। लगातार बढ़ती कीमतों ने वैश्विक महंगाई, परिवहन लागत और औद्योगिक उत्पादन पर नए दबाव की आशंका बढ़ा दी है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मिडिल ईस्ट विश्व के सबसे बड़े तेल उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यदि वहां संघर्ष लंबा खिंचता है या तेल आपूर्ति प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में और तेजी आ सकती है। निवेशकों ने संभावित आपूर्ति संकट की आशंका के चलते तेल खरीद बढ़ा दी है, जिससे कीमतों में तेजी और बढ़ गई।
भारत जैसे देशों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो पेट्रोल, डीजल, एलपीजी, विमान ईंधन और माल परिवहन की लागत बढ़ सकती है। इससे महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है। उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार की नजर मिडिल ईस्ट की बदलती परिस्थितियों पर बनी हुई है। यदि क्षेत्र में तनाव कम होता है तो तेल की कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन संघर्ष बढ़ने की स्थिति में कीमतों में और उछाल से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल वैश्विक बाजार, तेल कंपनियां और विभिन्न देशों की सरकारें हालात पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि ऊर्जा बाजार में होने वाला हर बदलाव दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर सीधा असर डालता है।
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