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HQ Report
जयपुर। राजस्थान पुलिस के अधिकारियों की कार्यकुशलता, नेतृत्व क्षमता और आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने की दक्षता को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से इंटेलिजेंस ट्रेनिंग एकेडमी (आईटीए) में आयोजित पाँच दिवसीय ‘मिड करियर ट्रेनिंग प्रोग्राम’ का सफलतापूर्वक समापन हुआ। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों एवं इकाइयों से आए 48 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (आरपीएस अधिकारी) शामिल हुए। समापन समारोह में पुलिस प्रशिक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान करते हुए भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण) श्री अनिल पालीवाल ने सभी प्रशिक्षु अधिकारियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए और उन्हें पुलिस सेवा में निरंतर सीखने तथा स्वयं को समय के अनुरूप अद्यतन रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि आधुनिक तकनीक, प्रभावी खुफिया तंत्र और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना भी उतना ही आवश्यक है।

अपने संबोधन में श्री पालीवाल ने विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सीमाई जिलों में कार्यरत पुलिस अधिकारियों को सीमा सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं की गहन समझ होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से सीमा सुरक्षा बलों, केंद्रीय एजेंसियों तथा खुफिया संगठनों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने का आह्वान किया, जिससे किसी भी संभावित सुरक्षा चुनौती का समय रहते प्रभावी ढंग से सामना किया जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। साइबर अपराध, संगठित अपराध, अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय अपराध नेटवर्क, तस्करी, आतंकवाद तथा सोशल मीडिया के दुरुपयोग जैसी चुनौतियाँ पुलिस के समक्ष नई परिस्थितियाँ प्रस्तुत कर रही हैं। इनसे प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों, सूचना विश्लेषण और खुफिया सूचनाओं के बेहतर उपयोग में दक्ष होना आवश्यक है।

महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण) ने कहा कि किसी भी पुलिस अधिकारी की सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत क्षमता पर निर्भर नहीं करती, बल्कि विभिन्न विभागों और एजेंसियों के साथ समन्वित कार्यप्रणाली पर भी आधारित होती है। उन्होंने प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करने का आग्रह करते हुए कहा कि इससे पुलिस व्यवस्था अधिक प्रभावी, संवेदनशील और जवाबदेह बनेगी।
इस अवसर पर अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण) श्री राघवेंद्र सुहास ने कहा कि मिड करियर ट्रेनिंग कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों की व्यावसायिक दक्षता को और अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को बदलती परिस्थितियों के अनुरूप अपनी कार्यशैली विकसित करने तथा नवीनतम पुलिसिंग तकनीकों से परिचित होने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि पुलिस सेवा में निरंतर प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि समय के साथ अपराध की प्रकृति और अपराधियों के तौर-तरीकों में लगातार परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में आधुनिक तकनीक, डेटा विश्लेषण, इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग तथा नेतृत्व क्षमता का विकास प्रत्येक अधिकारी के लिए महत्वपूर्ण है।










