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गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने दी प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं

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ज्ञान, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने का दिया संदेश

भोपाल। भारतीय संस्कृति की महान गुरु-शिष्य परंपरा, ज्ञान, श्रद्धा, संस्कार और कृतज्ञता के पावन पर्व गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मध्यप्रदेश शासन की माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक और सांस्कृतिक पर्व नहीं, बल्कि जीवन में ज्ञान, विवेक, अनुशासन, संस्कार और सही मार्गदर्शन के महत्व को स्मरण करने का विशेष अवसर है।

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माननीय मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने अपने शुभकामना संदेश में गुरुजनों, शिक्षकों, आध्यात्मिक आचार्यों तथा समाज को ज्ञान और सकारात्मक दिशा प्रदान करने वाले सभी मार्गदर्शकों के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान भारतीय संस्कृति में अत्यंत ऊंचा है। गुरु व्यक्ति के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं तथा उसे सत्य, कर्तव्य, सेवा और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु केवल शिक्षा प्रदान करने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे जीवन को सही दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत और व्यक्तित्व निर्माण के आधार होते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से व्यक्ति में आत्मविश्वास, विवेक, धैर्य, अनुशासन और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। गुरु का ज्ञान व्यक्ति के जीवन को केवल सफल ही नहीं, बल्कि सार्थक और उपयोगी भी बनाता है।

गुरु पूर्णिमा का पर्व भारतीय संस्कृति की उस गौरवशाली परंपरा का प्रतीक है, जिसमें गुरु को सर्वोच्च सम्मान दिया गया है। प्राचीन काल से ही भारत में गुरु और शिष्य के संबंध को विश्वास, समर्पण, अनुशासन और ज्ञान का आदर्श संबंध माना गया है। गुरु अपने शिष्यों को केवल विषयों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला, नैतिक मूल्यों का महत्व और समाज के प्रति अपने दायित्वों का बोध भी कराते हैं।

माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व हमें अपने जीवन में उन सभी व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की प्रेरणा देता है, जिन्होंने हमें ज्ञान दिया, सही दिशा दिखाई और कठिन परिस्थितियों में मार्गदर्शन किया। माता-पिता जीवन के प्रथम गुरु होते हैं, जो बच्चों को संस्कार, व्यवहार और जीवन के प्रारंभिक मूल्य सिखाते हैं। इसके बाद शिक्षक, गुरु और अनुभवी मार्गदर्शक व्यक्ति के ज्ञान तथा व्यक्तित्व को समृद्ध करते हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा के अवसर पर हमें केवल अपने गुरुजनों का सम्मान ही नहीं करना चाहिए, बल्कि उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और मूल्यों को अपने व्यवहार में भी उतारना चाहिए। सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सेवा, करुणा और मानवता जैसे गुणों का पालन करना ही गुरु के प्रति सच्ची श्रद्धा और सम्मान है।

गुरु पूर्णिमा का पर्व महर्षि वेदव्यास की जयंती से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। महर्षि वेदव्यास ने भारतीय ज्ञान परंपरा को व्यवस्थित और समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वेदों के विभाजन तथा महाभारत सहित अनेक महान ग्रंथों से जुड़े उनके योगदान के कारण गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह दिन ज्ञान और भारतीय सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर है।

श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं रहा है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य व्यक्ति के भीतर ज्ञान, संस्कार, नैतिकता, आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी का विकास करना है। प्राचीन गुरुकुल परंपरा में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सेवा, अनुशासन, आत्मसंयम, प्रकृति संरक्षण और समाज के प्रति कर्तव्य का पाठ पढ़ाया जाता था।

उन्होंने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। इंटरनेट, डिजिटल माध्यम, ऑनलाइन शिक्षा और आधुनिक तकनीकों ने विद्यार्थियों के लिए ज्ञान के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। इसके बावजूद शिक्षक और गुरु की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि तकनीक जानकारी तो उपलब्ध करा सकती है, लेकिन सही दिशा, नैतिक समझ, प्रेरणा और जीवन मूल्यों का विकास एक संवेदनशील और योग्य शिक्षक ही कर सकता है।

माननीय मंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों और युवाओं के सामने अनेक चुनौतियां हैं। बढ़ती प्रतिस्पर्धा, तकनीकी परिवर्तन, रोजगार की चुनौतियां और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच युवाओं को सही मार्गदर्शन की आवश्यकता है। ऐसे समय में शिक्षक और गुरु युवाओं को आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच और धैर्य के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए भी प्रेरित करता है। एक अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर ज्ञान के साथ संवेदनशीलता, सहयोग, सेवा और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करता है।

ज्ञान के साथ संस्कार और सफलता के साथ सेवा का संदेश

माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने प्रदेश के विद्यार्थियों और युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों और शिक्षकों द्वारा दिए गए मार्गदर्शन का सम्मान करें तथा शिक्षा को केवल परीक्षा और रोजगार तक सीमित न रखें। ज्ञान का उपयोग समाज के विकास, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण के लिए किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा हमें आत्ममंथन का अवसर भी देती है। यह पर्व हमें यह विचार करने के लिए प्रेरित करता है कि हम अपने गुरुजनों से प्राप्त शिक्षा और संस्कारों को अपने जीवन में किस प्रकार अपनाते हैं। यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में ईमानदारी, अनुशासन, सेवा और मानवता को स्थान देता है, तो वह अपने गुरु की शिक्षाओं का वास्तविक सम्मान करता है।

श्रीमती उइके ने कहा कि समाज के विकास में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षक नई पीढ़ी को ज्ञान प्रदान करने के साथ-साथ उसके विचारों, व्यक्तित्व और भविष्य को भी आकार देते हैं। एक प्रेरक शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर नई सोच, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और समाज के लिए सकारात्मक योगदान देने की भावना विकसित करता है।

उन्होंने प्रदेश के सभी शिक्षकों, गुरुजनों और शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उनका समर्पण समाज और राष्ट्र के भविष्य को मजबूत बनाता है। शिक्षक अपने ज्ञान और अनुभव से विद्यार्थियों को सक्षम, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनाने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।

गुरु का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर विद्यालयों, महाविद्यालयों, आश्रमों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। विद्यार्थी अपने शिक्षकों का सम्मान करते हैं, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं तथा गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हैं। कई स्थानों पर गुरु पूजन, सत्संग, भजन-कीर्तन, यज्ञ और सामाजिक सेवा के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

माननीय मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि गुरु का सम्मान केवल गुरु पूर्णिमा के दिन तक सीमित नहीं होना चाहिए। गुरु के प्रति सच्चा सम्मान उनके द्वारा दिए गए ज्ञान और संस्कारों को जीवन में अपनाने से होता है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करें, अनुशासन बनाए रखें और अपने ज्ञान का उपयोग समाज तथा देश के हित में करें।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी रूप में गुरु का योगदान होता है। माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक, वरिष्ठजन और जीवन के अनुभव हमें निरंतर सीख देते हैं। इसलिए गुरु पूर्णिमा उन सभी व्यक्तियों के प्रति आभार और सम्मान व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने हमारे जीवन को बेहतर बनाने में योगदान दिया है।

गुरु पूर्णिमा का संदेश यह भी है कि ज्ञान के साथ विनम्रता, सफलता के साथ सेवा और प्रगति के साथ संस्कृति का संरक्षण आवश्यक है। व्यक्ति चाहे किसी भी क्षेत्र में सफलता प्राप्त करे, उसे अपने मूल्यों और सामाजिक दायित्वों को नहीं भूलना चाहिए।

माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने प्रदेशवासियों के सुख, शांति, समृद्धि और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व सभी के जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि, सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा लेकर आए।

उन्होंने कहा कि गुरु का आशीर्वाद और मार्गदर्शन जीवन की कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है। गुरु व्यक्ति के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानकर उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं। इसलिए समाज में गुरुजनों और शिक्षकों का सम्मान तथा उनकी भूमिका को सदैव महत्व दिया जाना चाहिए।

गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति की उस अमूल्य धरोहर का पर्व है, जो ज्ञान, श्रद्धा, सेवा, अनुशासन और संस्कारों को एक सूत्र में जोड़ता है। यह पर्व नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने की प्रेरणा देता है।

माननीय कैबिनेट मंत्री श्रीमती संपतिया उइके की ओर से प्रदेशवासियों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में ज्ञान, विवेक, शांति, समृद्धि और सफलता की कामना की गई।

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