
नई दिल्ली।
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने ‘भारत 6जी एलायंस’ (Bharat 6G Alliance) की प्रगति की व्यापक समीक्षा करते हुए देश को दूरसंचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व प्रदान करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का मूल्यांकन किया। इस अवसर पर उन्होंने दूरसंचार अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विभिन्न संस्थानों को ‘5जी प्रयोगशाला उत्कृष्टता पुरस्कार’ भी प्रदान किए। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल नई तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उनका निर्माता और वैश्विक मानक तय करने वाला देश बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
समीक्षा बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने दूरसंचार क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। 4जी से 5जी तक की यात्रा रिकॉर्ड समय में पूरी करने के बाद अब देश 6जी तकनीक के विकास, अनुसंधान और वैश्विक मानकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि ‘भारत 6जी एलायंस’ इसी व्यापक दृष्टि को साकार करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, जो उद्योग, स्टार्टअप, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और सरकार के बीच समन्वय स्थापित कर भविष्य की संचार तकनीकों का विकास कर रहा है।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत 6जी एलायंस का उद्देश्य केवल नई तकनीक विकसित करना नहीं है, बल्कि ऐसी दूरसंचार व्यवस्था तैयार करना है जो विश्वसनीय, सुरक्षित, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप हो। उन्होंने कहा कि भारत को 6जी प्रौद्योगिकी के वैश्विक मानकों के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभानी होगी, ताकि भारतीय अनुसंधान और नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उचित पहचान मिल सके।
बैठक में भारत 6जी एलायंस के विभिन्न कार्यकारी समूहों की गतिविधियों, अनुसंधान परियोजनाओं, वैश्विक साझेदारियों और भविष्य की कार्ययोजना की समीक्षा की गई। केंद्रीय मंत्री ने सभी कार्यकारी समूहों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में किए जा रहे अनुसंधान और नवाचार को एक साझा रणनीति के तहत आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ज्ञान, संसाधनों और विशेषज्ञता का आदान-प्रदान जितना अधिक होगा, भारत उतनी ही तेजी से 6जी तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी स्थान प्राप्त कर सकेगा।
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत 6जी एलायंस को विश्व के अग्रणी दूरसंचार संगठनों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहिए तथा वैश्विक प्रगति के मानकों को अपनाते हुए अनुसंधान और विकास की गति तेज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य की संचार तकनीक कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, क्वांटम संचार, सैटेलाइट नेटवर्क, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), क्लाउड कंप्यूटिंग और उन्नत डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों से गहराई से जुड़ी होगी। इसलिए भारत को इन सभी क्षेत्रों में समानांतर रूप से अपनी क्षमता मजबूत करनी होगी।
कार्यक्रम के दौरान ‘5जी प्रयोगशाला उत्कृष्टता पुरस्कार’ प्रदान करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देशभर के विश्वविद्यालयों, इंजीनियरिंग संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में स्थापित 5जी प्रयोगशालाएं भविष्य की दूरसंचार तकनीकों के विकास का आधार बनेंगी। इन प्रयोगशालाओं में छात्र, शोधकर्ता और स्टार्टअप नई तकनीकों पर प्रयोग कर रहे हैं, जिससे भारत में नवाचार की मजबूत संस्कृति विकसित हो रही है।
उन्होंने कहा कि आज का छात्र ही कल का वैज्ञानिक, उद्यमी और तकनीकी विशेषज्ञ बनेगा। इसलिए सरकार युवाओं को अत्याधुनिक अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रही है। इससे भारत में विकसित तकनीकों का व्यावसायिक उपयोग भी तेजी से बढ़ेगा।
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि 6जी केवल इंटरनेट की अगली पीढ़ी नहीं होगी, बल्कि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग, परिवहन, रक्षा, स्मार्ट शहरों और डिजिटल शासन सहित अनेक क्षेत्रों में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। अत्यधिक गति, बेहद कम विलंबता (लेटेंसी), उच्च विश्वसनीयता और बुद्धिमान नेटवर्किंग जैसी विशेषताओं के कारण 6जी तकनीक डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई दिशा देगी।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि भारत को केवल विदेशी तकनीकों पर निर्भर नहीं रहना है, बल्कि स्वदेशी अनुसंधान, स्वदेशी नवाचार और स्वदेशी समाधान विकसित कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बनना है। इसके लिए सरकार उद्योग जगत, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर एक मजबूत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रही है।
केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर पर यह भी कहा कि भारत की डिजिटल क्रांति ने विश्व का ध्यान आकर्षित किया है। डिजिटल भुगतान, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, तीव्र 5जी विस्तार और दूरसंचार सुधारों ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाई है। अब 6जी तकनीक के क्षेत्र में भी भारत नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।
उन्होंने सभी हितधारकों से अनुसंधान, नवाचार और वैश्विक सहयोग को और अधिक गति देने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के विजन को साकार करने में अत्याधुनिक दूरसंचार तकनीकों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत 6जी एलायंस के संयुक्त प्रयासों से देश आने वाले वर्षों में 6जी तकनीक के विकास, मानकीकरण और अनुप्रयोग के क्षेत्र में विश्व के अग्रणी देशों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।
कार्यक्रम के अंत में सरकार ने एक बार फिर भारत को 6जी तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक लीडर बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अनुसंधान, नवाचार, प्रतिभा, उद्योग और सरकार के साझा प्रयासों से भारत भविष्य की दूरसंचार क्रांति का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है और आने वाले वर्षों में देश वैश्विक डिजिटल परिवर्तन की दिशा तय करने वाले प्रमुख राष्ट्रों में शामिल होगा।










