
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर 29 जुलाई 2026 को मध्यप्रदेश में राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर, भोपाल में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रहे। इस अवसर पर वन एवं वन्यजीव संरक्षण, जैव विविधता के संवर्धन तथा बाघ संरक्षण के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में बाघ संरक्षण का अग्रणी राज्य है और यह गौरव पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वनों के संरक्षण, प्राकृतिक आवासों के विकास, वन्यजीवों की सुरक्षा तथा मानव–वन्यजीव सह-अस्तित्व को मजबूत बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश के राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्वों में बेहतर प्रबंधन, आधुनिक निगरानी व्यवस्था तथा स्थानीय समुदायों की सहभागिता के कारण बाघों की संख्या और उनका सुरक्षित आवास लगातार सुदृढ़ हुआ है।
कार्यक्रम में बाघ संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। वन अधिकारियों ने प्रदेश में संचालित संरक्षण गतिविधियों, वन्यजीव प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और इको-टूरिज्म के विकास संबंधी प्रयासों की जानकारी दी। साथ ही वन एवं वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं संस्थाओं को सम्मानित भी किया गया।
मध्यप्रदेश को लंबे समय से देश में बाघों की सबसे सुरक्षित और समृद्ध धरती के रूप में पहचान मिली है। प्रदेश के कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना, संजय-दुबरी, वीरांगना दुर्गावती तथा माधव जैसे टाइगर रिजर्व न केवल बाघ संरक्षण के महत्वपूर्ण केंद्र हैं, बल्कि देश-विदेश के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख आधार भी हैं। इन संरक्षित क्षेत्रों ने वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था, रोजगार और प्रकृति पर्यटन को भी नई दिशा प्रदान की है।
अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का उद्देश्य बाघों और उनके प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना तथा भावी पीढ़ियों के लिए इस अमूल्य वन्यजीव धरोहर को सुरक्षित रखना है। मध्यप्रदेश इस दिशा में निरंतर प्रभावी प्रयास करते हुए देश में वन्यजीव संरक्षण का एक सफल और प्रेरणादायक मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।









