
भोपाल। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर गुरु-शिष्य परंपरा के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी गईं। इस अवसर पर कहा गया कि भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च माना गया है। गुरु केवल शिक्षा देने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सत्य, ज्ञान, सदाचार और आत्मबोध की दिशा में अग्रसर करने वाले पथप्रदर्शक होते हैं।
संदेश में कहा गया कि गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ता है। गुरु जीवन में विवेक, अनुशासन, नैतिकता और कर्तव्यबोध का संचार करते हैं तथा व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देते हैं। भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात् ईश्वर का स्वरूप माना गया है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना प्रत्येक शिष्य का परम कर्तव्य है।
इस अवसर पर संत परंपरा का प्रसिद्ध दोहा उद्धृत करते हुए कहा गया—
“गुरु बिन ज्ञान न उपजै, गुरु बिन मिले न मोक्ष।
गुरु बिन लखै न सत्य को, गुरु बिन मिटैं न दोष॥”
इस दोहे के माध्यम से गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया गया कि गुरु के बिना न तो सच्चे ज्ञान की प्राप्ति संभव है, न सत्य का बोध और न ही जीवन के दोषों का परिमार्जन। गुरु का सान्निध्य ही व्यक्ति को आत्मविकास, आध्यात्मिक उन्नति और जीवन की वास्तविक दिशा प्रदान करता है।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सभी गुरुजनों के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए समाज से ज्ञान, संस्कार, सेवा और मानवता की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया। साथ ही कामना की गई कि गुरुजनों का आशीर्वाद सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य, सद्बुद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे।
अंत में समस्त गुरुजनों को सादर नमन करते हुए सभी नागरिकों को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रेषित की गईं।








