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सोना जो एक्सपर्ट्स को भी सोने नहीं दे रहा: क्या घटेगा..?

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Bureau Report

दिलीप शर्मा (वरिष्ठ पत्रकार)

दिवाली से पहले सोना और चांदी के दामों में आई अभूतपूर्व तेजी ने सराफा व्यापारियों और उन परिवारों के धन में जबरदस्त वृद्धि की है जिनके पास सोने-चांदी के जेवर, बिस्कुट या सिक्के हैं। निवेशकों के लिए भी यह समय लाभकारी रहा। हालांकि, दिवाली के बाद सोने और चांदी के दामों में गिरावट आई है, जिससे बाजार में हलचल मची है। अब सवाल उठता है कि क्या सोना फिर से बढ़ेगा या अभी और घटेगा?

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मोदी राज में सोने की कीमतें: अच्छे दिन और भविष्य की राह

दिवाली से पहले सोने के दाम 1.32 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गए थे, लेकिन 22 अक्टूबर को गिरावट दर्ज हुई, जिससे तेजी के बाद करेक्शन की बातें जोर पकड़ने लगीं। प्रधानमंत्री मोदी ने शुरुआत में ‘अच्छे दिन’ आने की बात कही थी, और सोने-चांदी में तेजी ने निवेशकों को वह भरोसा दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, 2026 में सोने की कीमतें 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती हैं। कुछ रिपोर्टें तो 1.55 लाख या इससे भी ऊपर का अनुमान देती हैं, जबकि कुछ कम कर 1.25 लाख से 1.44 लाख के बीच संभावित मूल्य बता रही हैं। ये भविष्यवाणियां भू-राजनीतिक तनाव, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति, डॉलर की कमजोरी और आर्थिक अनिश्चितता पर आधारित हैं।

क्या 3 लाख का टारगेट वास्‍तविक है?

लंबी अवधि के आंकड़े बताते हैं कि 1980 के दशक में निजी निवेशकों ने अपनी संपत्ति का करीब 8% सोने में लगाया था, जबकि 2010 के दशक में यह घटकर 2-3% रह गया। फिलहाल यह प्रतिशत बढ़ रहा है। केंद्रीय बैंक भी अपने भंडार में 20-22% सोना रख रहे हैं, जो कि अतीत के 50-60% के मुकाबले कम है। अगर केंद्रीय बैंक खरीद जारी रखते हैं तो सोने की कीमतों में तेजी आ सकती है।

सेबी-पंजीकृत रिसर्च एनालिस्ट राहुल जैन के अनुसार, ‘पिछले 100 सालों में सोने के दामों में ऐसी तेजी कभी नहीं देखी गई। मात्र 18 महीने में सोने की कीमतें दोगुनी हो गईं, जो न तो अर्थशास्त्री और न ही ज्योतिषी की भविष्यवाणी में थी।’

तेजी और मंदी के बीच निवेशकों के लिए सलाह

बुल यानी तेजी पक्ष के लोग लंबे समय के लिए संरचनात्मक कारण बताते हैं जो सोना बढ़ने में सहायक हैं। वहीं, बेयर यानी मंदी वाले जोखिम की चेतावनी देते हैं कि अभी सोना ‘ओवरबॉट’ यानी अत्यधिक खरीदा गया है। इसलिए गिरावट का खतरा भी बना है।

चांदी में भी उतार-चढ़ाव और सट्टा हावी है। इस स्थिति में निवेशकों को अपनी क्षमता और समझ के अनुसार ही निर्णय लेना चाहिए। निरंतर मंदी के दिनों में ट्रेंड का अध्‍ययन करें और सुधार आने पर थोड़े-थोड़े निवेश करें।

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