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“भारतीयों के दम पर चल रही है दुनिया” — Organisation for Economic Co‑operation and Development ने माना, ग्लोबल ग्रोथ में सबसे आगे भारत

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OECD की रिपोर्ट से खुलासा: वैश्विक मंदी के बीच भारत का आर्थिक उत्साह बरकरार

नई दिल्ली। दुनिया की आर्थिक गति मंद पड़ने के बावजूद भारत ने विकास की रफ्तार बनाये रखी है। पेरिस स्थित OECD की जून 2025 की Economic Outlook रिपोर्ट में भारत को 2025-26 में 6.3 % तथा 2026-27 में 6.4 % की ग्रोथ दर वाले देश के रूप में पेश किया गया है। वहीं, वैश्विक स्तर पर आर्थिक वृद्धि दर केवल 2.9 % तक सीमित रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास की यह गति “भारतीयों के दम पर” संभव हुई है — यानी घरेलू खपत, निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च की बदौलत। भारत की यह स्थिति इस समय दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं चीन और अमेरिका से बेहतर नजर आ रही है, जिनकी ग्रोथ दर तेजी से गिरने की संभावना जताई गई है।

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वैश्विक पृष्ठभूमि: मंदी का दौर, भारत का अनूठा प्रदर्शन

OECD की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि ट्रेंड में गिरावट पर है—2024 में 3.3 % रही ग्रोथ अब 2025-26 में सिर्फ 2.9 % तक आ सकती है। इसके बावजूद भारत अपने विकास ट्रैक पर मजबूती से दिखाई दे रहा है—यह उस समय बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है जब दुनिया की अधिकांश अर्थव्यवस्थाएँ सुस्ती में हैं।

रिपोर्ट ने इसके प्रमुख कारणों में उपभोक्ता खर्च में उछाल, मौद्रिक नीति का अनुकूल माहौल, सार्वजनिक पूंजीगत व्यय तथा श्रम बाज़ार में मजबूती को बताया है। इस तरह, भारत ने अपने आंतरिक संसाधनों को सक्रिय करते हुए वैश्विक headwinds के बीच बेहतर विकास व ज़रूरी संतुलन बना लिया है।


मुख्य संकेतक: खपत-निवेश का बल, निर्यात पर दबाव

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में निजी खर्च (private consumption) धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है। रीयल आय में वृद्धि, हाल ही में व्यक्तिगत करों में कटौती तथा श्रम बाज़ार की स्थिति बेहतर होने से यह संभव हुआ है।

निवेश को भी समर्थन मिल रहा है—ब्याज दरों में कमी, सार्वजनिक पूंजीगत खर्च में तेजी इसके पीछे प्रमुख कारण हैं। लेकिन निर्यात-क्षेत्र को चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अमेरिकी टैरिफ, वैश्विक व्यापार नीति की अनिश्चितता और घटती वैश्विक मांग ने भारत के निर्यात संभावनाओं को प्रभावित किया है।


भारत की चुनौतियाँ: आगे-भी राह आसान नहीं

हालाँकि ग्रोथ की दर अच्छी है, लेकिन रिपोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं—बुरी मानसून, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और वैश्विक व्यापार तनाव जैसे कारक विकास मार्ग को प्रभावित कर सकते हैं।

इसके अतिरिक्त, निर्यात-निर्भर उद्योगों, विशेषकर टेक्सटाइल, केमिकल व फार्मा सेक्टर में दबाव बढ़ सकता है। उच्च टैरिफ एवं वैश्विक नीति बहिर्मुखी रुख से भारत को अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी गई है।

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