
मंडला जिले के बिछिया विकासखंड के कन्हारीकला में आयोजित दुधारू पशु वितरण एवं स्वास्थ्य शिविर कार्यक्रम में मंगुभाई पटेल की उपस्थिति ने जनजातीय विकास की दिशा में चल रहे प्रयासों को नई ऊर्जा प्रदान की। कार्यक्रम में उन्होंने स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय जनजातीय समाज के विकास का अभूतपूर्व काल है और सरकार की प्राथमिकता इस वर्ग के समग्र उत्थान, स्वास्थ्य सुरक्षा तथा आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित है। उन्होंने अपने संबोधन में यह रेखांकित किया कि योजनाओं का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि समाज को आत्मनिर्भर बनाना है, जिससे आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित और सशक्त बन सकें। राज्यपाल ने अपने उद्बोधन में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (PM JANMAN) तथा धरती आबा ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसी पहलें जनजातीय समाज के जीवन स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने दुधारू पशुओं के वितरण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने हितग्राहियों को संबोधित करते हुए कहा कि दूध का उपयोग सबसे पहले बच्चों के पोषण के लिए किया जाना चाहिए, जिससे कुपोषण की समस्या को दूर किया जा सके। इसके बाद अतिरिक्त दूध को बेचकर परिवार अपनी आय बढ़ा सकते हैं। उन्होंने पशुपालन को केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि जिम्मेदारी बताते हुए पशुओं की देखभाल बच्चों की तरह करने की सलाह दी। समय पर चारा, पानी और बीमारी की स्थिति में उपचार को अत्यंत आवश्यक बताया गया।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में राज्यपाल ने विशेष रूप से सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ चल रहे अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक करोड़ों लोगों की जांच की जा चुकी है और यह अभियान जनजातीय समाज के स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने जेनेटिक कार्ड को बीमारी की रोकथाम का प्रभावी साधन बताते हुए विवाह से पूर्व जांच कराने की सलाह दी। इसके साथ ही गर्भस्थ शिशुओं और नवजातों की समय पर जांच को भी अत्यंत आवश्यक बताया, जिससे भविष्य की पीढ़ियों को इस गंभीर बीमारी से बचाया जा सके। कार्यक्रम में जनजातीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिली, जब बैगा समुदाय के कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया। राज्यपाल ने इस प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय संस्कृति हमारी अमूल्य धरोहर है, जिसे संरक्षित और प्रोत्साहित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, क्योंकि यही समाज की आत्मा होती है। अपने प्रवास के दौरान राज्यपाल ने आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य शिविर, पशु मेले और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने आंगनवाड़ी केंद्रों को बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला बताते हुए इनके सुदृढ़ संचालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के समग्र विकास की मजबूत नींव यहीं से रखी जाती है, इसलिए पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का बेहतर समन्वय आवश्यक है।
पर्यावरण संरक्षण के विषय में भी राज्यपाल ने महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने हरित भविष्य के लिए पौधारोपण को अनिवार्य बताते हुए जल संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि घरों में उपयोग किए गए पानी का उपयोग आंगनवाड़ी की पोषण वाटिका की सिंचाई के लिए किया जा सकता है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो। कार्यक्रम के दौरान आत्मीयता और उत्सव का वातावरण देखने को मिला, जब आंगनवाड़ी परिसर में एक बालिका का जन्मदिवस मनाया गया। राज्यपाल ने बच्चों के साथ समय बिताकर उनके प्रति स्नेह और संवेदनशीलता का परिचय दिया। इस अवसर पर उन्होंने परिसर में अशोक का पौधा भी रोपित किया, जो पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनके संकल्प को दर्शाता है। इस अवसर पर सम्पतिया उइके ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संचालित योजनाओं का लाभ सीधे जनजातीय समाज तक पहुंच रहा है। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष बल देते हुए कहा कि ‘लखपति दीदी’ जैसी पहल से महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। उन्होंने किसानों को पशुपालन को आय का प्रमुख साधन बनाने के लिए प्रेरित किया।
वहीं लखन पटेल ने इस कार्यक्रम को जनजातीय विकास का मील का पत्थर बताते हुए कहा कि पशुपालन के माध्यम से बैगा परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों से पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और बीमा पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया, जिससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में नुकसान से बचा जा सके। कार्यक्रम के अंतर्गत राज्यपाल द्वारा विभिन्न हितग्राहियों को लाभ वितरित किया गया। मंडला, डिंडौरी और बालाघाट जिलों के कुल 94 बैगा जनजाति के हितग्राहियों को मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के तहत पशु प्रदान किए गए। इसके साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना, टीबी फूड बास्केट, एचवीपी प्रमाण पत्र और वन काष्ठ लाभांश का भी वितरण किया गया। समारोह में बैगा समाज के प्रतिनिधियों द्वारा राज्यपाल का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया, जो जनजातीय परंपराओं और सम्मान की भावना का प्रतीक था। इस पूरे आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि शासन और प्रशासन जनजातीय समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी सामने आया कि विकास केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर वर्ग तक अवसर, संसाधन और सम्मान पहुंचाने की प्रक्रिया है। जनजातीय समाज के उत्थान के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और संस्कृति के समन्वित विकास की आवश्यकता है, और इसी दिशा में यह कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ। समग्र रूप से देखा जाए तो कन्हारीकला में आयोजित यह कार्यक्रम जनजातीय समाज के सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में सामने आया है, जिसने न केवल लाभ वितरण किया बल्कि जागरूकता, सहभागिता और आत्मनिर्भरता का संदेश भी समाज तक पहुंचाया।









