Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

अधिक ज्येष्ठ मास, परमा एकादशी और सनातन परंपरा का आध्यात्मिक महत्व: श्रद्धा, साधना और आत्मशुद्धि का पावन अवसर

Author Image
Written by
HQ Report

भोपाल। भारतीय सनातन संस्कृति में पंचांग केवल तिथियों और पर्वों की जानकारी देने वाला कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह जीवन को प्रकृति, ग्रह-नक्षत्रों और आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ने वाला एक वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक मार्गदर्शक माना जाता है। 10 जून 2026, बुधवार का दिन भी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली दशमी तिथि और इसके पश्चात प्रारंभ होने वाली परमा एकादशी श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। सनातन धर्म में एकादशी को भगवान विष्णु की उपासना, आत्मसंयम, तप, दान और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।

धर्मशास्त्रों के अनुसार अधिक मास स्वयं भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित माना जाता है। इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस महीने में किए गए जप, तप, दान, व्रत, कथा-श्रवण और सेवा कार्यों का पुण्य सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यही कारण है कि देशभर के मंदिरों, धार्मिक स्थलों और घरों में इन दिनों विशेष पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है।

Advertisement Box

10 जून को दशमी तिथि रात्रि तक रहेगी और उसके बाद एकादशी तिथि का आरंभ होगा। पंचांग के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून को रखा जाएगा। वैष्णव परंपरा में इस एकादशी का अत्यंत विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत समस्त पापों का नाश करने वाला, दरिद्रता को दूर करने वाला और जीवन में सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है।

भारतीय धार्मिक ग्रंथों में वर्णित कथाओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना गया है। कहा जाता है कि जो व्यक्ति श्रद्धा, विश्वास और नियमपूर्वक इस व्रत का पालन करता है, उसके जीवन की अनेक बाधाएं दूर हो जाती हैं। धर्माचार्यों के अनुसार यह व्रत केवल भोजन त्यागने का नाम नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म की शुद्धि का भी एक साधन है।

सनातन धर्म में एकादशी व्रत को आत्मसंयम का पर्व माना गया है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनावपूर्ण परिस्थितियों के बीच एकादशी व्यक्ति को आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर प्रदान करती है। व्रत के माध्यम से मनुष्य अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास करता है तथा ईश्वर के प्रति अपनी श्रद्धा और समर्पण को मजबूत बनाता है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि भारतीय संस्कृति में उपवास का महत्व केवल धार्मिक नहीं बल्कि स्वास्थ्य संबंधी दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना गया है। आयुर्वेद में समय-समय पर शरीर को विश्राम देने और पाचन तंत्र को संतुलित रखने के लिए उपवास को उपयोगी बताया गया है। यही कारण है कि प्राचीन भारतीय परंपराओं में व्रत और उपवास को जीवनशैली का हिस्सा बनाया गया।

अधिक मास को लेकर भी अनेक धार्मिक मान्यताएं प्रचलित हैं। पुराणों के अनुसार एक समय ऐसा आया जब किसी भी देवता ने अतिरिक्त मास को स्वीकार नहीं किया। तब भगवान विष्णु ने उसे अपना नाम और स्थान प्रदान किया। तभी से यह पुरुषोत्तम मास कहलाया और इसे विशेष पुण्यदायी माना जाने लगा। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों को अत्यंत फलदायी बताया गया है।

देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों पर इन दिनों विशेष आयोजन हो रहे हैं। मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा, रामायण पाठ, सुंदरकांड, भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा-अर्चना के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। श्रद्धालु बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन कर रहे हैं और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।

पंचांग के अनुसार 10 जून को उत्तरभाद्रपद नक्षत्र के पश्चात रेवती नक्षत्र का प्रवेश होगा। ज्योतिष शास्त्र में रेवती नक्षत्र को शुभ और मंगलकारी माना गया है। यह नक्षत्र यात्रा, दान, धार्मिक कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी प्रकार आयुष्मान और सौभाग्य योग का संयोग भी इस दिन को विशेष बनाता है।

भारतीय संस्कृति में ग्रह-नक्षत्रों और योगों का अध्ययन हजारों वर्षों से किया जाता रहा है। प्राचीन ऋषियों ने प्रकृति और मानव जीवन के बीच संबंधों को समझते हुए पंचांग की परंपरा विकसित की। आज भी लाखों लोग अपने महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत पंचांग देखकर करते हैं। विवाह, गृह प्रवेश, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य शुभ कार्यों में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है।

राहुकाल का उल्लेख भी पंचांग में विशेष रूप से किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहुकाल में नए और शुभ कार्यों की शुरुआत से बचने की सलाह दी जाती है। हालांकि नियमित पूजा, जप और ईश्वर स्मरण किसी भी समय किया जा सकता है। विद्वानों का मानना है कि राहुकाल जैसी अवधारणाएं व्यक्ति को समय प्रबंधन और शुभ अवसरों के प्रति जागरूक बनाने का माध्यम भी हैं।

अधिक ज्येष्ठ मास में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। धर्मग्रंथों में अन्नदान, जलदान, वस्त्रदान और गौसेवा को श्रेष्ठ माना गया है। ग्रीष्म ऋतु के दौरान प्यासे लोगों को पानी पिलाना, पशु-पक्षियों के लिए जल की व्यवस्था करना और जरूरतमंदों की सहायता करना पुण्यकारी कार्य माना गया है। धार्मिक संस्थाएं भी इन दिनों विभिन्न सेवा गतिविधियों का आयोजन कर रही हैं।

परमा एकादशी की कथा में भगवान विष्णु की कृपा से निर्धनता दूर होने और जीवन में सुख-समृद्धि आने का उल्लेख मिलता है। हालांकि धर्माचार्य स्पष्ट करते हैं कि व्रत का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक लाभ प्राप्त करना नहीं बल्कि मन की शुद्धि, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उन्नति है। जब व्यक्ति अपने विचारों को शुद्ध करता है और ईश्वर में विश्वास रखता है, तब उसके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।

आधुनिक समय में भी एकादशी व्रत की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। युवा पीढ़ी भी अपनी परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने का प्रयास कर रही है। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से धार्मिक ज्ञान का प्रसार तेजी से हो रहा है। अनेक धार्मिक संस्थाएं ऑनलाइन प्रवचन, कथा और भजन कार्यक्रमों का प्रसारण कर रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में लोग जुड़ रहे हैं।

सनातन संस्कृति की विशेषता यह है कि इसमें आध्यात्मिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व दोनों का समन्वय देखने को मिलता है। व्रत और पूजा के साथ-साथ सेवा, दान और परोपकार को भी समान महत्व दिया गया है। धर्मग्रंथों में कहा गया है कि केवल पूजा-अर्चना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि समाज के कमजोर और जरूरतमंद लोगों की सहायता करना भी ईश्वर की सच्ची उपासना है।

अधिक मास के दौरान अनेक श्रद्धालु संकल्प लेकर विशेष साधना करते हैं। कुछ लोग पूरे महीने धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन करते हैं, तो कुछ जप और ध्यान के माध्यम से आत्मिक उन्नति का प्रयास करते हैं। अनेक परिवारों में सामूहिक रूप से पूजा-पाठ और सत्संग आयोजित किए जाते हैं। इससे पारिवारिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को भी मजबूती मिलती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय पर्व और व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पर्व समाज को एकजुट करते हैं, नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं और व्यक्ति को सकारात्मक जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। एकादशी जैसे व्रत व्यक्ति को संयम, अनुशासन और आत्मनियंत्रण का पाठ पढ़ाते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर महानगरों तक परमा एकादशी की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। मंदिरों में विशेष सजावट की जा रही है। श्रद्धालु व्रत, पूजा और रात्रि जागरण की तैयारी में जुटे हैं। कई स्थानों पर भजन संध्या और धार्मिक प्रवचनों का आयोजन भी किया जा रहा है। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों में इस पर्व को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

धार्मिक विद्वानों का कहना है कि वर्तमान समय में जब जीवन तनाव, प्रतिस्पर्धा और भौतिक चिंताओं से घिरा हुआ है, तब ऐसे पर्व मनुष्य को आंतरिक शांति प्रदान करते हैं। ईश्वर स्मरण, ध्यान और भक्ति के माध्यम से व्यक्ति मानसिक संतुलन प्राप्त करता है और जीवन को सकारात्मक दृष्टि से देखने की प्रेरणा पाता है।

10 जून का पंचांग केवल तिथि, नक्षत्र और योग का विवरण भर नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति की उस समृद्ध परंपरा का प्रतीक है जिसमें प्रकृति, आध्यात्मिकता, विज्ञान और जीवन दर्शन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। अधिक ज्येष्ठ मास और परमा एकादशी का यह पावन अवसर श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, सेवा, संयम और भक्ति का संदेश देता

<span style=अधिक ज्येष्ठ मास, परमा एकादशी और सनातन परंपरा का आध्यात्मिक महत्व: श्रद्धा, साधना और आत्मशुद्धि का पावन अवसर">
आज फोकस में

अधिक ज्येष्ठ मास, परमा एकादशी और सनातन परंपरा का आध्यात्मिक महत्व: श्रद्धा, साधना और आत्मशुद्धि का पावन अवसर

वैश्विक बाजारों में दबाव, अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट; एफआईआई की बिकवाली जारी
आज फोकस में

वैश्विक बाजारों में दबाव, अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट; एफआईआई की बिकवाली जारी

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा पर श्रद्धा, आध्यात्म और ज्योतिषीय महत्व का अद्भुत संगम, सनातन परंपराओं के पालन का संदेश
आज फोकस में

अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा पर श्रद्धा, आध्यात्म और ज्योतिषीय महत्व का अद्भुत संगम, सनातन परंपराओं के पालन का संदेश

दमोह की बेटी बनी प्रदेश का गौरव
आज फोकस में

दमोह की बेटी बनी प्रदेश का गौरव

पन्ना जिले में रेल विस्तार को मिली नई गति, देवेन्द्रनगर तक जल्द पहुंचेगी रेल सेवा
आज फोकस में

पन्ना जिले में रेल विस्तार को मिली नई गति, देवेन्द्रनगर तक जल्द पहुंचेगी रेल सेवा

छत्तीसगढ़ के सर्राफा बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में फिर उछाल, बढ़ते दामों ने खरीदारों और निवेशकों का बढ़ाया ध्यान
आज फोकस में

छत्तीसगढ़ के सर्राफा बाजारों में सोने-चांदी की कीमतों में फिर उछाल, बढ़ते दामों ने खरीदारों और निवेशकों का बढ़ाया ध्यान

आज का राशिफल

वोट करें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एपल प्रमुख टिम कुक से आईफोन का निर्माण भारत में न करने को कहा है। क्या इसका असर देश के स्मार्टफोन उद्योग पर पड़ सकता है?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें