
संपादक की कलम से ….. इस साल जम्मू एवं काश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब ,उत्तर प्रदेश, विहार, एवं नेपाल में वर्षा अधिक होने से जन, धन पशुओं, मकानों, सड़कों, पुलों का भारी नुक्सान हुआ है। लैंडस्लाइड से गांव के गांव बह गए। आवागमन बंद हो गया। पानी में बह गए। किसी घर के मुखिया मर गया, तो किती घर के सारे पुरुष, महिला और बच्चों की पहाडों की कीचडु से या नदियों के पानी से मृत्यु हो गई। सब जगह मानी नुक्सान हुआ है। केन्द्र सरकार आपदा प्रबंधन से सहायता राशि प्रदान कर रही है। राज्य सरकार अपने अपने क्षेत्र में सड़कों, मकानों एवं पुलों का निर्माण कर रही है। परन्तु नुक्सान भारी मात्रा में होने से कार्य करने में विलम्ब हो रहा है।. फण्ड की भी कमी है।
हमारे देश में धन की कमी नहीं है। जैसे देवस्थान शंकराचारों, श्रीमदभागवत कथाकारों, संगीतकारों, प्रवचनकारों साधू सन्तों के पास अपार धन जमा है। अगर ये स्वेच्छा से केन्द्र सरकार को उपरोक्त फण्ड की भी कमी है।
उद्योगपति हमारे देश मै धन की कमी नहीं है। जैसे स्थान-चारों शंकराचारों, प्रमिदमानवद कथाकारों, संगीतकारों, प्रवचनकारों
” साधू सन्तों के पास अपार धन जमा है। अगर ये स्वेच्छा से केन्द्र सरकार को उपरोक्त आपदा ग्रस्त स्थानों, शहरों पुलो आदि के पुनः निर्माण हेतु मदद करें तो जल्दी निर्माण हो सकेगा सुमना में इनके प्रति आस्था स्थापित होगी।*
इनके पास जमा धन का सही उपयोग हो सकेगा * साथ ही सकार समाचार पत्रों सोशल मीडिया में प्रचार करे कि हमने इतकी सारी से मदद की है। इससे राज्य और केन्द्र सरकार को मदद करने वाली संस्थाओ के प्रति सहानुभूति ।
देघ में NGO’S 人 बडी कम्पनी, संस्थान द्वारा रोड, स्कूल धर्मशाला कालेज मकान / दुकान का लिमीचा कर नागरिकता को देने का पुनः कार्य किया जाना चाहिए
संपादक
Shri murari lal Goyal








