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HQ Report
देश के प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 (Legal Services Authorities Act, 1987) बनाया गया है। इस अधिनियम की धारा 12 (Section 12) के अंतर्गत समाज के आर्थिक एवं सामाजिक रूप से कमजोर वर्गों को निःशुल्क विधिक सहायता (Free Legal Aid) प्रदान करने का प्रावधान है, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक अभाव के कारण न्याय से वंचित न रहे।
निःशुल्क विधिक सहायता के अंतर्गत पात्र व्यक्तियों को अधिवक्ता की सुविधा, न्यायालयीन प्रक्रिया में सहायता, दस्तावेज तैयार कराने, कानूनी परामर्श तथा अन्य आवश्यक विधिक सेवाएं बिना किसी शुल्क के उपलब्ध कराई जाती हैं।
धारा 12 के अंतर्गत निम्नलिखित व्यक्ति निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त करने के पात्र हैं—
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अनुसूचित जाति (SC) एवं अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्य।
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मानव तस्करी अथवा बेगार (बंधुआ/जबरन श्रम) के पीड़ित।
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सभी महिलाएं एवं बच्चे।
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दिव्यांगजन (Persons with Disabilities)।
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सामूहिक आपदा, जातीय हिंसा, जातिगत अत्याचार, बाढ़, सूखा, भूकंप, औद्योगिक दुर्घटना अथवा अन्य समान आपदाओं के पीड़ित।
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औद्योगिक श्रमिक (Industrial Workmen)।
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अभिरक्षा (Custody) में रहने वाले व्यक्ति, जिनमें कारागार, किशोर गृह, संरक्षण गृह एवं मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में रह रहे व्यक्ति शामिल हैं।
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ऐसे व्यक्ति जिनकी वार्षिक आय केंद्र या राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सीमा से कम हो।









