
मकसद गेम्स और पैसे वाले गेम्स के बीच अंतर करना है व निगरानी संस्था बनाना नई दिल्ली,(ईएमएस)। केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग के लिए प्रोमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग नियम, 2025 का ड्राफ्ट जारी किया है। यह नियम ऑनलाइन गेमिंग को नियंत्रित करने का स्ट्रचर है। सरकार ने लोगों से 31 अक्टूबर तक इस पर सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। ये नियम हाल ही में बने प्रोग एक्ट के तहत बनाए गए हैं, जो ऑनलाइन पैसे वाले गेम्स पर रोक लगाता है। इसका मकसद स्किल-बेस्ड सोशल गेम्स और पैसे वाले गेम्स के बीच अंतर करना है, साथ ही गेमिंग की निगरानी के लिए एक संस्था बनाना है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईटी मंत्रालय के अधिकारियों ने पहले कहा था कि ये नियम बिना सार्वजनिक चर्चा के जारी होंगे, लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि हितधारकों के अनुरोध पर सरकार ने अपना फैसला बदला है। ड्राफ्ट नियमों का मुख्य हिस्सा है ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन। यह एक कॉरपोरेट संस्था होगी, जिसके पास सिविल कोर्ट जैसे अधिकार होंगे, जैसे जांच करना और लोगों को बुलाना। यह अथॉरिटी ऑनलाइन सोशल गेम्स औरई-स्पोर्ट्स को रजिस्टर करेगी, स्वीकृत गेम्स की राष्ट्रीय सूची बनाएगी और यह तय करेगी कि कोई गेम वैध है या पैसे वाला गेम है। अगर कोई गेम सट्टेबाजी, दांव या नकद में बदलने वाली जीत से जुड़ा होगा, तो उसे ऑनलाइन मनी गेम माना जाएगा और देश में चलाने की अनुमति नहीं होगी। अथॉरिटी को कई बड़े अधिकार दिए गए हैं, जैसे रजिस्ट्रेशन रद्द करना, नियम तोड़ने वाली कंपनियों पर जुर्माना लगाना और गैरकानूनी गेमिंग प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने के लिए बैंकों और सेवा प्रदाताओं को निर्देश देना। अथॉरिटी का मुख्यालय राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में होगा। इसका नेतृत्व एक चेयरपर्सन करेंगे, जो आईटी मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव या कम से कम संयुक्त सचिव स्तर का अधिकारी होगा। इसमें तीन अन्य सदस्य होंगे, जो सूचना और प्रसारण, युवा मामले और खेल, और वित्तीय सेवाओं से संबंधित मंत्रालयों से होंगे। इसके अलावा दो निदेशक स्तर के सदस्य होंगे, जिनमें से एक को कानूनी विशेषज्ञता होगी। केंद्र सरकार एक सचिव नियुक्त करेगी, जो अथॉरिटी की मदद करेगा। अथॉरिटी निगरानी का काम करेगी, जबकि प्रमोशन और नीतियों का काम अलग-अलग मंत्रालय देखेंगे। ई-स्पोर्ट्स को युवा मामले और खेल मंत्रालय संभालेगा और सूचना और प्रसारण मंत्रालय सोशल गेम्स को बढ़ावा देगा। दोनों तरह के गेम्स को अथॉरिटी के साथ रजिस्ट्रेशन और पांच साल तक वैध सर्टिफिकेट की जरूरत होगी। बिना सर्टिफिकेट के कोई गेम रजिस्टर्ड के रूप में प्रचारित नहीं किया जा सकेगा। यूजर्स की सुरक्षा के लिए, हर रजिस्टर्ड गेम प्रदाता को शिकायत निवारण प्रणाली बनानी होगी। अगर यूजर्स प्लेटफॉर्म के जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो वह ग्रीवेंस अपील कमेटी में जा सकता है। अगर मामला नहीं सुलझता है तो अथॉरिटी में अपील की जा सकती है। कमेटी और अथॉरिटी को 30 दिनों में अपील का समाधान करना होगा। नियम लागू होने से पहले जमा यूजर्स के पैसे को लेकर भी प्रावधान है। एक्ट लागू होने के 180 दिनों तक बैंक या वित्तीय मध्यस्थ खिलाड़ियों को उनका बकाया पैसा लौटा सकते हैं, बिना इसे अवैध गेमिंग का समर्थन माने। ये एक्ट के लागू होने के बाद, ऑनलाइन मनी गेमिंग सर्विसेस देना तीन साल तक की जेल और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने की सजा दे सकता है. ऐसे प्लेटफॉर्म्स का प्रचार करने पर दो साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।








