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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के बीच कृषि एवं ग्रामीण विकास पर व्यापक चर्चा

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नई दिल्ली।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के बीच नई दिल्ली में कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत और सार्थक चर्चा हुई। इस उच्चस्तरीय बैठक में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, सूखा प्रबंधन, किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने तथा केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने जैसे अनेक विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भारत की कृषि व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए केंद्र एवं राज्यों के बीच साझेदारी को और मजबूत किया जाए।

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बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। बदलती जलवायु, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ते दबाव तथा कृषि लागत में वृद्धि जैसी चुनौतियों के बीच किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादन को टिकाऊ बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ मिलकर कार्य कर रही है। इसी उद्देश्य से राज्यों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जा रहा है ताकि स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने तेलंगाना में कृषि एवं ग्रामीण विकास की वर्तमान स्थिति की जानकारी देते हुए राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों और नवाचारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, जल संरक्षण को बढ़ावा देने तथा कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए अनेक पहल कर रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इन प्रयासों में निरंतर सहयोग की अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि संयुक्त प्रयासों से किसानों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार लाया जा सकता है।

बैठक में कृषि में प्रौद्योगिकी के अधिकाधिक उपयोग पर विशेष चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने माना कि ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रिमोट सेंसिंग, डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म, सटीक कृषि (प्रिसिजन फार्मिंग), मृदा स्वास्थ्य परीक्षण तथा मौसम आधारित कृषि सलाह जैसी आधुनिक तकनीकें किसानों की उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। इन तकनीकों के माध्यम से जल, उर्वरक और अन्य कृषि संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा, जिससे उत्पादन लागत कम होगी और किसानों की आय में वृद्धि होगी।

सूखा प्रबंधन बैठक का एक प्रमुख विषय रहा। बदलते मौसम और अनियमित वर्षा को देखते हुए दोनों नेताओं ने जल संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई, वर्षा जल संचयन, जलग्रहण क्षेत्र विकास तथा सूखा सहनशील फसलों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में वर्षा की कमी रहती है, वहां वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाकर उत्पादन बनाए रखा जा सकता है। साथ ही किसानों को समय पर मौसम संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए डिजिटल तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

किसानों के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में कृषि लागत कम करने, गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता, उन्नत कृषि यंत्रों तक किसानों की पहुंच, कृषि ऋण, बाजार सुविधाओं के विस्तार, भंडारण व्यवस्था को मजबूत करने तथा कृषि उत्पादों के बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया गया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कृषि क्षेत्र में सुधार तभी सफल होंगे जब छोटे और सीमांत किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिलेगा।

ग्रामीण विकास के क्षेत्र में केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं की समीक्षा भी बैठक का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। प्रधानमंत्री आवास योजना–ग्रामीण के अंतर्गत पात्र परिवारों को समयबद्ध तरीके से पक्के मकान उपलब्ध कराने की प्रगति पर चर्चा की गई। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन, गुणवत्ता, पारदर्शिता तथा लाभार्थियों तक समय पर सहायता पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया गया। यह भी सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई कि कोई भी पात्र परिवार आवास योजना के लाभ से वंचित न रहे।

बैठक में विकसित भारत–गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन की भी समीक्षा की गई। इस मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने, स्वयं सहायता समूहों को सशक्त बनाने, ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने तथा युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई गई। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित आजीविका गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा हुई।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) की समीक्षा करते हुए दोनों पक्षों ने किसानों को समय पर बीमा लाभ उपलब्ध कराने, दावों के शीघ्र निपटान, तकनीक आधारित सर्वेक्षण तथा पारदर्शी प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में कहा गया कि प्राकृतिक आपदाओं के समय किसानों को शीघ्र राहत मिलना अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए आधुनिक तकनीक तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया जाना चाहिए। इससे किसानों का विश्वास मजबूत होगा और जोखिम प्रबंधन की व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

बैठक में वैज्ञानिक कृषि रोडमैप तैयार करने पर भी व्यापक विचार-विमर्श हुआ। इस रोडमैप का उद्देश्य कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग, जलवायु अनुकूल खेती, जैविक एवं प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देना तथा किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ना है। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि कृषि अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों तथा वैज्ञानिक विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए ताकि खेती अधिक लाभकारी बन सके।

ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने पर भी विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीण सड़कों, पेयजल, सिंचाई सुविधाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी, कृषि विपणन केंद्रों तथा भंडारण सुविधाओं का विस्तार किसानों और ग्रामीण समुदायों के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया। बैठक में कहा गया कि मजबूत ग्रामीण अवसंरचना कृषि उत्पादन और ग्रामीण रोजगार दोनों को नई गति प्रदान करेगी।

महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराना आवश्यक है। इससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे।

बैठक के दौरान कौशल विकास, ग्रामीण युवाओं के प्रशिक्षण, कृषि आधारित उद्योगों के विकास तथा मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया। दोनों नेताओं ने माना कि कृषि के साथ खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, मत्स्य पालन, बागवानी और अन्य संबद्ध क्षेत्रों का विकास किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने केंद्र सरकार के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि तेलंगाना सरकार कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के संयुक्त प्रयासों से किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आएगा तथा ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी विकास को नई गति मिलेगी।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में केंद्र सरकार का लक्ष्य किसानों की समृद्धि, आधुनिक कृषि व्यवस्था, आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और विकसित भारत के निर्माण का है। इसके लिए राज्यों के साथ निरंतर संवाद, सहयोग और समन्वय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि कृषि केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीय परिवारों की आजीविका का आधार है, इसलिए किसानों के हितों की रक्षा और ग्रामीण विकास को गति देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

बैठक के अंत में दोनों नेताओं ने कृषि, ग्रामीण विकास और किसानों के कल्याण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर सहयोग बनाए रखने पर सहमति व्यक्त की। यह भी निर्णय लिया गया कि केंद्र और राज्य के अधिकारी योजनाओं की प्रगति की नियमित समीक्षा करेंगे तथा आवश्यकतानुसार संयुक्त कार्ययोजना तैयार करेंगे। दोनों पक्षों ने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक कृषि रोडमैप, आधुनिक तकनीकों के उपयोग, प्रभावी सूखा प्रबंधन, ग्रामीण अवसंरचना के विस्तार तथा केंद्र–राज्य समन्वय के माध्यम से कृषि क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी और किसानों की समृद्धि के साथ विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त होगी।

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