
नई दिल्ली, 29 जुलाई 2026। घरेलू सर्राफा बाजार में बुधवार को लगातार दूसरे दिन सोना और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट ने जहां आभूषण खरीदने की योजना बना रहे उपभोक्ताओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी है, वहीं निवेशकों और कारोबारियों के बीच आगे की कीमतों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बुधवार को 10 ग्राम सोने का भाव ₹1,47,000 पर पहुंच गया, जिसमें ₹2,640 की गिरावट दर्ज की गई। वहीं एक किलोग्राम चांदी ₹2,24,800 पर आ गई, जो पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में ₹5,200 सस्ती हुई।
सर्राफा बाजार के जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी, डॉलर की मजबूती, वैश्विक आर्थिक संकेतों और निवेशकों की मुनाफावसूली का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। पिछले दो दिनों में आई तेज गिरावट ने बाजार की दिशा बदल दी है और अब उपभोक्ता यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि क्या आने वाले दिनों में कीमतों में और कमी आएगी या फिर यह गिरावट अस्थायी है।
सोना भारतीय परिवारों के लिए केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि परंपरा, सामाजिक प्रतिष्ठा और सुरक्षित निवेश का प्रतीक भी माना जाता है। शादी-विवाह, धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों में सोने की खरीदारी का विशेष महत्व होता है। ऐसे में कीमतों में आई यह गिरावट उन परिवारों के लिए राहत लेकर आई है जो आने वाले महीनों में आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं।
चांदी की कीमतों में आई भारी कमी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चांदी का उपयोग केवल आभूषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक उत्पादन, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा उपकरणों, चिकित्सा उपकरणों और विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसलिए इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर उद्योग जगत पर भी पड़ता है।
सर्राफा व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में सोना लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा था। कई शहरों में इसके दाम रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए थे, जिसके कारण आम उपभोक्ता खरीदारी से दूरी बनाने लगे थे। अब कीमतों में आई कमी के बाद बाजार में ग्राहकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। व्यापारियों का मानना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक यही स्थिति बनी रहती है तो बाजार में फिर से रौनक लौट सकती है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय कारकों से प्रभावित होती हैं। अमेरिका और यूरोप की मौद्रिक नीतियां, वैश्विक ब्याज दरें, डॉलर इंडेक्स, कच्चे तेल की कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जैसे कई तत्व सोने के भाव तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जब वैश्विक निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते हैं तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं, जबकि जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ने पर कीमतों में गिरावट देखने को मिलती है।
निवेश सलाहकारों का कहना है कि केवल एक-दो दिन की गिरावट को देखकर घबराने की आवश्यकता नहीं है। सोना लंबी अवधि का निवेश माना जाता है और इसमें समय-समय पर उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। जिन लोगों का उद्देश्य दीर्घकालिक निवेश है, उनके लिए ऐसी गिरावट चरणबद्ध निवेश का अवसर भी बन सकती है। हालांकि विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि निवेश हमेशा अपनी वित्तीय क्षमता और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।
दूसरी ओर, आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह समय अपेक्षाकृत बेहतर माना जा रहा है। यदि कीमतों में कुछ और कमी आती है तो त्योहारों और विवाह सीजन से पहले बाजार में खरीदारी का माहौल और मजबूत हो सकता है। व्यापारियों का मानना है कि रक्षाबंधन, जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान सोने-चांदी की मांग में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि केवल सोने की कीमत ही नहीं, बल्कि मेकिंग चार्ज, जीएसटी और अन्य शुल्क भी ग्राहकों के अंतिम बिल को प्रभावित करते हैं। इसलिए खरीदारी करते समय केवल प्रति 10 ग्राम कीमत पर ध्यान देने के बजाय कुल लागत की तुलना करना अधिक उचित रहता है। प्रमाणित हॉलमार्क वाले आभूषण खरीदना भी उपभोक्ताओं के हित में माना जाता है।
चांदी की कीमतों में आई गिरावट का लाभ उन उद्योगों को भी मिल सकता है जो बड़े पैमाने पर चांदी का उपयोग करते हैं। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, बैटरी और चिकित्सा उपकरण निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में लागत पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि यदि वैश्विक मांग में तेजी आती है तो चांदी की कीमतें फिर से ऊपर जा सकती हैं।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों, केंद्रीय बैंकों की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां स्थिर रहती हैं तो कीमतों में कुछ समय तक नरमी बनी रह सकती है, लेकिन किसी भी बड़े वैश्विक घटनाक्रम की स्थिति में सोना फिर से तेजी पकड़ सकता है।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए सोना केवल निवेश नहीं बल्कि भावनात्मक और सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। यही कारण है कि कीमतों में गिरावट के दौरान बाजार में मांग बढ़ जाती है। दूसरी ओर, कीमतों में तेज उछाल आने पर उपभोक्ता खरीदारी टाल देते हैं और बाजार की गति धीमी पड़ जाती है।
सर्राफा कारोबारियों ने ग्राहकों से अपील की है कि खरीदारी से पहले विभिन्न प्रतिष्ठानों पर कीमतों की तुलना करें, बिल अवश्य लें तथा केवल बीआईएस हॉलमार्क वाले आभूषण ही खरीदें। इससे गुणवत्ता की गारंटी मिलने के साथ भविष्य में पुनर्विक्रय के समय भी बेहतर मूल्य प्राप्त होता है।
लगातार दूसरे दिन आई इस बड़ी गिरावट ने फिलहाल बाजार का माहौल बदल दिया है। जहां उपभोक्ता इसे राहत के रूप में देख रहे हैं, वहीं निवेशक भविष्य की संभावनाओं का आकलन करने में जुटे हैं। आने वाले कुछ दिनों में अंतरराष्ट्रीय संकेत और घरेलू मांग यह तय करेंगे कि सोना-चांदी की कीमतें इसी स्तर पर स्थिर रहेंगी या फिर एक बार फिर तेजी का नया दौर शुरू होगा। फिलहाल इतना तय है कि वर्तमान गिरावट ने खरीदारी की योजना बना रहे लोगों के लिए एक अनुकूल अवसर अवश्य उपलब्ध कराया है।