
भोपाल। मध्यप्रदेश में विश्वस्तरीय सड़क अवसंरचना विकसित करने और प्रदेश के परिवहन तंत्र को अधिक सुदृढ़, आधुनिक एवं आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष महाराष्ट्र अध्ययन यात्रा के दौरान प्राप्त अनुभवों तथा वहां सफलतापूर्वक लागू की गई विभिन्न बेस्ट प्रैक्टिसेज पर आधारित विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस प्रस्तुतीकरण में सड़क अवसंरचना विकास से जुड़े नवीन वित्तीय मॉडल, परियोजना प्रबंधन की आधुनिक कार्यप्रणाली, भूमि अधिग्रहण की प्रभावी व्यवस्था, एसेट मोनेटाइजेशन की रणनीति तथा राज्य के सड़क नेटवर्क को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करने के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान महाराष्ट्र में सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए अपनाई गई वित्तीय व्यवस्थाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। बताया गया कि समयबद्ध परियोजना निर्माण, संसाधनों के प्रभावी उपयोग और निजी एवं सार्वजनिक निवेश के समन्वय के माध्यम से सड़क परियोजनाओं को अधिक गति और आर्थिक मजबूती प्रदान की जा सकती है। प्रस्तुतीकरण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि यदि प्रदेश में नवीन वित्तीय मॉडल अपनाए जाते हैं तो सड़क निर्माण परियोजनाओं की लागत और समय-सीमा दोनों का बेहतर प्रबंधन संभव होगा तथा विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकेगी।
प्रस्तुतीकरण में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं प्रभावी बनाने के लिए महाराष्ट्र में अपनाए गए उपायों की भी जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी भी सड़क परियोजना की सफलता उसके समयबद्ध भूमि अधिग्रहण पर निर्भर करती है। यदि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया व्यवस्थित, पारदर्शी और जनहित को ध्यान में रखकर संचालित की जाए तो परियोजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब से बचा जा सकता है। इस दिशा में आधुनिक तकनीकों और बेहतर प्रशासनिक समन्वय के महत्व पर भी चर्चा हुई।
बैठक में एसेट मोनेटाइजेशन के विषय को भी प्रमुखता से रखा गया। विशेषज्ञों ने बताया कि विकसित सड़क परिसंपत्तियों का प्रभावी उपयोग कर अतिरिक्त वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं, जिनका उपयोग नई सड़क परियोजनाओं और अधोसंरचना विकास में किया जा सकता है। इस प्रकार सड़क निर्माण के लिए केवल पारंपरिक बजटीय संसाधनों पर निर्भर रहने के बजाय वैकल्पिक वित्तीय स्रोतों का भी प्रभावी उपयोग संभव होगा।
रोड नेटवर्क प्लानिंग के संबंध में बताया गया कि किसी भी राज्य का आर्थिक विकास उसके मजबूत परिवहन नेटवर्क पर निर्भर करता है। वैज्ञानिक योजना के आधार पर विकसित सड़क नेटवर्क न केवल यात्रा को सुगम बनाता है बल्कि उद्योग, व्यापार, कृषि, पर्यटन और निवेश गतिविधियों को भी नई गति प्रदान करता है। प्रस्तुतीकरण में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि भविष्य की जनसंख्या वृद्धि, औद्योगिक विस्तार और परिवहन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रोड नेटवर्क की योजना तैयार की जानी चाहिए।
अंतर्राज्यीय सड़क संपर्क को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। बताया गया कि बेहतर सड़क संपर्क से मध्यप्रदेश और पड़ोसी राज्यों के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, माल परिवहन अधिक सुगम होगा तथा औद्योगिक निवेश को नई संभावनाएँ प्राप्त होंगी। इसके साथ ही पर्यटन स्थलों तक पहुँच आसान होने से प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने की संभावना व्यक्त की गई।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि आधुनिक सड़क अवसंरचना केवल यातायात सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक प्रगति का आधार भी बनती है। उत्कृष्ट सड़क नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों को शहरी बाजारों से जोड़ने, किसानों को बेहतर विपणन सुविधाएँ उपलब्ध कराने, औद्योगिक इकाइयों तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों के परिवहन को सरल बनाने तथा शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक सेवाओं तक लोगों की पहुँच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
प्रस्तुतीकरण में यह सुझाव भी सामने आया कि सड़क निर्माण परियोजनाओं में डिजिटल तकनीकों, आधुनिक निगरानी प्रणाली तथा पारदर्शी परियोजना प्रबंधन को बढ़ावा देकर गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित की जा सकती है। इससे परियोजनाओं की लागत पर नियंत्रण रखने के साथ-साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आधुनिक, सुरक्षित और भविष्य उन्मुख सड़क नेटवर्क के विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। बैठक में इस बात पर सहमति व्यक्त की गई कि महाराष्ट्र अध्ययन यात्रा से प्राप्त अनुभवों और सफल कार्यप्रणालियों का मध्यप्रदेश की आवश्यकताओं एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप अध्ययन कर चरणबद्ध रूप से उपयोग किया जाएगा। इससे सड़क परियोजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और प्रदेश की अधोसंरचना को नई मजबूती मिलेगी।
बैठक में इस बात पर भी विश्वास व्यक्त किया गया कि नवीन वित्तीय मॉडल, प्रभावी भूमि अधिग्रहण व्यवस्था, एसेट मोनेटाइजेशन, वैज्ञानिक रोड नेटवर्क प्लानिंग तथा आधुनिक परियोजना प्रबंधन प्रणाली के समन्वित उपयोग से मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में सड़क अवसंरचना विकास के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित करेगा। प्रदेश में विश्वस्तरीय, आधुनिक, टिकाऊ और आत्मनिर्भर सड़क नेटवर्क विकसित करने की दिशा में यह प्रस्तुतीकरण भविष्य की विकास योजनाओं के लिए एक महत्वपूर्ण आधार सिद्ध होगा।









