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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंदसौर के गुरु पूर्णिमा समारोह में की सहभागिता

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उज्जैन/मंदसौर। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मंदसौर में आयोजित गुरु पूर्णिमा समारोह में सहभागिता कर प्रदेशवासियों एवं श्रद्धालुओं को गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित कीं। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि गुरु केवल ज्ञान प्रदान करने वाले शिक्षक नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाले प्रेरणास्रोत और संस्कारों के संवाहक होते हैं। गुरु के मार्गदर्शन से ही व्यक्ति का व्यक्तित्व निखरता है और समाज में सकारात्मक परिवर्तन की आधारशिला तैयार होती है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सनातन परंपरा में गुरु को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु ही व्यक्ति के जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर कर ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं। उनके मार्गदर्शन से मनुष्य केवल शिक्षा ही प्राप्त नहीं करता, बल्कि जीवन के नैतिक मूल्यों, कर्तव्यबोध, अनुशासन और सेवा की भावना को भी आत्मसात करता है। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का पर्व गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पावन अवसर है तथा यह भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु-शिष्य परंपरा का जीवंत प्रतीक है।

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संत-महात्मा, धर्माचार्य, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, विद्यार्थी एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। समारोह में गुरु परंपरा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला गया तथा समाज में ज्ञान, संस्कार और सेवा की भावना को सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि गुरु का सान्निध्य व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देता है और समाज में नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर के समान सम्मान दिया गया है। हमारे शास्त्रों में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप के रूप में वर्णित किया गया है। गुरु के ज्ञान और आशीर्वाद से व्यक्ति अपने जीवन के उद्देश्य को समझता है तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का बेहतर ढंग से निर्वहन करने में सक्षम बनता है। उन्होंने कहा कि महर्षि वेदव्यास द्वारा स्थापित ज्ञान परंपरा आज भी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी धरोहर है और गुरु पूर्णिमा उसी महान परंपरा के प्रति श्रद्धा प्रकट करने का पर्व है।

उन्होंने कहा कि बदलते समय और आधुनिक तकनीक के युग में शिक्षा के अनेक माध्यम विकसित हुए हैं, लेकिन गुरु का स्थान आज भी सर्वोपरि है। डिजिटल संसाधन जानकारी दे सकते हैं, किंतु जीवन के अनुभव, संस्कार, चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास का कार्य गुरु ही करते हैं। गुरु अपने आचरण और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को जीवन की कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव बनाए रखें तथा उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल और सार्थक बनाएं। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक होता है जब उसका उपयोग समाज, राष्ट्र और मानवता की सेवा के लिए किया जाए। गुरु द्वारा दिए गए संस्कार ही व्यक्ति को जिम्मेदार नागरिक बनाते हैं और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देते हैं।

उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा, संस्कृति और भारतीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा से जोड़ने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं में सामाजिक उत्तरदायित्व, अनुशासन और राष्ट्रसेवा की भावना विकसित हो सके।

समारोह के दौरान गुरुजनों का सम्मान किया गया तथा उनके समाज और राष्ट्र निर्माण में योगदान को स्मरण किया गया। विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं का परिचय कराया गया। श्रद्धालुओं ने गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त कर अपने जीवन में सदाचार, सेवा और ज्ञान के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु का सम्मान करना भारतीय संस्कृति का मूल संस्कार है। गुरु ही वह शक्ति हैं जो व्यक्ति के भीतर छिपी संभावनाओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा प्रदान करते हैं। समाज में शिक्षा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने में गुरुजनों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है और आने वाले समय में भी बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार और कृतज्ञता का उत्सव है। यह पर्व हमें अपने जीवन में गुरु के योगदान को स्मरण करने और उनके बताए मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि वे गुरुजनों का सम्मान करें, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात करें तथा समाज में सद्भाव, सेवा और ज्ञान की परंपरा को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

कार्यक्रम का समापन गुरु वंदना और प्रदेश तथा देश की सुख-समृद्धि की मंगलकामनाओं के साथ हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सभी नागरिकों को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएँ देते हुए कामना की कि गुरुजनों का आशीर्वाद सभी के जीवन में ज्ञान, विवेक, उत्तम स्वास्थ्य, सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे तथा समाज में नैतिक मूल्यों, सदाचार और सेवा की भावना निरंतर सुदृढ़ होती रहे।

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