
उज्जैन। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज उज्जैन में नर्मदा परिक्रमावासी परम श्रद्धेय अवधूत सिद्ध महायोगी श्री दादा गुरु जी से आत्मीय भेंट कर उनका स्नेहिल आशीर्वाद प्राप्त किया। यह भेंट श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक भावनाओं से परिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई, जिसमें भारतीय सनातन परंपरा, आध्यात्मिक जीवन मूल्यों तथा लोककल्याण से जुड़े विषयों पर आत्मीय संवाद हुआ।
मुख्यमंत्री ने दादा गुरु जी के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनका आशीर्वाद ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का सान्निध्य समाज को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। संतों का जीवन सेवा, त्याग, तप, करुणा और मानव कल्याण के आदर्शों का प्रतीक होता है तथा उनके विचार समाज में नैतिक मूल्यों, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस अवसर पर नर्मदा परिक्रमा की महान आध्यात्मिक परंपरा का भी उल्लेख किया गया। नर्मदा परिक्रमा भारतीय संस्कृति में श्रद्धा, तप, संयम और आत्मिक साधना का अनुपम उदाहरण मानी जाती है। यह केवल धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के साथ गहरे जुड़ाव का माध्यम भी है। नर्मदा परिक्रमावासी संतों का जीवन समाज को धैर्य, अनुशासन, सेवा और समर्पण की प्रेरणा देता है।
भेंट के दौरान उज्जैन की धार्मिक और सांस्कृतिक महत्ता पर भी चर्चा हुई। महाकाल की नगरी उज्जैन प्राचीन काल से ही धर्म, दर्शन, शिक्षा और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रही है। यहां की संत परंपरा ने भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज में आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश संतों, ऋषियों और आध्यात्मिक विरासत की पावन भूमि है तथा राज्य सरकार इस समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में संतों का मार्गदर्शन समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनके आशीर्वाद और प्रेरणा से समाज में सद्भाव, सेवा, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को नई शक्ति मिलती है। संत समाज सदैव लोककल्याण और मानवता की सेवा का संदेश देता है तथा समाज को एकता और समरसता के सूत्र में बांधने का कार्य करता है।
इस आत्मीय भेंट के दौरान प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति, सामाजिक सद्भाव और जनकल्याण की मंगलकामना की गई। मुख्यमंत्री ने दादा गुरु जी से प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और निरंतर विकास के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया तथा कामना की कि उनकी कृपा से समाज में आध्यात्मिक चेतना, सेवा और सदाचार की भावना निरंतर सुदृढ़ होती रहे।
यह भेंट भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, संत सम्मान और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति आस्था का प्रेरक उदाहरण रही। उपस्थित श्रद्धालुओं ने इसे समाज में सकारात्मक ऊर्जा, सांस्कृतिक चेतना और लोकमंगल की भावना को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया। कार्यक्रम का समापन प्रदेश एवं देश की सुख-समृद्धि, शांति और सर्वजन कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।









