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मैसूरु के विवेक स्मारक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीरामकृष्ण, मां शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद को अर्पित की श्रद्धांजलि, कहा— उनके विचार मानवता को सदैव देते रहेंगे प्रेरणा

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मैसूरु। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्नाटक के मैसूरु स्थित विवेक स्मारक (विवेका स्मारका) पहुंचकर भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महान संत श्रीरामकृष्ण परमहंस, पवित्र माता श्री शारदा देवी तथा स्वामी विवेकानंद को श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने तीनों महान विभूतियों के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि उनके विचार, आदर्श और जीवन-दर्शन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव आशा, आत्मविश्वास और शक्ति का स्रोत बने रहेंगे। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, अध्यात्म, राष्ट्रवाद और सेवा की उस गौरवशाली परंपरा को स्मरण करने का भी अवसर बना, जिसने भारत को विश्व में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि श्रीरामकृष्ण परमहंस का आध्यात्मिक चिंतन, मां शारदा देवी का करुणामय जीवन और स्वामी विवेकानंद का राष्ट्र जागरण का संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना एक शताब्दी पूर्व था। मैसूरु स्थित विवेक स्मारक लंबे समय से भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, विद्यार्थी, शोधकर्ता और पर्यटक पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री ने स्मारक परिसर का अवलोकन किया तथा वहां संचालित आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों की जानकारी भी प्राप्त की। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रसेवा का जो संदेश दिया था, वह आज विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि भारत का युवा स्वामी विवेकानंद के विचारों को अपने जीवन में उतार ले, तो देश को विश्व की अग्रणी शक्ति बनने से कोई नहीं रोक सकता। स्वामी विवेकानंद ने भारतीय संस्कृति, अध्यात्म और ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर सम्मान दिलाया और भारत की आध्यात्मिक शक्ति से पूरी दुनिया को परिचित कराया। उन्होंने कहा कि श्रीरामकृष्ण परमहंस ने अपने जीवन के माध्यम से यह संदेश दिया कि सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानव कल्याण और ईश्वर की प्राप्ति है। उनका जीवन धार्मिक सहिष्णुता, आध्यात्मिक साधना और सार्वभौमिक प्रेम का अद्भुत उदाहरण है। आज जब विश्व अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब श्रीरामकृष्ण के विचार मानवता को शांति, सद्भाव और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाते हैं।
प्रधानमंत्री ने पवित्र माता श्री शारदा देवी को भारतीय नारी शक्ति की महान प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका संपूर्ण जीवन सेवा, त्याग, करुणा और मातृत्व की अद्वितीय मिसाल है। उन्होंने समाज के प्रत्येक व्यक्ति को बिना किसी भेदभाव के अपनाया और प्रेम, धैर्य तथा सहनशीलता का संदेश दिया। आज भी लाखों लोग उनके जीवन से प्रेरणा लेकर समाज सेवा और मानवीय मूल्यों के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की आध्यात्मिक विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी मार्गदर्शक है। विकसित भारत के निर्माण में विज्ञान, तकनीक, नवाचार और आर्थिक प्रगति जितनी आवश्यक है, उतनी ही महत्वपूर्ण हमारी सांस्कृतिक चेतना, नैतिक मूल्य और आध्यात्मिक आधार भी हैं। उन्होंने कहा कि भारत का विकास उसकी सांस्कृतिक आत्मा से जुड़कर ही स्थायी और समावेशी बन सकता है। उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर आशा और विश्वास के साथ देख रही है। योग, आयुर्वेद, भारतीय दर्शन, अध्यात्म और जीवन शैली के प्रति वैश्विक आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। यह भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की शक्ति का प्रमाण है। ऐसे समय में स्वामी विवेकानंद, श्रीरामकृष्ण और मां शारदा देवी के विचार विश्व मानवता के लिए और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे महान संतों और राष्ट्रनिर्माताओं के जीवन का अध्ययन करें तथा उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का कार्य नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सक्रिय भागीदारी से ही विकसित भारत का सपना साकार होगा। स्वामी विवेकानंद ने जिस आत्मविश्वासी, शिक्षित और चरित्रवान युवा भारत की कल्पना की थी, उसे साकार करना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि सेवा, समर्पण और मानवता भारतीय संस्कृति की मूल पहचान हैं। यही मूल्य भारत को विश्व समुदाय में विशिष्ट बनाते हैं। यदि प्रत्येक नागरिक समाज के कमजोर वर्गों की सहायता, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और राष्ट्रहित के कार्यों में अपना योगदान दे, तो भारत विकास की नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि विवेक स्मारक जैसे संस्थान केवल धार्मिक या आध्यात्मिक केंद्र नहीं हैं, बल्कि वे राष्ट्र चेतना के प्रेरणा केंद्र भी हैं। यहां से प्राप्त प्रेरणा समाज में सकारात्मक परिवर्तन, नैतिक मूल्यों के संरक्षण और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मैसूरु में प्रधानमंत्री के इस दौरे को भारतीय आध्यात्मिक विरासत के प्रति सम्मान और राष्ट्र निर्माण में सांस्कृतिक मूल्यों की महत्ता को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण अवसर माना जा रहा है। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संगठनों ने इस अवसर का स्वागत करते हुए कहा कि देश के महान संतों और विचारकों के संदेश को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने पुनः श्रीरामकृष्ण परमहंस, मां शारदा देवी और स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके जीवन से प्राप्त प्रेरणा भारत को विकसित, आत्मनिर्भर, समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से सशक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में सदैव मार्गदर्शन करती रहेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन महान विभूतियों के विचार आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र सेवा, मानव कल्याण, आध्यात्मिक उत्थान और चरित्र निर्माण के लिए निरंतर प्रेरित करते रहेंगे तथा भारत की सनातन सांस्कृतिक परंपरा विश्व मानवता को आशा और शक्ति प्रदान करती रहेगी।
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