
नई दिल्ली/गांधीनगर। देश में नशे के खिलाफ जनजागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देने और युवाओं को विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदार बनाने के उद्देश्य से ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वर्चुअल माध्यम से देशभर के युवाओं, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और लाखों नागरिकों को संबोधित करते हुए नशामुक्त भारत के निर्माण का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश की युवा शक्ति स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और नशामुक्त होगी। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी पूंजी है। यदि युवाओं की ऊर्जा सही दिशा में लगेगी तो भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को निश्चित रूप से प्राप्त करेगा। उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार, समाज और राष्ट्र की प्रगति को प्रभावित करता है। इसलिए नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि नशे की लत व्यक्ति की प्रतिभा, स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को नष्ट कर देती है। अनेक परिवार इस कारण आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट का सामना करते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक, विशेष रूप से युवाओं को नशे से दूर रहकर राष्ट्र निर्माण में अपनी ऊर्जा लगानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि किसी प्रकार का “नशा” जीवन में अपनाना ही है, तो वह राष्ट्र सेवा का नशा, जल संरक्षण का नशा, पर्यावरण बचाने का नशा, स्वच्छता का नशा, गरीबों की सेवा का नशा, बुजुर्गों के सम्मान का नशा और विकसित भारत बनाने का नशा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल और शहीद भगत सिंह जैसे महान व्यक्तित्वों का जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण है।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे सोशल मीडिया, विद्यालयों, महाविद्यालयों और अपने गांव-शहरों में नशा विरोधी जनजागरूकता अभियान चलाएं। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा कम से कम एक व्यक्ति को नशे की लत से बाहर निकालने का संकल्प ले। समाज की यह सामूहिक शक्ति भारत को नशामुक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।उन्होंने कहा कि विकसित भारत का निर्माण केवल आर्थिक विकास से संभव नहीं है। इसके लिए स्वस्थ नागरिक, सशक्त युवा, संस्कारित समाज और सकारात्मक सोच भी उतनी ही आवश्यक है। यदि युवा अपनी शक्ति को शिक्षा, नवाचार, खेल, विज्ञान, कृषि, उद्यमिता और सामाजिक सेवा में लगाएंगे तो भारत विश्व में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण जैसे अभियानों को भी युवाओं के जीवन से जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज लाखों युवा इन अभियानों से जुड़कर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला रहे हैं। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब प्रत्येक युवा अपने जीवन में अनुशासन, स्वास्थ्य, सेवा और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा।
उन्होंने कहा कि नशे के कारोबार से समाज में अपराध, हिंसा और असुरक्षा की भावना भी बढ़ती है। इसलिए नशे के खिलाफ समाज, परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, स्वयंसेवी संगठनों और प्रशासन को मिलकर कार्य करना होगा। युवाओं को ऐसे किसी भी प्रलोभन से बचना चाहिए जो उनके भविष्य को अंधकार की ओर ले जाए।
कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता तथा हजारों विद्यार्थी जुड़े। सभी ने प्रधानमंत्री के आह्वान का समर्थन करते हुए नशामुक्त भारत और विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लिया। इस अवसर पर युवाओं को नशामुक्त जीवन अपनाने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की शपथ भी दिलाई गई।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति के हाथों में है। यदि देश का प्रत्येक युवा नशे से दूर रहकर अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए कार्य करेगा, तो विकसित भारत का लक्ष्य निश्चित रूप से प्राप्त होगा। उन्होंने सभी नागरिकों से आह्वान किया कि वे “नशा मुक्त युवा, विकसित भारत” के इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाकर इसे एक व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप दें, ताकि आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भारत मिल सके।