
भोपाल। राजधानी भोपाल के इंद्रपुरी क्षेत्र में आयोजित ‘इंद्रपुरी चातुर्मास महोत्सव–2026’ का शुभारंभ धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक चेतना और जैन संस्कृति के भव्य वातावरण के बीच हुआ। इस अवसर पर परम पूज्य प्राकृताचार्य 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज के पावन सान्निध्य में मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, समाजजनों, संतों एवं जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर धर्म लाभ प्राप्त किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में वंदन कर प्रदेश, राष्ट्र और समस्त मानव समाज के सुख, शांति एवं समृद्धि की मंगलकामना की। मंगल कलश स्थापना के साथ चातुर्मास महोत्सव का शुभारंभ वैदिक एवं जैन परंपराओं के अनुरूप धार्मिक अनुष्ठानों, मंगलाचरण और भक्तिभाव के वातावरण में हुआ। श्रद्धालुओं ने पूज्य प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज के दिव्य सान्निध्य में धर्मसभा में भाग लिया तथा उनके प्रेरणादायी आशीर्वचनों का श्रवण किया। गुरुदेव ने अपने उद्बोधन में धर्म, संयम, आत्मचिंतन, करुणा, अहिंसा, सदाचार और आत्मकल्याण के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। धर्मसभा को संबोधित करते हुए प्राकृताचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, आत्मनिरीक्षण और जीवन को सकारात्मक दिशा देने का अवसर है। उन्होंने कहा कि मनुष्य यदि अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, क्षमा, त्याग और संयम को अपनाए, तो व्यक्तिगत जीवन के साथ-साथ समाज और राष्ट्र में भी शांति एवं सद्भाव का वातावरण स्थापित हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज के समय में भौतिक प्रगति के साथ आध्यात्मिक उन्नति भी उतनी ही आवश्यक है। आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं के बीच यदि व्यक्ति कुछ समय आत्मचिंतन, ध्यान और धर्म के लिए निकाले, तो उसके जीवन में मानसिक शांति, संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का आह्वान किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में नमन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य समाज को सदैव सही दिशा प्रदान करता है। उनके विचार व्यक्ति को सेवा, सदाचार, अनुशासन और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। धार्मिक आयोजन समाज में समरसता, सद्भाव और नैतिक मूल्यों को मजबूत बनाने का प्रभावी माध्यम होते हैं।
चातुर्मास महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। भक्ति गीतों, मंगल पाठ, स्तवन और आध्यात्मिक प्रवचनों से पूरा वातावरण धर्ममय हो उठा। श्रद्धालुओं ने प्रदेश की सुख-समृद्धि, राष्ट्र की उन्नति, विश्व शांति और मानव कल्याण के लिए सामूहिक प्रार्थना भी की। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत की सनातन और जैन आध्यात्मिक परंपराएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे जीवन को संस्कारित, अनुशासित और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण बनाने का संदेश देती हैं। चातुर्मास के दौरान संत-महात्माओं का प्रवास समाज में नैतिक जागरण, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान करता है। इंद्रपुरी चातुर्मास महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति यह दर्शाती है कि समाज में आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति विश्वास और आस्था आज भी उतनी ही मजबूत है। कार्यक्रम में महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा धर्म, सेवा और संस्कारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। धर्मसभा के समापन पर श्रद्धालुओं ने पूज्य प्राकृताचार्य 108 श्री सुनीलसागर जी महाराज के श्रीचरणों में वंदन करते हुए उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रदेश एवं समाज के सुख, शांति, समृद्धि, सद्भाव और मंगल की कामना की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि पूज्य गुरुदेव के प्रेरणादायी आशीर्वचनों ने उन्हें आत्मिक शांति, आध्यात्मिक ऊर्जा और जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की नई प्रेरणा प्रदान की।
इंद्रपुरी चातुर्मास महोत्सव–2026 का यह आयोजन धार्मिक आस्था, आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर सामने आया। श्रद्धालुओं ने विश्वास व्यक्त किया कि पूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में आयोजित चातुर्मास के विविध कार्यक्रम समाज में नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और आध्यात्मिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करेंगे तथा प्रदेश और राष्ट्र के सर्वांगीण कल्याण के लिए नई प्रेरणा का स्रोत बनेंगे।