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कॉलोनी सेल की शिकायतों का गंभीरता से निराकरण करें अधिकारी, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने दिए निर्देश

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इंदौर। कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा की अध्यक्षता में आरओ बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले में नागरिकों से प्राप्त शिकायतों एवं उनके निराकरण की स्थिति की समीक्षा की गई। बैठक में कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम नागरिकों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ सुना जाए और शिकायतों के निराकरण में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने विशेष रूप से कॉलोनी सेल में दर्ज शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित मामलों की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का मूल उद्देश्य नागरिकों को समय पर राहत उपलब्ध कराना और उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है। नागरिकों द्वारा विभिन्न स्तरों पर प्रस्तुत किए जाने वाले आवेदनों को केवल औपचारिकता के रूप में न लिया जाए, बल्कि प्रत्येक प्रकरण की वास्तविक स्थिति को समझकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए। बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिकायतों के निराकरण के दौरान आवेदकों की बात को गंभीरता से सुना जाए और उपलब्ध दस्तावेजों एवं तथ्यों के आधार पर उचित निर्णय लिया जाए। प्रशासनिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए शिकायत निवारण प्रणाली का प्रभावी होना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को सक्रियता के साथ कार्य करने को कहा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि लंबित शिकायतों की संख्या कम करने के साथ-साथ निराकरण की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि नागरिकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।
एसडीएम एवं तहसीलदार नगर निगम के साथ समन्वय कर सुनें नागरिकों की समस्याएं: कलेक्टर श्री मिश्रा ने सभी अनुविभागीय अधिकारी राजस्व (एसडीएम) एवं तहसीलदारों को निर्देश दिए कि कॉलोनी सेल में दर्ज शिकायतों के मामलों में नगर निगम के अधिकारियों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि कॉलोनियों से संबंधित कई प्रकरणों में राजस्व एवं नगरीय प्रशासन से जुड़े विषय एक-दूसरे से जुड़े होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों का समाधान विभागों के आपसी तालमेल से ही प्रभावी रूप से किया जा सकता है। अधिकारियों को अधिक से अधिक नागरिकों के आवेदन सुनने तथा प्रत्येक शिकायत के तथ्यों की जांच करने के निर्देश दिए गए। नागरिकों को उनकी समस्या के संबंध में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने और नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने पर भी जोर दिया गया। कॉलोनी सेल में आने वाले आवेदनों में नागरिकों की संपत्ति, कॉलोनी से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अन्य स्थानीय समस्याओं से जुड़े विषय हो सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित विभागों की भूमिका स्पष्ट करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी शिकायतकर्ता की समस्या को समझकर उसका व्यावहारिक एवं नियमसम्मत समाधान तलाशें। यदि किसी मामले में तत्काल समाधान संभव नहीं है तो आवेदक को स्थिति की स्पष्ट जानकारी दी जाए। इससे नागरिकों को प्रशासनिक प्रक्रिया के प्रति भरोसा रहेगा और अनावश्यक भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी। नगर निगम और राजस्व अधिकारियों के बीच नियमित समन्वय से ऐसे मामलों के निपटारे में तेजी लाई जा सकती है।
संतुष्टिपूर्वक निराकरण बने प्राथमिकता, शिकायतकर्ता को मिले उचित जानकारी: बैठक में कलेक्टर ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का केवल कागजी निराकरण पर्याप्त नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की समस्या का वास्तविक और संतुष्टि पूर्वक समाधान होना चाहिए। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आवेदन प्राप्त होने के बाद उसकी जांच कर संबंधित पक्षों से आवश्यक जानकारी ली जाए और नियमानुसार कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता को कार्रवाई की स्थिति से अवगत कराने की व्यवस्था भी प्रभावी बनाई जाए। प्रशासन के प्रति आम नागरिकों का विश्वास शिकायत निवारण प्रणाली की प्रभावशीलता से सीधे जुड़ा होता है। यदि किसी नागरिक की शिकायत का समाधान समय पर और निष्पक्ष तरीके से होता है, तो इससे शासन-प्रशासन के प्रति सकारात्मक विश्वास मजबूत होता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिकायतों के निराकरण में अनावश्यक देरी से बचें और जिन प्रकरणों में अन्य विभागों की अनुमति अथवा जानकारी आवश्यक है, उनमें संबंधित विभाग से तत्काल समन्वय करें। उन्होंने लंबित मामलों की समीक्षा कर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने पर भी जोर दिया। अधिकारियों से कहा गया कि नागरिकों को अपने आवेदन की स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालय आने की आवश्यकता न पड़े, इसके लिए सूचना और संवाद की व्यवस्था बेहतर की जाए। साथ ही ऐसे मामलों की पहचान की जाए जिनमें बार-बार शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, ताकि मूल समस्या का स्थायी समाधान किया जा सके।
राजस्व और नगरीय निकाय के बीच बेहतर तालमेल से बढ़ेगी शिकायत निवारण की गति: कॉलोनी सेल से जुड़े मामलों के प्रभावी निराकरण के लिए राजस्व विभाग और नगर निगम के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया गया। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि दोनों विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल से मामलों की समीक्षा करें और अधिकार क्षेत्र से जुड़े विषयों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखें। नागरिकों को विभिन्न विभागों के बीच भटकना न पड़े, इसके लिए अधिकारी आपसी स्तर पर समन्वय स्थापित कर प्रकरण को संबंधित विभाग तक पहुंचाएं। प्रशासनिक व्यवस्था का उद्देश्य नागरिकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुविधाजनक बनाना है। इसी भावना के अनुरूप अधिकारियों को अपने स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए गए। कॉलोनी सेल में प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा कर लंबित प्रकरणों के कारणों की पहचान की जाए और जहां आवश्यक हो, वहां विशेष अभियान चलाकर मामलों का निराकरण किया जा सकता है। कलेक्टर ने अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि कार्रवाई नियमों के अनुरूप हो और किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात न किया जाए। दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर पारदर्शी तरीके से निर्णय लेने से नागरिकों में प्रशासनिक प्रक्रिया के प्रति भरोसा बढ़ता है। इसके साथ ही अधिकारियों को यह भी ध्यान रखना होगा कि शिकायतों का समाधान करते समय व्यापक जनहित और नियमानुसार व्यवस्था दोनों का संतुलन बना रहे। बेहतर समन्वय से न केवल शिकायतों के निपटारे की गति बढ़ेगी, बल्कि भविष्य में उत्पन्न होने वाली समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा।
जनसमस्याओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन पर जोर: बैठक में कलेक्टर श्री प्रियंक मिश्रा ने अधिकारियों को नागरिकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी रवैया अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी जनता से सीधे जुड़े रहते हैं और उनके कार्यों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर पड़ता है। इसलिए प्रत्येक आवेदन को गंभीरता से लेना और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करना आवश्यक है। कलेक्टर ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को अपने-अपने क्षेत्रों में कॉलोनी सेल से संबंधित शिकायतों की स्थिति की समीक्षा करने तथा नगर निगम के साथ मिलकर अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि शिकायतों के निराकरण की गुणवत्ता की निगरानी करें और ऐसे मामलों को प्राथमिकता दें जिनमें नागरिक लंबे समय से समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। प्रशासनिक कार्यवाही में पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही को मजबूत करने पर जोर देते हुए कहा गया कि नागरिकों की संतुष्टि ही शिकायत निवारण व्यवस्था की वास्तविक सफलता है। बैठक में दिए गए निर्देशों का उद्देश्य शिकायतों को लंबित रखने के बजाय उनका तथ्यात्मक, नियमसम्मत और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करना है। राजस्व अधिकारियों और नगर निगम के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर नागरिकों को अधिक प्रभावी सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से प्रकरणों की समीक्षा करते रहें और आवश्यकता के अनुसार संबंधित विभागों के साथ बैठक कर लंबित शिकायतों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करें।
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