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मध्यप्रदेश पुलिस में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: छह निरीक्षकों के तबादले, धार से लेकर सतना और इंदौर तक बदली जिम्मेदारियां

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पुलिस मुख्यालय भोपाल ने जारी किया आदेश, आगामी आदेश तक नवीन इकाइयों में पदस्थ रहेंगे अधिकारी; जिला पुलिस अधीक्षकों को कार्य आवंटन का अधिकार
भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय, भोपाल द्वारा पुलिस स्थापना बोर्ड से अनुमोदन के उपरांत छह शासकीय पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण एवं नवीन पदस्थापना संबंधी आदेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार पुलिस विभाग में पदस्थ निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को प्रशासनिक आवश्यकता एवं विभागीय व्यवस्था के अनुरूप उनके वर्तमान पदस्थापना स्थल से स्थानांतरित करते हुए नवीन इकाइयों में पदस्थ किया गया है। पुलिस मुख्यालय से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संबंधित अधिकारियों को उनके नाम के सामने उल्लेखित नवीन इकाई में आगामी आदेश तक स्थानांतरित कर पदस्थ किया जाता है। आदेश में यह भी कहा गया है कि नवीन जिले अथवा इकाई में पहुंचने के बाद संबंधित अधिकारियों को कार्य आवंटन का निर्णय संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक अथवा इकाई प्रमुख द्वारा किया जाएगा। इस प्रशासनिक फेरबदल में पुलिस प्रशिक्षण संस्थान इंदौर से दो निरीक्षकों को क्रमशः धार और खंडवा भेजा गया है, जबकि नर्मदापुरम, भोपाल, झाबुआ और खरगोन जिलों में पदस्थ निरीक्षकों को भी अलग-अलग जिलों में नई जिम्मेदारी दी गई है। आदेश के अनुसार निरीक्षक प्रह्लाद डिंडोर को पीटीसी इंदौर से जिला धार, मिकीता चौहान को पीटीसी इंदौर से जिला खंडवा, गिरीश त्रिपाठी को जिला नर्मदापुरम से जिला भोपाल ग्रामीण, कृष्णदेव सिंह कुशवाह को जिला भोपाल नगरीय से जिला सतना, दिनेश शर्मा को जिला झाबुआ से जिला बुरहानपुर तथा इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को जिला खरगोन से जिला इंदौर नगरीय में पदस्थ किया गया है। इस आदेश के बाद संबंधित जिलों में पुलिस निरीक्षक स्तर पर कार्य व्यवस्था में बदलाव होना तय माना जा रहा है। हालांकि आदेश में किसी अधिकारी के स्थानांतरण का व्यक्तिगत कारण उल्लेखित नहीं किया गया है, इसलिए इसे विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था और आवश्यकता के अनुरूप जारी किया गया आदेश माना जा रहा है।
छह निरीक्षकों की नई पदस्थापना से बदलेगी पुलिस प्रशासन की कार्य व्यवस्था
पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी आदेश में छह अधिकारियों की नवीन पदस्थापना का उल्लेख किया गया है। यह स्थानांतरण अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों को प्रभावित करने वाला है। एक ओर जहां मालवा और निमाड़ क्षेत्र के जिलों में पुलिस अधिकारियों की नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं, वहीं भोपाल ग्रामीण, सतना और इंदौर नगरीय क्षेत्र में भी निरीक्षक स्तर पर बदलाव किया गया है। विभागीय दृष्टि से निरीक्षक का पद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को थाना प्रभारी, अपराध शाखा, जांच संबंधी दायित्व, कानून-व्यवस्था, विशेष अभियानों और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सौंपे गए अन्य प्रशासनिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है। ऐसे में एक जिले से दूसरे जिले में निरीक्षक स्तर के अधिकारियों का स्थानांतरण केवल पदस्थापना बदलने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि संबंधित जिले की पुलिस कार्यप्रणाली में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। हालांकि वास्तविक जिम्मेदारी किस अधिकारी को दी जाएगी, यह संबंधित जिले में पहुंचने के बाद पुलिस अधीक्षक द्वारा निर्धारित किया जाएगा। आदेश में इसी बात को स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि जिले के अंदर कार्य आवंटन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। इसका अर्थ है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद अधिकारी संबंधित नवीन इकाई में आमद देंगे और इसके बाद वहां की स्थानीय प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें दायित्व सौंपे जाएंगे। इस प्रक्रिया में संबंधित जिले की कानून-व्यवस्था, अपराध की स्थिति, पुलिस बल की उपलब्धता, थाना क्षेत्रों की आवश्यकताएं और विभागीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखा जा सकता है। छह अधिकारियों के स्थानांतरण से मध्यप्रदेश पुलिस की अलग-अलग इकाइयों के बीच प्रशासनिक समन्वय और मानव संसाधन के पुनर्विन्यास की तस्वीर भी सामने आती है। विशेष रूप से पीटीसी इंदौर से दो निरीक्षकों को जिला पुलिस इकाइयों में भेजे जाने से प्रशिक्षण एवं जिला पुलिस व्यवस्था के बीच अधिकारियों की तैनाती में बदलाव हुआ है। वहीं जिला स्तर पर कार्यरत चार निरीक्षकों को अन्य जिलों में भेजे जाने से संबंधित जिलों में भी नई कार्य व्यवस्था तैयार करनी होगी।
प्रह्लाद डिंडोर को धार, पीटीसी इंदौर से जिला पुलिस में नई जिम्मेदारी
पुलिस मुख्यालय के आदेश की पहली प्रविष्टि में निरीक्षक प्रह्लाद डिंडोर का नाम शामिल है। आदेश के अनुसार उनकी वर्तमान पदस्थापना पीटीसी इंदौर में थी, जबकि अब उन्हें जिला धार में पदस्थ किया गया है। धार मालवा क्षेत्र का महत्वपूर्ण जिला है और यहां ग्रामीण एवं शहरी दोनों प्रकार के पुलिस प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां रहती हैं। किसी अधिकारी की प्रशिक्षण इकाई से जिला पुलिस इकाई में पदस्थापना होने पर उसके कार्यक्षेत्र की प्रकृति में भी बदलाव आता है। प्रशिक्षण संस्थान में जहां पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण और विभागीय दक्षता से संबंधित दायित्व प्रमुख होते हैं, वहीं जिला पुलिस में कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की जांच, थाना स्तर की निगरानी, आम नागरिकों से संबंधित पुलिस सेवाएं तथा वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुरूप विभिन्न अभियानों में भागीदारी जैसे कार्य सामने आते हैं। प्रह्लाद डिंडोर को जिला धार भेजे जाने के बाद यह तय किया जाएगा कि उन्हें किस थाना, शाखा अथवा अन्य पुलिस इकाई में दायित्व दिया जाता है। आदेश में यह जिम्मेदारी पहले से निर्धारित नहीं की गई है और स्पष्ट किया गया है कि जिले के अंदर कार्य आवंटन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। इसलिए नवीन पदस्थापना का अगला चरण धार में आमद के बाद पूरा होगा। विभागीय आदेश के अनुसार यह पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। धार जैसे बड़े जिले में निरीक्षक स्तर के अधिकारी की तैनाती कानून-व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की नियमित कार्यप्रणाली में उपयोगी हो सकती है। हालांकि किसी अधिकारी की कार्यक्षमता अथवा उनके आगामी दायित्व के बारे में अंतिम तस्वीर संबंधित पुलिस अधीक्षक द्वारा कार्य आवंटन किए जाने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मिकीता चौहान को खंडवा भेजा गया
आदेश में दूसरी महत्वपूर्ण पदस्थापना निरीक्षक मिकीता चौहान की है। वर्तमान में वे पीटीसी इंदौर में पदस्थ थीं। पुलिस मुख्यालय ने उन्हें जिला खंडवा स्थानांतरित किया है। खंडवा मध्यप्रदेश के महत्वपूर्ण जिलों में शामिल है और यहां जिला पुलिस के सामने कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अपराध नियंत्रण, यातायात व्यवस्था, ग्रामीण क्षेत्रों में पुलिसिंग और नागरिक सुरक्षा से संबंधित विभिन्न जिम्मेदारियां रहती हैं। पीटीसी इंदौर से जिला खंडवा में पदस्थापना के बाद निरीक्षक मिकीता चौहान को जिले की आवश्यकता के अनुरूप जिम्मेदारी दी जाएगी। आदेश में इस बात को स्पष्ट रखा गया है कि जिले के भीतर कार्य आवंटन का निर्णय जिला पुलिस अधीक्षक करेंगे। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि उन्हें किसी विशेष थाना अथवा शाखा की जिम्मेदारी दी जाएगी। प्रशासनिक दृष्टि से यह बदलाव पुलिस अधिकारियों के उपलब्ध मानव संसाधन को आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग इकाइयों में लगाने की प्रक्रिया का हिस्सा है। महिला निरीक्षक की जिला पुलिस में पदस्थापना से पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं में उपलब्ध अधिकारियों का बेहतर उपयोग किए जाने की संभावना रहती है। हालांकि किसी अधिकारी की पदस्थापना को किसी विशेष घटना या मामले से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा, क्योंकि जारी आदेश में ऐसा कोई कारण उल्लेखित नहीं किया गया है। आदेश का मूल उद्देश्य अधिकारियों की नवीन पदस्थापना तय करना है। खंडवा में आमद के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन उनके कार्यक्षेत्र का निर्धारण करेगा और इसके बाद वे संबंधित दायित्वों का निर्वहन करेंगी।
गिरीश त्रिपाठी की नर्मदापुरम से भोपाल ग्रामीण पदस्थापना
सूची में तीसरे क्रम पर निरीक्षक गिरीश त्रिपाठी का नाम है। वर्तमान में उनकी पदस्थापना जिला नर्मदापुरम में थी। नए आदेश के अनुसार उन्हें जिला भोपाल ग्रामीण में स्थानांतरित किया गया है। भोपाल ग्रामीण पुलिस इकाई का स्वरूप राजधानी के नगरीय क्षेत्र से अलग है। ग्रामीण क्षेत्र में विस्तृत भौगोलिक सीमा, विभिन्न थाना क्षेत्र, गांवों में कानून-व्यवस्था, ग्रामीण अपराधों की रोकथाम, स्थानीय स्तर पर विवादों का निराकरण और नागरिकों से सीधे संपर्क जैसी जिम्मेदारियां पुलिस प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण रहती हैं। ऐसे में निरीक्षक स्तर के अधिकारी की पदस्थापना के बाद उन्हें जिले की आवश्यकता के अनुसार किसी थाना या अन्य शाखा का दायित्व दिया जा सकता है। आदेश में यह भी उल्लेखित है कि नवीन जिले में कार्य आवंटन संबंधित जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। इसलिए गिरीश त्रिपाठी की वास्तविक जिम्मेदारी भोपाल ग्रामीण पहुंचने के बाद तय होगी। नर्मदापुरम से भोपाल ग्रामीण में स्थानांतरण से अधिकारी के कार्यक्षेत्र और स्थानीय प्रशासनिक परिस्थितियों में बदलाव आएगा। पुलिस विभाग में स्थानांतरण सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और समय-समय पर अधिकारियों की पदस्थापना विभागीय आवश्यकताओं के अनुसार की जाती है। जारी आदेश भी इसी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है। आदेश में किसी विशेष अपराध, जांच या शिकायत को स्थानांतरण का आधार नहीं बताया गया है। इसलिए इस पदस्थापना को लेकर किसी प्रकार की अटकल के बजाय आधिकारिक आदेश में दर्ज तथ्यों पर ही ध्यान देना उचित होगा।
कृष्णदेव सिंह कुशवाह को सतना भेजा गया
पुलिस मुख्यालय के आदेश में चौथे क्रम पर निरीक्षक कृष्णदेव सिंह कुशवाह का नाम दर्ज है। उनकी वर्तमान पदस्थापना जिला भोपाल नगरीय में थी। उन्हें अब जिला सतना में पदस्थ किया गया है। सतना मध्यप्रदेश के विंध्य क्षेत्र का महत्वपूर्ण जिला है और पुलिस प्रशासन की दृष्टि से इसका अपना विशेष महत्व है। जिले में शहरी एवं ग्रामीण दोनों क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था संचालित होती है। विभिन्न थाना क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जांच, यातायात, जनसुरक्षा और पुलिस-जन संवाद जैसी गतिविधियों के लिए निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। भोपाल नगरीय क्षेत्र से सतना जिला पुलिस में पदस्थापना के बाद कृष्णदेव सिंह कुशवाह को किस प्रकार का दायित्व दिया जाएगा, इसका निर्धारण जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। आदेश में साफ कहा गया है कि जिले के अंदर कार्य आवंटन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। इस कारण वर्तमान आदेश को अधिकारी की नवीन जिला पदस्थापना के रूप में देखा जाना चाहिए, जबकि उनके विशिष्ट कार्यक्षेत्र की जानकारी बाद की प्रशासनिक प्रक्रिया से सामने आएगी। भोपाल नगरीय पुलिस से सतना जिला पुलिस में स्थानांतरण के कारण अधिकारी के कार्य वातावरण में स्वाभाविक रूप से परिवर्तन आएगा। राजधानी के नगरीय पुलिस तंत्र और सतना की जिला पुलिस व्यवस्था की आवश्यकताएं अलग-अलग होती हैं। नई पदस्थापना पर अधिकारी को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार कार्य करना होगा। सतना जिले में पुलिस प्रशासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप उन्हें जो भी दायित्व सौंपा जाएगा, उसका निर्वहन वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में किया जाएगा।
दिनेश शर्मा अब बुरहानपुर जिले में संभालेंगे जिम्मेदारी
पांचवें क्रम में निरीक्षक दिनेश शर्मा का नाम है। वर्तमान में वे जिला झाबुआ में पदस्थ थे। पुलिस मुख्यालय ने उनका स्थानांतरण जिला बुरहानपुर किया है। झाबुआ से बुरहानपुर तक भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों में अंतर होने के कारण नवीन पदस्थापना अधिकारी के लिए नए प्रशासनिक वातावरण में काम करने का अवसर होगी। बुरहानपुर जिले की पुलिस व्यवस्था में भी कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, जांच, यातायात प्रबंधन, नागरिक सुरक्षा और थाना स्तर पर पुलिस सेवाओं की जिम्मेदारियां शामिल हैं। पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार दिनेश शर्मा को नवीन जिले में पदस्थ किया गया है और वहां पहुंचने के बाद जिला पुलिस अधीक्षक उनके कार्य का निर्धारण करेंगे। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल जिला बदलने से किसी अधिकारी की अंतिम जिम्मेदारी तय नहीं होती। पुलिस अधीक्षक स्थानीय आवश्यकता के अनुसार अधिकारी को थाना, अपराध शाखा या अन्य प्रशासनिक जिम्मेदारी दे सकते हैं। झाबुआ में कार्य करने के बाद बुरहानपुर में पदस्थापना अधिकारी के लिए अलग क्षेत्रीय परिस्थितियों में कार्य करने का अवसर भी होगी। पुलिस विभाग में अधिकारियों का विभिन्न जिलों में अनुभव प्रशासनिक दृष्टि से उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इससे उन्हें अलग-अलग प्रकार की कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग चुनौतियों को समझने का अवसर मिलता है। हालांकि अधिकारी को कौन-सा दायित्व मिलेगा और उनकी प्राथमिकताएं क्या होंगी, इसकी जानकारी संबंधित जिला पुलिस प्रशासन द्वारा कार्य आवंटन के बाद ही सामने आएगी।
इंद्रेश कुमार त्रिपाठी की खरगोन से इंदौर नगरीय पदस्थापना
छठे और अंतिम क्रम में निरीक्षक इंद्रेश कुमार त्रिपाठी का नाम शामिल है। वर्तमान में वे जिला खरगोन में पदस्थ थे। आदेश के अनुसार उन्हें जिला इंदौर नगरीय में पदस्थ किया गया है। इंदौर प्रदेश का प्रमुख महानगरीय क्षेत्र है और यहां पुलिस व्यवस्था का स्वरूप अन्य जिला इकाइयों की तुलना में अधिक व्यापक एवं बहुआयामी है। महानगरीय पुलिसिंग में यातायात नियंत्रण, अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी, नागरिक शिकायतों का निराकरण तथा विभिन्न विशेष अभियानों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण रहती है। खरगोन जैसे जिला क्षेत्र से इंदौर नगरीय पुलिस इकाई में पदस्थापना के बाद इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को महानगरीय पुलिस व्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप दायित्व सौंपा जा सकता है। हालांकि आदेश में उनका विशिष्ट पद अथवा थाना निर्धारित नहीं किया गया है। नवीन पदस्थापना पर आमद के बाद पुलिस प्रशासन उनके अनुभव और उपलब्ध पदों के आधार पर कार्य आवंटन करेगा। इंदौर में पुलिस अधिकारियों की तैनाती के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा नागरिकों को बेहतर पुलिस सेवा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण दायित्व होता है। इस दृष्टि से निरीक्षक स्तर पर हुआ यह स्थानांतरण इंदौर नगरीय पुलिस की कार्य व्यवस्था में भी बदलाव लाएगा।
आदेश में प्रशासनिक प्रक्रिया का भी उल्लेख
पुलिस मुख्यालय के आदेश में केवल छह अधिकारियों की सूची ही नहीं दी गई है, बल्कि उनके स्थानांतरण के बाद अपनाई जाने वाली प्रशासनिक प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है। आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों के नवीन जिले में पहुंचने के बाद जिले के अंदर कार्य आवंटन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। यह प्रावधान पुलिस प्रशासन में महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि जिला पुलिस अधीक्षक को स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अधिकारियों की तैनाती और जिम्मेदारी तय करने का अधिकार रहता है। किसी जिले में एक ही पद के लिए कई प्रकार की जिम्मेदारियां उपलब्ध हो सकती हैं। कुछ अधिकारी थाना स्तर पर कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं, जबकि किसी अन्य अधिकारी को अपराध शाखा, विशेष शाखा, जांच या अन्य प्रशासनिक कार्य दिया जा सकता है। इसलिए मुख्यालय द्वारा जिला पदस्थापना तय करने के बाद स्थानीय स्तर पर कार्य आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाती है। आदेश में पुराने संदर्भों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें मध्यप्रदेश शासन, गृह विभाग के पत्र क्रमांक एफ-1-73/1998/बी-2/दो, दिनांक 14 फरवरी 2007 तथा पुलिस मुख्यालय भोपाल के पत्र क्रमांक पुमु/1/मापुसे/1/379/2007, दिनांक 19 फरवरी 2007 के पालन का निर्देश दिया गया है। इस तरह आदेश में स्थानांतरण की प्रशासनिक प्रक्रिया को पूर्व में जारी विभागीय निर्देशों से भी जोड़ा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि स्थानांतरण आदेश केवल अधिकारियों की सूची जारी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि संबंधित विभागीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए नई पदस्थापना लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
सामान्य प्रशासन विभाग के स्थानांतरण नीति 2026 का संदर्भ
आदेश में मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश क्रमांक GAD/4/0001/2026-GAD-9-01, भोपाल, दिनांक 22 मई 2026 का भी उल्लेख किया गया है। आदेश में कहा गया है कि स्थानांतरण नीति 2026 के बिंदु क्रमांक 43 के अनुसार अधिकारियों को समायोजित किया जाए। इससे यह संकेत मिलता है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी पदस्थापना आदेश को प्रदेश की वर्तमान स्थानांतरण नीति के प्रावधानों के अनुरूप लागू किया जाना है। स्थानांतरण नीति का उद्देश्य सरकारी विभागों में अधिकारियों और कर्मचारियों की पदस्थापना से संबंधित प्रशासनिक व्यवस्था को निर्धारित करना होता है। पुलिस विभाग में यह प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि कानून-व्यवस्था से जुड़े पदों पर अधिकारियों की उपलब्धता और तैनाती का सीधा संबंध विभागीय कामकाज से रहता है। आदेश में नीति के संदर्भ को शामिल किए जाने से संबंधित जिला पुलिस प्रशासन को नवीन पदस्थापनाओं को लागू करते समय निर्धारित प्रशासनिक नियमों का पालन करना होगा। इसके अलावा आदेश में निलंबित अधिकारियों के संबंध में भी विशेष निर्देश दिया गया है। यदि कोई संबंधित अधिकारी निलंबन में हो तो उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाए और इसकी सूचना पुलिस मुख्यालय को दी जाए। यह निर्देश प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, क्योंकि निलंबन की स्थिति में सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया स्वतः लागू नहीं होती और संबंधित अधिकारी की सेवा स्थिति के अनुरूप आगे की कार्रवाई आवश्यक होती है।
पुलिस मुख्यालय के आदेश से क्या बदलेगा?
छह निरीक्षकों के स्थानांतरण से मध्यप्रदेश के कई जिलों में पुलिस प्रशासन की कार्य व्यवस्था में परिवर्तन होगा। हालांकि यह बदलाव केवल छह पदों तक सीमित दिखाई देता है, लेकिन पुलिस प्रशासन में निरीक्षक स्तर के अधिकारी कई महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालते हैं। ऐसे में एक अधिकारी के स्थानांतरण के बाद उनके वर्तमान जिले में भी वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ती है और नवीन जिले में भी उनके लिए कार्य निर्धारित करना होता है। प्रशासनिक दृष्टि से स्थानांतरण का उद्देश्य अधिकारियों की उपलब्धता को विभागीय आवश्यकता के अनुरूप व्यवस्थित करना हो सकता है। आदेश में किसी अधिकारी के स्थानांतरण के संबंध में व्यक्तिगत टिप्पणी या आरोप का उल्लेख नहीं है। इसलिए इसे नियमित प्रशासनिक आदेश के रूप में देखा जाना चाहिए। धार, खंडवा, भोपाल ग्रामीण, सतना, बुरहानपुर और इंदौर नगरीय पुलिस इकाइयों में इन अधिकारियों की नवीन पदस्थापना के बाद संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों द्वारा आगे की कार्यवाही की जाएगी। अधिकारियों की आमद के बाद उनके कार्यक्षेत्र निर्धारित होने पर स्थानीय पुलिस व्यवस्था में उनकी भूमिका स्पष्ट होगी। इससे संबंधित जिलों में पुलिस अधिकारियों के बीच कार्य का पुनर्वितरण भी हो सकता है। पुलिस प्रशासन में इस प्रकार के बदलाव समय-समय पर विभागीय आवश्यकता, उपलब्ध पदों, प्रशासनिक संतुलन और स्थानांतरण नीति के अनुसार किए जाते हैं।
एक आदेश, छह जिले और अलग-अलग प्रशासनिक प्राथमिकताएं
इस आदेश की खास बात यह है कि छह अधिकारियों को छह अलग-अलग पुलिस इकाइयों में पदस्थ किया गया है। प्रह्लाद डिंडोर को धार, मिकीता चौहान को खंडवा, गिरीश त्रिपाठी को भोपाल ग्रामीण, कृष्णदेव सिंह कुशवाह को सतना, दिनेश शर्मा को बुरहानपुर और इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को इंदौर नगरीय भेजा गया है। इससे प्रदेश के पश्चिमी, मध्य और विंध्य क्षेत्र तक पुलिस अधिकारियों का प्रशासनिक स्थानांतरण दिखाई देता है। प्रत्येक जिले की अपनी अलग पुलिसिंग आवश्यकताएं होती हैं। धार और खंडवा में जिला पुलिस की प्राथमिकताएं अलग हो सकती हैं, जबकि भोपाल ग्रामीण में राजधानी से जुड़े ग्रामीण क्षेत्रों की पुलिस व्यवस्था की अपनी चुनौतियां हैं। सतना में विंध्य क्षेत्र की परिस्थितियां और बुरहानपुर में सीमावर्ती तथा ऐतिहासिक क्षेत्र की पुलिसिंग का अपना स्वरूप है। वहीं इंदौर नगरीय क्षेत्र में महानगरीय पुलिस व्यवस्था और बड़े शहर से जुड़े कानून-व्यवस्था संबंधी दायित्व अधिक व्यापक होते हैं। इसलिए छह अधिकारियों की नई पदस्थापना के बाद प्रत्येक इकाई में उनके अनुभव का उपयोग स्थानीय जरूरतों के अनुसार किया जाना महत्वपूर्ण होगा। हालांकि अंतिम रूप से उनकी जिम्मेदारी जिला पुलिस अधीक्षक के कार्य आवंटन आदेश से ही स्पष्ट होगी।
विभागीय दृष्टि से महत्वपूर्ण है कार्य आवंटन
स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण संबंधित अधिकारियों की आमद और कार्य आवंटन है। पुलिस मुख्यालय ने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिले के अंदर कार्य आवंटन जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि मुख्यालय ने अधिकारी की नवीन इकाई निर्धारित कर दी है, लेकिन उस इकाई के अंदर उनका कार्यक्षेत्र तय करने का दायित्व स्थानीय पुलिस नेतृत्व को दिया गया है। यह व्यवस्था पुलिस प्रशासन को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अधिकारी उपलब्ध कराने में मदद करती है। उदाहरण के लिए किसी जिले में अपराध शाखा में अधिकारी की आवश्यकता अधिक हो सकती है, तो किसी अन्य जिले में थाना स्तर पर अतिरिक्त निरीक्षक की जरूरत हो सकती है। जिला पुलिस अधीक्षक स्थानीय अपराध की स्थिति, उपलब्ध बल, थाना क्षेत्रों की जरूरत, कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक प्राथमिकताओं का आकलन कर अधिकारियों को जिम्मेदारी दे सकते हैं। इसलिए इन छह अधिकारियों की नई पदस्थापना का वास्तविक प्रभाव उनके कार्य आवंटन के बाद सामने आएगा। फिलहाल पुलिस मुख्यालय के आदेश से केवल नई जिला या इकाई पदस्थापना सुनिश्चित हुई है।
आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी पदस्थापना
आदेश की भाषा के अनुसार अधिकारियों को नवीन इकाई में आगामी आदेश तक पदस्थ किया गया है। इसका अर्थ है कि वर्तमान आदेश के आधार पर संबंधित अधिकारी नई इकाई में कार्यभार ग्रहण करेंगे और आगे यदि पुलिस मुख्यालय अथवा सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई नया आदेश जारी होता है तो उसके अनुसार आगे की व्यवस्था की जा सकती है। सरकारी प्रशासन में इस प्रकार के आदेश सामान्य रूप से विभागीय कार्य व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए जारी किए जाते हैं। पुलिस विभाग में अधिकारियों की तैनाती समय-समय पर प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए वर्तमान आदेश को एक प्रभावी प्रशासनिक पदस्थापना आदेश के रूप में देखा जाना चाहिए। अधिकारियों को आदेश के अनुरूप नवीन पदस्थापना पर पहुंचना होगा और वहां वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार कार्य करना होगा।
आम नागरिकों के लिए क्या मायने रखता है?
पुलिस विभाग में होने वाले प्रशासनिक बदलावों का अप्रत्यक्ष प्रभाव आम नागरिकों की पुलिस सेवाओं पर भी पड़ता है। निरीक्षक स्तर के अधिकारी थाना व्यवस्था, शिकायतों की सुनवाई, अपराध की जांच, कानून-व्यवस्था और पुलिसकर्मियों के कामकाज की निगरानी जैसे दायित्व निभा सकते हैं। इसलिए किसी नए अधिकारी के आने के बाद संबंधित थाना या शाखा में कार्यशैली में बदलाव दिखाई दे सकता है। हालांकि नागरिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पुलिस सेवाएं नियम और कानून के अनुसार लगातार उपलब्ध रहें। अधिकारी का स्थानांतरण होने के बावजूद पुलिस की संस्थागत जिम्मेदारियां जारी रहती हैं। नए अधिकारी को अपने क्षेत्र की परिस्थितियों को समझकर काम करना होता है। इसमें स्थानीय पुलिसकर्मियों, वरिष्ठ अधिकारियों और आम नागरिकों के साथ समन्वय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किसी अधिकारी को किस प्रकार की जिम्मेदारी मिलेगी, यह कार्य आवंटन के बाद तय होने के कारण नागरिकों को भी आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।
आदेश में किसी विवाद या आरोप का उल्लेख नहीं
पुलिस मुख्यालय के उपलब्ध आदेश में छह अधिकारियों के स्थानांतरण का उल्लेख है, लेकिन किसी अधिकारी के विरुद्ध शिकायत, जांच, अनुशासनात्मक कार्रवाई या अन्य विवाद का उल्लेख नहीं किया गया है। इसलिए इस प्रशासनिक बदलाव को लेकर बिना आधिकारिक पुष्टि के किसी प्रकार का कारण जोड़ना उचित नहीं होगा। समाचार रिपोर्ट में भी यही तथ्य प्रमुख रूप से रखा जाना चाहिए कि पुलिस स्थापना बोर्ड की स्वीकृति के बाद अधिकारियों की नवीन पदस्थापना की गई है। प्रशासनिक आदेशों के संबंध में खबर प्रकाशित करते समय अधिकारियों के नाम, वर्तमान पदस्थापना और नवीन पदस्थापना की जानकारी सही रखना महत्वपूर्ण होता है। इसी आधार पर वर्तमान आदेश में दर्ज छह नामों और उनके स्थानांतरण स्थलों को सामने रखा जा रहा है।
छह अधिकारियों की पदस्थापना एक नजर में
क्रम
अधिकारी
पद
वर्तमान पदस्थापना
नवीन पदस्थापना
1
प्रह्लाद डिंडोर
निरीक्षक
पीटीसी इंदौर
जिला धार
2
मिकीता चौहान
निरीक्षक
पीटीसी इंदौर
जिला खंडवा
3
गिरीश त्रिपाठी
निरीक्षक
जिला नर्मदापुरम
जिला भोपाल ग्रामीण
4
कृष्णदेव सिंह कुशवाह
निरीक्षक
जिला भोपाल नगरीय
जिला सतना
5
दिनेश शर्मा
निरीक्षक
जिला झाबुआ
जिला बुरहानपुर
6
इंद्रेश कुमार त्रिपाठी
निरीक्षक
जिला खरगोन
जिला इंदौर नगरीय
पुलिस मुख्यालय ने दिए कार्यमुक्ति और आमद से जुड़े निर्देश
स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद संबंधित अधिकारियों को उनकी वर्तमान इकाइयों से कार्यमुक्त किए जाने और नवीन इकाई में आमद की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आदेश में प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की बात कही गई है। संबंधित अधिकारी जब नवीन जिले में पहुंचेंगे तो वहां उनकी आमद दर्ज की जाएगी। इसके बाद जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा उन्हें कार्य आवंटित किया जाएगा। पुलिस विभाग में यह प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि केवल स्थानांतरण आदेश जारी होना पर्याप्त नहीं होता; अधिकारी को नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण करना होता है। इसके बाद ही वे नवीन इकाई की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनते हैं। आदेश में निलंबित अधिकारी के संबंध में विशेष प्रावधान होने से यह भी स्पष्ट है कि विभाग ने स्थानांतरण लागू करते समय सेवा स्थिति को ध्यान में रखने का निर्देश दिया है। यदि कोई अधिकारी निलंबित स्थिति में हो तो उसे कार्यमुक्त नहीं किया जाना है और पुलिस मुख्यालय को इसकी सूचना दी जानी है।
प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश
पुलिस बल में अधिकारियों की संख्या और उपलब्ध पदों के बीच संतुलन बनाए रखना किसी भी राज्य के लिए महत्वपूर्ण प्रशासनिक आवश्यकता है। अलग-अलग जिलों में अपराध और कानून-व्यवस्था की परिस्थितियां अलग होती हैं। ऐसे में अधिकारियों को आवश्यकता के अनुसार स्थानांतरित करना विभागीय प्रबंधन का हिस्सा है। इस आदेश में भी प्रशिक्षण इकाई, जिला पुलिस और नगरीय पुलिस इकाई के बीच अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। पीटीसी इंदौर से दो अधिकारियों को जिला पुलिस में भेजा गया है। दूसरी ओर नर्मदापुरम, भोपाल नगरीय, झाबुआ और खरगोन से अधिकारियों को अलग-अलग जिलों में भेजा गया है। इससे पुलिस बल की उपलब्धता का पुनर्संतुलन किया जा सकता है। हालांकि यह कहना कि किसी एक जिले में विशेष समस्या के कारण अधिकारी भेजे गए हैं, आधिकारिक आदेश में उल्लेखित नहीं होने के कारण उचित नहीं होगा। समाचार का आधार केवल जारी प्रशासनिक आदेश ही होना चाहिए।
नवीन पदस्थापना के बाद अधिकारियों के सामने नई चुनौतियां
हर जिले में पुलिसिंग की अपनी अलग आवश्यकताएं होती हैं। नवीन पदस्थापना पर पहुंचने वाले निरीक्षकों के सामने सबसे पहली चुनौती स्थानीय पुलिस व्यवस्था को समझना होती है। थाना क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, अपराध का स्वरूप, पुलिस बल की उपलब्धता, स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय और नागरिकों की अपेक्षाओं को समझना किसी भी नए अधिकारी के लिए आवश्यक होता है। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश के अनुसार प्राथमिकताएं तय की जाती हैं। धार में पदस्थ होने वाले प्रह्लाद डिंडोर और खंडवा में पदस्थ होने वाली मिकीता चौहान को स्थानीय पुलिस व्यवस्था से तालमेल स्थापित करना होगा। गिरीश त्रिपाठी को भोपाल ग्रामीण की परिस्थितियों में काम करना होगा, जबकि कृष्णदेव सिंह कुशवाह सतना जिले में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। दिनेश शर्मा के लिए बुरहानपुर की पुलिस व्यवस्था नया कार्यक्षेत्र होगी और इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को इंदौर नगरीय पुलिस के व्यापक तंत्र में काम करना होगा। इन सभी अधिकारियों का कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारी उनके संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों द्वारा तय की जाएगी।
पुलिस-जन संवाद पर भी रहेगा ध्यान
नई पदस्थापना पर आने वाले अधिकारियों के लिए पुलिस-जन संवाद भी महत्वपूर्ण रहेगा। वर्तमान समय में नागरिक पुलिस से त्वरित और प्रभावी सेवा की अपेक्षा रखते हैं। शिकायतों का समय पर निराकरण, अपराध की जांच में पारदर्शिता, कानून-व्यवस्था की स्थिति में त्वरित कार्रवाई और नागरिकों के साथ संवेदनशील व्यवहार पुलिस व्यवस्था की प्रमुख अपेक्षाओं में शामिल हैं। निरीक्षक स्तर के अधिकारी थाना एवं शाखा स्तर पर इन प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए नई पदस्थापना के बाद अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप कार्यप्रणाली विकसित करेंगे। हालांकि उनकी प्राथमिकताएं और दायित्व संबंधित पुलिस अधीक्षक के निर्देशों के आधार पर तय होंगे।
इंदौर नगरीय में बढ़ेगा नया प्रशासनिक अनुभव
छह स्थानांतरणों में इंद्रेश कुमार त्रिपाठी का खरगोन से इंदौर नगरीय स्थानांतरण विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि ग्रामीण/जिला पुलिस व्यवस्था से महानगरीय पुलिस व्यवस्था में कार्यक्षेत्र बदलता है। इंदौर में पुलिस को बड़ी आबादी और व्यापक यातायात व्यवस्था के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के अपराधों और कानून-व्यवस्था संबंधी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। शहर में पुलिस की कई शाखाएं अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालती हैं। नवीन पदस्थापना पर इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को कौन-सी जिम्मेदारी दी जाएगी, यह इंदौर पुलिस प्रशासन द्वारा तय किया जाएगा। फिलहाल मुख्यालय आदेश में केवल जिला इंदौर नगरीय की पदस्थापना दर्ज है। इसलिए उनके कार्यक्षेत्र के संबंध में आधिकारिक कार्य आवंटन आदेश आने के बाद ही स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
सतना पुलिस में भी आएगा बदलाव
भोपाल नगरीय से सतना जिले में कृष्णदेव सिंह कुशवाह की पदस्थापना के बाद सतना पुलिस में भी निरीक्षक स्तर पर नई कार्य व्यवस्था बन सकती है। सतना में शहरी क्षेत्र के साथ-साथ ग्रामीण थाना क्षेत्रों की भी पुलिस व्यवस्था है। नए अधिकारी को जिले की स्थानीय परिस्थितियों और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार दायित्व दिया जाएगा। सतना की पुलिस व्यवस्था में अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के अलावा नागरिकों से जुड़े अनेक प्रशासनिक कार्य होते हैं। नवीन अधिकारी के अनुभव का उपयोग जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा आवश्यकता के अनुसार किया जा सकता है। यहां भी यह स्पष्ट रखना आवश्यक है कि वर्तमान आदेश में किसी विशेष थाना का नाम नहीं दिया गया है। इसलिए कार्यभार ग्रहण करने के बाद जारी होने वाले स्थानीय आदेश से ही उनके दायित्व की अंतिम जानकारी प्राप्त होगी।
भोपाल ग्रामीण में नई पदस्थापना
नर्मदापुरम से भोपाल ग्रामीण भेजे गए गिरीश त्रिपाठी की पदस्थापना राजधानी क्षेत्र से जुड़े ग्रामीण पुलिस प्रशासन में होगी। भोपाल ग्रामीण क्षेत्र की पुलिस व्यवस्था में ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है। नए निरीक्षक की तैनाती के बाद स्थानीय पुलिस अधीक्षक आवश्यकता के अनुरूप उन्हें किसी थाना अथवा शाखा का कार्य दे सकते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में पुलिसिंग के दौरान स्थानीय समुदाय से संवाद, विवादों की रोकथाम, अपराधों की जांच और कानून-व्यवस्था को बनाए रखना प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल रह सकता है। हालांकि वास्तविक दायित्व का निर्धारण जिला पुलिस अधीक्षक करेंगे।
बुरहानपुर में झाबुआ से पहुंचेगा अनुभव
दिनेश शर्मा को झाबुआ से बुरहानपुर भेजे जाने के बाद वहां पुलिस प्रशासन में भी नई कार्य व्यवस्था बनेगी। अलग-अलग जिलों में कार्य करने वाले अधिकारी स्थानीय परिस्थितियों से अलग अनुभव लेकर आते हैं। इस अनुभव का उपयोग नई इकाई में वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार किया जा सकता है। बुरहानपुर में कानून-व्यवस्था के साथ-साथ अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल रहती है। दिनेश शर्मा को किस शाखा अथवा थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी दी जाएगी, यह स्थानीय स्तर पर तय किया जाएगा।
धार और खंडवा में पीटीसी से जिला पुलिस में बदलाव
प्रह्लाद डिंडोर और मिकीता चौहान दोनों की वर्तमान पदस्थापना पीटीसी इंदौर में थी और दोनों को जिला पुलिस इकाइयों में भेजा गया है। इस तरह प्रशिक्षण संस्थान से जिला पुलिस में मानव संसाधन का स्थानांतरण हुआ है। जिला पुलिस में निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की आवश्यकता के अनुसार इन दोनों अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी जाएंगी। पीटीसी में कार्य करने का अनुभव और प्रशिक्षण व्यवस्था से जुड़ी जानकारी जिला पुलिस में भी विभिन्न स्तरों पर उपयोगी हो सकती है। हालांकि यह केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से संभावित प्रभाव है; आदेश में किसी विशेष जिम्मेदारी का उल्लेख नहीं किया गया है।
आदेश जारी करने वाले पुलिस महानिदेशक
पुलिस मुख्यालय भोपाल से जारी आदेश पर पुलिस महानिदेशक, मध्यप्रदेश, भोपाल की ओर से हस्ताक्षर किए गए हैं। दस्तावेज में हस्ताक्षरकर्ता के रूप में कैलाश मकवाणा का नाम अंकित है। आदेश पुलिस मुख्यालय की प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है। दस्तावेज में पुलिस स्थापना बोर्ड की स्वीकृति का उल्लेख करते हुए छह अधिकारियों की नवीन पदस्थापना निर्धारित की गई है। इससे आदेश की विभागीय प्रकृति स्पष्ट होती है।
मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय भोपाल द्वारा जारी इस प्रशासनिक आदेश के तहत निरीक्षक स्तर के छह अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया गया है। प्रह्लाद डिंडोर को धार, मिकीता चौहान को खंडवा, गिरीश त्रिपाठी को भोपाल ग्रामीण, कृष्णदेव सिंह कुशवाह को सतना, दिनेश शर्मा को बुरहानपुर और इंद्रेश कुमार त्रिपाठी को इंदौर नगरीय में पदस्थ किया गया है। आदेश पुलिस स्थापना बोर्ड की स्वीकृति के बाद जारी किया गया है और नवीन पदस्थापना आगामी आदेश तक प्रभावी रहेगी। संबंधित अधिकारियों के नवीन जिलों में पहुंचने के बाद जिला पुलिस अधीक्षकों द्वारा जिले के अंदर कार्य आवंटन किया जाएगा। आदेश में स्थानांतरण नीति 2026 के प्रावधानों का भी संदर्भ दिया गया है तथा निलंबित अधिकारी की स्थिति में कार्यमुक्त न करने संबंधी निर्देश दिए गए हैं। इस प्रशासनिक फेरबदल के बाद छह पुलिस इकाइयों में निरीक्षक स्तर की कार्य व्यवस्था में बदलाव आएगा। अब संबंधित अधिकारियों की आमद और स्थानीय स्तर पर कार्य आवंटन के बाद यह स्पष्ट होगा कि उन्हें किस थाना, शाखा अथवा पुलिस इकाई की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। फिलहाल पुलिस मुख्यालय का आदेश प्रदेश पुलिस प्रशासन में नियमित प्रशासनिक पुनर्संयोजन के रूप में सामने आया है, जिसका उद्देश्य उपलब्ध पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना को विभागीय व्यवस्था और स्थानांतरण नीति के अनुरूप संचालित करना है।
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