Responsive Menu

Download App from

Download App

Follow us on

Donate Us

BARC का फर्जी वैज्ञानिक निकला अख्तर, विदेशों से लेता था फंडिंग — ईरान को बेचना चाहता था न्यूक्लियर डेटा

Author Image
Written by
HQ Report

एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई, जालसाज़ी और जासूसी की कड़ी साजिश का हुआ पर्दाफाश

मुंबई। परमाणु अनुसंधान के क्षेत्र से जुड़ी भारत की प्रतिष्ठित संस्था भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। जांच एजेंसियों ने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार किया है, जो खुद को BARC का वरिष्ठ वैज्ञानिक बताकर वर्षों से सरकारी और निजी संस्थानों को गुमराह कर रहा था। यह आरोपी विदेशों से फंडिंग प्राप्त कर रहा था और भारत की परमाणु तकनीक से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को ईरान सहित अन्य देशों को बेचने की कोशिश में था।


फर्जी आईडी कार्ड से बन बैठा ‘वैज्ञानिक’

गिरफ्तार आरोपी का नाम अख्तर हुसैन (45) बताया जा रहा है। वह मूल रूप से उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ का रहने वाला है, लेकिन कई वर्षों से मुंबई और हैदराबाद के बीच रहकर खुद को “BARC का परमाणु वैज्ञानिक” बताता था। उसने नकली पहचान पत्र, फर्जी डिग्रियां और BARC के लेटरहेड पर छपे दस्तावेज़ों के सहारे खुद को एक उच्चस्तरीय शोधकर्ता के रूप में पेश किया था।

Advertisement Box

एजेंसियों के अनुसार, अख्तर ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर फर्जी प्रोफाइल बनाकर खुद को “न्यूक्लियर एनर्जी कंसल्टेंट” बताया था। वह कई विदेशी कंपनियों से संपर्क में था और परमाणु डेटा एक्सचेंज के नाम पर बड़ी रकम हासिल कर रहा था।


IB और NIA की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तारी

यह मामला तब सामने आया जब इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को एक संदिग्ध ईमेल की जानकारी मिली, जिसमें BARC के अंदरूनी दस्तावेज़ों का हवाला दिया गया था। जांच में पाया गया कि ये दस्तावेज़ वास्तव में संवेदनशील रिसर्च रिपोर्ट्स के मॉडिफाइड वर्ज़न थे, जिन्हें किसी ने BARC के नाम से विदेश भेजा था।

जांच एजेंसियों ने ट्रेस करते हुए मुंबई के एक साइबर कैफे से सुराग निकाला। वहां से पकड़ा गया व्यक्ति कोई वैज्ञानिक नहीं, बल्कि फर्जी पहचान के सहारे जासूसी नेटवर्क चलाने वाला ठग निकला। इसके बाद NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) ने IB और मुंबई पुलिस के साथ मिलकर कार्रवाई की और अख्तर को हिरासत में ले लिया।


ईरान और तुर्की से था संपर्क

जांच में खुलासा हुआ है कि अख्तर के कई ईरान और तुर्की स्थित संगठनों से संपर्क थे। वह खुद को “शांति शोध सलाहकार” बताकर ईरानी विश्वविद्यालयों से संपर्क करता था। शुरुआती जांच में पाया गया है कि उसने कुछ बार एनर्जी डेटा, न्यूक्लियर सिंथेसिस रिपोर्ट और सैंपल डिज़ाइनों को साझा करने की कोशिश की थी।

हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वह BARC के असली सिस्टम तक पहुंच पाया या नहीं, लेकिन एजेंसियों ने उसके पास से लैपटॉप, 3 हार्ड ड्राइव, नकली मुहरें, अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन रिकॉर्ड और कई पासपोर्ट बरामद किए हैं।


फंडिंग के पीछे था विदेशी नेटवर्क

एनआईए सूत्रों के अनुसार, अख्तर को कई विदेशी एनजीओ और “रिसर्च फंडिंग एजेंसियों” से धन मिल रहा था। उसके बैंक खातों की जांच में करोड़ों रुपये के अंतरराष्ट्रीय लेन-देन का पता चला है।
माना जा रहा है कि यह पैसा साइबर रिसर्च और डेटा एनालिटिक्स के नाम पर आता था, लेकिन असल में इसका उपयोग संवेदनशील सूचनाएं जुटाने और उन्हें बाहर भेजने में किया जा रहा था।


BARC ने दी सफाई, कहा – संस्थान से कोई संबंध नहीं

जैसे ही यह मामला सुर्खियों में आया, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC) ने आधिकारिक बयान जारी किया। केंद्र ने कहा,

“अख्तर हुसैन नामक व्यक्ति का हमारे संस्थान से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उसने जो पहचान पत्र और दस्तावेज़ दिखाए हैं, वे पूरी तरह फर्जी हैं। हमारी सुरक्षा प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित है और किसी भी डेटा की चोरी नहीं हुई है।”

BARC प्रशासन ने बताया कि संस्थान में प्रवेश के लिए बहु-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है और किसी बाहरी व्यक्ति के लिए संवेदनशील जानकारी तक पहुंचना संभव नहीं।


पुलिस ने दर्ज किए कई संगीन मामले

मुंबई पुलिस ने अख्तर के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (जालसाजी), 471 (फर्जी दस्तावेज़ का उपयोग) के साथ-साथ आधिकारिक रहस्य अधिनियम (Official Secrets Act, 1923) के तहत मामला दर्ज किया है।
इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी फंडिंग की जांच के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) को भी अलर्ट कर दिया गया है।


कैसे उजागर हुआ खेल?

सूत्रों के अनुसार, अख्तर एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में खुद को “BARC के न्यूक्लियर सेफ्टी डिवीजन के वरिष्ठ वैज्ञानिक” के रूप में पेश कर रहा था। उसने ईमेल के ज़रिए कई विश्वविद्यालयों को सहयोग प्रस्ताव भेजे। जब एक संस्थान ने सत्यापन के लिए BARC से संपर्क किया, तब सारा खेल खुल गया।

BARC की सिक्योरिटी यूनिट ने IB को सतर्क किया और फिर जांच शुरू हुई। इसके बाद धीरे-धीरे जालसाजी, फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की कड़ियां जुड़ती चली गईं।


एजेंसियां कर रही हैं गहन पूछताछ

एनआईए अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या अख्तर के नेटवर्क में अन्य लोग भी शामिल हैं। उसके ईमेल्स और फोन रिकॉर्ड्स से यह संकेत मिले हैं कि वह कुछ विदेशी नागरिकों से नियमित रूप से बात करता था।
एजेंसियां यह भी जांच रही हैं कि उसने जिन “डेटा फाइल्स” को साझा करने की कोशिश की थी, वे BARC के असली शोध से मेल खाती हैं या नहीं।


राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा सबक

यह मामला इस बात की गम्भीर चेतावनी है कि साइबर जासूसी और सूचना धोखाधड़ी अब केवल तकनीकी अपराध नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं।
BARC जैसे संवेदनशील संस्थानों से जुड़ा नाम इस्तेमाल कर जनता, कंपनियों और विदेशी संगठनों को गुमराह करना न केवल धोखाधड़ी है, बल्कि देश के वैज्ञानिक प्रतिष्ठान की साख पर भी चोट है।

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल
आज फोकस में

₹28 प्रति शेयर डिविडेंड का ऐलान: CRISIL ने निवेशकों को दिया बड़ा तोहफा, 16 फरवरी को स्टॉक में दिख सकती है जोरदार हलचल

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव
आज फोकस में

एसटीटी हाइक पर एफआईआई का बड़ा रिस्पॉन्स, एक दिन में भारी बिकवाली से पूरा महीना हुआ नेगेटिव

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट
आज फोकस में

आईटी सेक्टर में गिरावट के बीच HCL Tech और Tech Mahindra सहित चार स्टॉक खरीदें, ब्रोकरेज ने दिये बड़े टारगेट

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप
आज फोकस में

शेयर बाजार के इक्विटी और इक्विटी डेरिवेटिव्स में एंट्री की तैयारी में NCDEX, ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए TCS के साथ की पार्टनरशिप

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित
आज फोकस में

दूरदर्शन केंद्र भोपाल में संविदा भर्ती: पोस्ट प्रोडक्शन असिस्टेंट के लिए आवेदन आमंत्रित

दो दिनों में 1.34 लाख रुपये सस्ती हुई चांदी, सोने के दाम में ₹45,000 की भारी गिरावट
आज फोकस में

दो दिनों में 1.34 लाख रुपये सस्ती हुई चांदी, सोने के दाम में ₹45,000 की भारी गिरावट

आज का राशिफल

वोट करें

'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद दुनिया के सामने रोज बेनकाब हो रहे पाकिस्तान को दी गई एक अरब डॉलर की मदद पर क्या अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष को फिर से विचार करना चाहिए?

Advertisement Box
Advertisement Box

और भी पढ़ें