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विश्व एंटीबायोटिक जन-जागरूकता सप्ताह 2025 : “Act Now: Protect Our Present, Secure Our Future” थीम के साथ प्रदेश में होगी व्यापक गतिविधियाँ

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HQ Report

18 से 24 नवंबर 2025 तक चलेगा जन-अभियान, स्वास्थ्य संस्थाएँ होंगी जागरूकता की प्रमुख केंद्र बिंदु

एंटीबायोटिक दवाओं के अनियंत्रित एवं अनुचित उपयोग के कारण बढ़ रहे संक्रमणों की जटिलता और प्रतिरोधक क्षमता विश्वभर में चिंता का विषय बनी हुई है। इसी पृष्ठभूमि में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 18 से 24 नवंबर 2025 तक विश्व एंटीबायोटिक जन-जागरूकता सप्ताह आयोजित कर रहा है। इस वर्ष का वैश्विक थीम है—

“Act Now: Protect Our Present, Secure Our Future”

(अभी कार्य करें — अपना वर्तमान सुरक्षित रखें और भविष्य को संरक्षित करें)

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इस सप्ताह का उद्देश्य है—

  • एंटीबायोटिक दवाओं का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग

  • संक्रमणों की रोकथाम

  • एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) के खतरों के प्रति समाज को जागरूक करना

  • और चिकित्सा क्षेत्र में साक्ष्य-आधारित उपचार पद्धति को प्रोत्साहित करना

प्रदेश में इस अभियान को व्यापक स्वरूप देने की तैयारी पूरी हो चुकी है, जिसके लिए सभी स्वास्थ्य संस्थानों को विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं।

स्वास्थ्य विभाग ने तैयार की एंटीबायोटिक नीति – परिणाम आने लगे सकारात्मक

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरसिंह गेहलोत ने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक उपयोग संबंधी एक व्यापक नीति (Antibiotic Policy) तैयार की गई है।

यह नीति इन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है—

  • संक्रमण के प्रकार के अनुसार सही दवा का चयन

  • अनावश्यक एंटीबायोटिक से बचाव

  • उपचार अवधि की वैज्ञानिक निर्धारण

  • अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करना

डॉ. गेहलोत के अनुसार, इस नीति के कारण पिछले कुछ वर्षों में—

  • अस्पतालों में अनावश्यक एंटीबायोटिक उपयोग कम हुआ है

  • संक्रमण उपचार की गुणवत्ता बढ़ी है

  • और मरीजों को अनावश्यक दवा दुष्प्रभावों से राहत मिली है

“यह प्रयास दीर्घकालिक है और इसके _स्थायी लाभ आने वाले वर्षों में और अधिक स्पष्ट होंगे,” उन्होंने कहा।

18 नवंबर को जिले भर में होगी एंटीबायोटिक सप्ताह की औपचारिक शुरुआत

विश्व एंटीबायोटिक जन-जागरूकता सप्ताह की शुरुआत 18 नवंबर 2025 को जिले के सभी चिकित्सा संस्थानों में होगी। इसके अंतर्गत—

1️⃣ जिला अस्पताल

यहां मुख्य कार्यक्रम आयोजित होगा जिसमें—

  • वरिष्ठ चिकित्सक

  • विशेषज्ञ

  • नर्सिंग स्टाफ

  • पैरामेडिकल टीम
    भाग लेगी और एंटीबायोटिक उपयोग से संबंधित सत्र आयोजित किए जाएंगे।

2️⃣ सिविल अस्पताल

सभी विभागों में—

  • एएमआर (AMR) पर व्याख्यान

  • केस स्टडी

  • संक्रमण नियंत्रण के व्यावहारिक प्रदर्शन
    किए जाएंगे।

3️⃣ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC)

यहां ग्रामीण आबादी को लक्षित करते हुए—

  • ग्राम स्वास्थ्य समितियों के साथ बैठक

  • जनजागरूकता रैली

  • मरीजों के लिए परामर्श शिविर
    आयोजित होंगे।

4️⃣ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC)

ग्रामीण स्तर पर—

  • एएनएम द्वारा घर-घर जागरूकता

  • दवा दुकानों के लिए परामर्श

  • स्कूलों में सत्र
    आयोजित किए जाएंगे।

संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल (IPC) का प्रशिक्षण अनिवार्य

एंटीबायोटिक के प्रभावी उपयोग का सबसे बड़ा आधार है—संक्रमण रोकथाम और नियंत्रण (IPC)
इसी उद्देश्य से सभी स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि—

  • सभी चिकित्सक

  • नर्सिंग ऑफिसर्स

  • लैब टेक्नीशियन

  • वार्ड बॉय

  • सफाई कर्मचारी

को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

IPC प्रशिक्षण में शामिल विषय—

  • हाथ स्वच्छता (Hand Hygiene)

  • अस्पताल संक्रमण रोकथाम के उपाय

  • बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट

  • सैंपलिंग एवं कल्चर रिपोर्ट की भूमिका

  • संक्रमण नियंत्रण में PPE का सही उपयोग

प्रशिक्षण के बाद टीम को अपने-अपने विभागों में नियमित निरीक्षण करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

स्कूलों में जागरूकता अभियान: बच्चों को समझाया जाएगा एंटीबायोटिक का सही अर्थ

स्वास्थ्य विभाग की टीम निजी एवं शासकीय स्कूलों में जाकर छात्रों को बताएगी—

  • एंटीबायोटिक क्या होती है?

  • कब उपयोग की जाती है?

  • कब उपयोग नहीं करनी चाहिए?

  • दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं?

  • स्वयं दवा लेने से क्यों बचना चाहिए?

स्कूल स्तर पर यह कार्यक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि—

  • बच्चे संदेश को घर तक लेकर जाते हैं

  • किशोरावस्था में दवा उपयोग संबंधी गलतियाँ आम हैं

स्कूलों में—

  • पोस्टर प्रतियोगिता

  • प्रश्नोत्तरी

  • नाटक

  • स्वास्थ्य शिक्षण सत्र
    आयोजित किए जाएंगे।

अस्पताल वार्डों में विशेष कार्यक्रम

मेडिकल वार्ड

  • दवा की खुराक संबंधी जागरूकता

  • मरीजों और परिजनों के लिए परामर्श

  • दवा प्रतिरोध से जुड़ी जानकारी

सर्जिकल वार्ड

  • ऑपरेशन से पहले/बाद एंटीबायोटिक के वैज्ञानिक प्रयोग

  • संक्रमण रोकथाम के उपाय

मैटरनिटी वार्ड

  • प्रसूति के समय संक्रमण नियंत्रण

  • नवजातों को अनावश्यक एंटीबायोटिक से बचाने की जानकारी

नवजात स्थिर देखभाल इकाई (NBSU)

यहां विशेष सत्र आयोजित होंगे क्योंकि नवजातों में—

  • एंटीबायोटिक उपयोग

  • संक्रमण रोकथाम
    बहुत संवेदनशील विषय हैं।

एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR): एक बढ़ती वैश्विक चुनौती

लेख को थोड़ा विश्लेषणात्मक बनाने हेतु इसमें AMR का वैज्ञानिक संदर्भ जोड़ा गया है—

एंटीबायोटिक का दुरुपयोग दुनिया में एक गंभीर संकट बन चुका है। WHO के अनुसार–

  • 2050 तक एंटीबायोटिक प्रतिरोध से होने वाली मौतें कैंसर से भी अधिक हो सकती हैं।

  • दुनिया में लगभग 70% बैक्टीरिया आम दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित कर रहे हैं।

इसके प्रमुख कारण—

  • दवाओं का बिना डॉक्टर के सेवन

  • अधूरी दवा लेना

  • दवा की गलत मात्रा

  • पशुपालन में अनावश्यक उपयोग

विश्व एंटीबायोटिक सप्ताह का उद्देश्य इस संकट को रोकना है।

जागरूकता सप्ताह के अपेक्षित परिणाम

इस वर्ष के कार्यक्रमों से स्वास्थ्य विभाग को निम्नलिखित परिणामों की अपेक्षा है—

  • स्वास्थ्य कर्मचारियों में IPC अनुपालन बढ़ना

  • मरीजों में स्वयं दवा लेना कम होना

  • स्कूलों में दवा जागरूकता बढ़ना

  • अस्पतालों में एंटीबायोटिक उपयोग का वैज्ञानिक रिकॉर्ड तैयार होना

  • एंटीबायोटिक नीति का मजबूत क्रियान्वयन

विश्व एंटीबायोटिक जन-जागरूकता सप्ताह स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती और समाज में जागरूकता लाने का एक महत्त्वपूर्ण अवसर है।
स्वास्थ्य विभाग की नीति, प्रशिक्षण और जन-भागीदारी के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि—

“एंटीबायोटिक का सही उपयोग ही हमारे स्वास्थ्य और भविष्य दोनों की रक्षा करेगा।”

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