
गुजरात के पंचमहाल जिले के मलाव गांव में आयोजित एक विशेष कृषि कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रगतिशील किसान नरेशभाई पटेल के प्राकृतिक फार्म का दौरा कर खेती और गौसेवा से जुड़े विभिन्न कार्यों में सहभागिता की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं खेत में पहुंचकर प्राकृतिक खेती की बारीकियों को समझा और किसानों के साथ संवाद करते हुए रसायन मुक्त खेती को भविष्य का सबसे सुरक्षित और लाभकारी विकल्प बताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना रहा। मुख्यमंत्री ने गांव पहुंचते ही सबसे पहले गौशाला का निरीक्षण किया और वहां मौजूद गायों की सेवा की। इसके बाद उन्होंने स्वयं गाय का दूध दुहा और ग्रामीण परिवेश की पारंपरिक जीवनशैली को अनुभव किया। मुख्यमंत्री ने दुहे गए दूध को साइकिल पर रखकर मलाव सहकारी दुग्ध मंडली तक पहुंचाया, जहां उन्होंने दूध जमा कराया। इस दौरान ग्रामीणों और किसानों में विशेष उत्साह देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव और किसान भारत की आत्मा हैं तथा कृषि और पशुपालन भारतीय संस्कृति की मूल पहचान रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक किसान समृद्ध नहीं होगा, तब तक देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है।

मुख्यमंत्री ने दुग्ध मंडली में दूध जमा करने के बाद प्राप्त राशि को तत्काल गौसेवा के लिए दान कर दिया। उन्होंने कहा कि गौसेवा भारतीय संस्कृति और कृषि परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। गाय केवल दूध देने वाला पशु नहीं बल्कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था की आधारशिला रही है। प्राकृतिक खेती में गौ आधारित उत्पादों का विशेष महत्व है और इससे मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खेती से धीरे-धीरे दूरी बनाकर प्राकृतिक खेती की ओर आगे बढ़ें। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने खेत में हल चलाकर किसानों को पारंपरिक कृषि पद्धतियों का महत्व समझाया। उन्होंने हल्दी का रोपण भी किया और कहा कि प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलें न केवल स्वास्थ्य के लिए बेहतर होती हैं, बल्कि बाजार में उनकी मांग और कीमत भी अधिक होती है। उन्होंने खेतों में लहलहाती फसलों का निरीक्षण करते हुए किसान नरेशभाई पटेल की सराहना की और कहा कि ऐसे प्रगतिशील किसान पूरे देश के लिए प्रेरणा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने का मार्ग भी है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्राकृतिक खेती मिट्टी, पानी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सबसे बड़ा कदम है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की गुणवत्ता लगातार प्रभावित हो रही है और इसका असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज समय की आवश्यकता है कि किसान प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए टिकाऊ खेती को अपनाएं। इससे उत्पादन लागत कम होगी और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती से विदेशी मुद्रा की भी बचत होती है क्योंकि रासायनिक उर्वरकों के लिए देश को भारी मात्रा में आयात करना पड़ता है। यदि किसान जैविक और प्राकृतिक खेती अपनाते हैं तो इससे देश आत्मनिर्भर बनेगा और कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी। मुख्यमंत्री ने किसानों को आश्वस्त किया कि सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए हर संभव सहायता प्रदान कर रही है। किसानों को प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सहकारी समितियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुग्ध सहकारी समितियां किसानों और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में अहम योगदान दे रही हैं। उन्होंने मलाव सहकारी दुग्ध मंडली के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की संस्थाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का कार्य कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों से कहा कि वे आधुनिक तकनीक और पारंपरिक ज्ञान का संतुलन बनाकर खेती करें ताकि उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में वृद्धि हो सके। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने मुख्यमंत्री के साथ अपने अनुभव साझा किए और प्राकृतिक खेती से होने वाले लाभों की जानकारी दी। किसानों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आई है और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार हुआ है। साथ ही फसलों की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में अच्छे दाम मिल रहे हैं। मुख्यमंत्री ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से भी खेती की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और यदि आधुनिक तकनीक के साथ प्राकृतिक खेती को अपनाया जाए तो यह युवाओं के लिए रोजगार और उद्यम का बड़ा माध्यम बन सकती है। उन्होंने कहा कि आज कई युवा जैविक खेती और कृषि आधारित स्टार्टअप के माध्यम से सफलता प्राप्त कर रहे हैं। सरकार भी युवाओं को कृषि क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने खेतों में कार्य कर रहे किसानों के साथ समय बिताया और उनके श्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसान देश के अन्नदाता हैं और उनका सम्मान करना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने का एक संतुलित और स्वस्थ तरीका है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य भी सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, ग्रामीण और स्थानीय जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री के खेत में हल चलाने और दूध दुहने जैसे कार्यों ने ग्रामीणों के बीच विशेष आकर्षण पैदा किया। लोगों ने मुख्यमंत्री के इस सरल और सहज व्यवहार की सराहना की और कहा कि इससे किसानों और ग्रामीण समाज के प्रति सरकार की संवेदनशीलता झलकती है। मुख्यमंत्री ने अपने दौरे के अंत में कहा कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और गांवों की समृद्धि ही देश की वास्तविक समृद्धि है। प्राकृतिक खेती, गौसेवा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाकर ही आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे जल संरक्षण, मिट्टी संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग पर विशेष ध्यान दें ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित किया जा सके। मुख्यमंत्री के इस दौरे को प्राकृतिक खेती और ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। किसानों और ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि सरकार के प्रयासों से प्राकृतिक खेती को नई पहचान मिलेगी और किसान आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बन सकेंगे। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि कृषि केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति और आत्मनिर्भरता की आधारशिला है।









