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HQ Report
भोपाल। रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए e-KYC की प्रक्रिया को लेकर साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका अपनाना शुरू कर दिया है। गैस कनेक्शन बंद होने, e-KYC अधूरी होने, सब्सिडी रुकने अथवा गैस सेवा बाधित होने का डर दिखाकर लोगों को फर्जी कॉल, एसएमएस, व्हाट्सऐप संदेश और संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं। कई मामलों में ठग स्वयं को गैस एजेंसी, गैस कंपनी, सरकारी अधिकारी अथवा ग्राहक सेवा प्रतिनिधि बताकर उपभोक्ताओं से आधार नंबर, ओटीपी, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम विवरण और यूपीआई पिन प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं। मध्यप्रदेश राज्य साइबर पुलिस ने आम नागरिकों को ऐसे फर्जी संदेशों और कॉल से सावधान रहने की सलाह देते हुए स्पष्ट किया है कि गैस e-KYC केवल अधिकृत माध्यमों से ही कराई जानी चाहिए और किसी भी अज्ञात व्यक्ति के साथ ओटीपी, बैंक विवरण अथवा यूपीआई पिन साझा नहीं करना चाहिए।
राज्य साइबर पुलिस द्वारा जारी परामर्श के अनुसार, गैस कंपनियों की ओर से e-KYC की प्रक्रिया लागू किए जाने के बाद साइबर ठगों ने इसका दुरुपयोग शुरू कर दिया है। ठग उपभोक्ताओं को फोन कर यह कहते हैं कि उनकी गैस e-KYC अधूरी है और यदि तत्काल सत्यापन नहीं कराया गया तो गैस कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा, सब्सिडी रोक दी जाएगी अथवा गैस बुकिंग की सुविधा समाप्त हो जाएगी। इस प्रकार की बातों से घबराकर कई लोग बिना सत्यापन किए ठगों के निर्देशों का पालन कर लेते हैं। साइबर अपराधी इसी जल्दबाजी और भय का लाभ उठाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
साइबर पुलिस ने बताया कि ठग कई बार गैस एजेंसी अथवा गैस कंपनी के नाम से आकर्षक या आधिकारिक दिखने वाले संदेश भेजते हैं। इन संदेशों में e-KYC पूरा करने के लिए एक लिंक दिया जाता है। लिंक पर क्लिक करने के बाद उपभोक्ता को एक ऐसी वेबसाइट पर पहुंचाया जा सकता है, जो देखने में किसी वास्तविक कंपनी की वेबसाइट जैसी लगती है। वहां उपभोक्ता से आधार नंबर, मोबाइल नंबर, बैंक खाता, ओटीपी या अन्य निजी जानकारी मांगी जा सकती है। जानकारी दर्ज करते ही वह साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है और इसका उपयोग बैंक खाते से अवैध लेनदेन, पहचान संबंधी धोखाधड़ी अथवा अन्य साइबर अपराधों में किया जा सकता है।
कई मामलों में उपभोक्ताओं को व्हाट्सऐप या एसएमएस के माध्यम से यह संदेश भेजा जाता है कि गैस e-KYC तुरंत पूरी करने के लिए एक मोबाइल ऐप डाउनलोड करना आवश्यक है। यह ऐप वास्तविक गैस कंपनी का आधिकारिक ऐप नहीं होता, बल्कि उसमें रिमोट एक्सेस अथवा स्क्रीन नियंत्रण की सुविधा छिपी हो सकती है। ऐप इंस्टॉल होने के बाद साइबर अपराधी मोबाइल फोन की स्क्रीन देख सकते हैं, कुछ स्थितियों में फोन को दूर से नियंत्रित कर सकते हैं और बैंकिंग या डिजिटल भुगतान से जुड़ी जानकारी तक पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए किसी अज्ञात व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer अथवा किसी अन्य रिमोट एक्सेस ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
गैस e-KYC को लेकर साइबर पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वास्तविक गैस कंपनी अथवा अधिकृत एजेंसी सामान्यतः फोन पर उपभोक्ता से एटीएम पिन, यूपीआई पिन, बैंक खाते का पासवर्ड या अन्य गोपनीय वित्तीय जानकारी नहीं मांगती। किसी भी व्यक्ति द्वारा गैस कनेक्शन, e-KYC, सब्सिडी या दस्तावेज सत्यापन के नाम पर ऐसी जानकारी मांगी जाती है तो उपभोक्ता को सतर्क हो जाना चाहिए। ओटीपी भी अत्यंत गोपनीय जानकारी है और इसे किसी के साथ साझा नहीं किया जाना चाहिए। कई लोग यह मान लेते हैं कि ओटीपी केवल पहचान सत्यापन के लिए होता है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में ओटीपी साझा करने से बैंकिंग अथवा डिजिटल लेनदेन से जुड़े जोखिम उत्पन्न हो सकते हैं।
गैस उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि e-KYC कराने के लिए सबसे सुरक्षित तरीका अपनी संबंधित अधिकृत गैस एजेंसी पर जाना है। उपभोक्ता अपनी गैस एजेंसी में जाकर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर e-KYC की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इस दौरान उपभोक्ता को अपने गैस कनेक्शन से संबंधित जानकारी, पंजीकृत मोबाइल नंबर और आवश्यक पहचान दस्तावेज साथ रखने चाहिए। एजेंसी में उपलब्ध अधिकृत कर्मचारी के माध्यम से पहचान सत्यापन कराया जा सकता है। यदि बायोमेट्रिक सत्यापन की आवश्यकता हो तो वह केवल अधिकृत प्रक्रिया के अंतर्गत ही कराया जाना चाहिए।
गैस कंपनियों के आधिकारिक मोबाइल ऐप के माध्यम से भी e-KYC की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। इंडियनऑयल की इंडेन सेवा, भारत गैस और एचपी गैस के उपभोक्ता संबंधित कंपनी के आधिकारिक ऐप अथवा अधिकृत डिजिटल माध्यम का उपयोग कर सकते हैं। ऐप डाउनलोड करते समय यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि ऐप वास्तविक कंपनी का आधिकारिक ऐप हो। किसी व्हाट्सऐप संदेश, अज्ञात एसएमएस या फोन कॉल में भेजे गए लिंक के माध्यम से ऐप डाउनलोड करने के बजाय मोबाइल के अधिकृत ऐप स्टोर पर जाकर कंपनी का नाम जांचकर ऐप डाउनलोड करना अधिक सुरक्षित है।
आधिकारिक ऐप के माध्यम से e-KYC करते समय उपभोक्ता को अपना पंजीकृत मोबाइल नंबर और आवश्यक उपभोक्ता विवरण दर्ज करना पड़ सकता है। इसके बाद आधार प्रमाणीकरण अथवा ओटीपी सत्यापन की प्रक्रिया हो सकती है। हालांकि उपभोक्ता को यह ध्यान रखना चाहिए कि ओटीपी केवल वास्तविक और सुरक्षित आधिकारिक प्रक्रिया के दौरान ही दर्ज किया जाए। किसी व्यक्ति को फोन पर ओटीपी पढ़कर नहीं सुनाना चाहिए और न ही व्हाट्सऐप, एसएमएस या अन्य माध्यम से भेजना चाहिए। यदि किसी प्रक्रिया के दौरान अनावश्यक बैंक जानकारी, यूपीआई पिन या भुगतान की मांग की जाए तो प्रक्रिया को तुरंत रोककर संबंधित गैस एजेंसी अथवा कंपनी के आधिकारिक ग्राहक सेवा माध्यम से पुष्टि करनी चाहिए।
गैस कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भी e-KYC की सुविधा उपलब्ध हो सकती है। वेबसाइट का उपयोग करते समय उपभोक्ता को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वह सही और आधिकारिक वेबसाइट पर ही पहुंचा है। साइबर ठग अक्सर वास्तविक वेबसाइट से मिलते-जुलते नाम, अक्षर या डिजाइन वाली नकली वेबसाइट तैयार कर लेते हैं। इसलिए वेबसाइट का पता ध्यान से जांचना चाहिए। किसी अज्ञात संदेश में प्राप्त लिंक पर सीधे क्लिक करने के बजाय कंपनी की वेबसाइट का पता स्वयं खोजकर अथवा अधिकृत स्रोत से प्राप्त कर वेबसाइट खोलना अधिक सुरक्षित तरीका है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठगी से बचने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय है कि किसी भी कॉल या संदेश से घबराकर तत्काल कार्रवाई न की जाए। यदि कोई व्यक्ति कहता है कि कुछ मिनटों में गैस कनेक्शन बंद हो जाएगा, सब्सिडी समाप्त हो जाएगी या तुरंत e-KYC नहीं कराने पर भारी नुकसान होगा, तो पहले उसकी जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए। वास्तविक संस्थाएं सामान्यतः उपभोक्ताओं को उचित प्रक्रिया और आधिकारिक माध्यम उपलब्ध कराती हैं। जल्दबाजी कराने, डर पैदा करने और गोपनीय जानकारी मांगने का तरीका साइबर ठगी का संकेत हो सकता है।
साइबर पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, आधार से जुड़ी संवेदनशील जानकारी, बैंक खाते का विवरण, एटीएम कार्ड की जानकारी, कार्ड का सीवीवी नंबर, नेट बैंकिंग पासवर्ड अथवा यूपीआई पिन साझा न करें। यूपीआई पिन का उपयोग भुगतान या बैंकिंग लेनदेन की अनुमति के लिए किया जाता है। किसी भी व्यक्ति द्वारा e-KYC या गैस सत्यापन के नाम पर यूपीआई पिन मांगना संदेह का विषय हो सकता है। उपभोक्ताओं को यह समझना चाहिए कि केवल पैसा प्राप्त करने के लिए यूपीआई पिन दर्ज करने की आवश्यकता नहीं होती। किसी भी भुगतान अनुरोध को स्वीकार करने या पिन दर्ज करने से पहले उसकी पूरी जानकारी जांचना आवश्यक है।
फर्जी गैस एजेंसी के नाम से सोशल मीडिया पेज और वेबसाइट बनाकर भी लोगों को ठगने का प्रयास किया जा सकता है। ऐसे पेजों पर आकर्षक संदेश, गैस सब्सिडी से जुड़े दावे, तत्काल e-KYC की चेतावनी अथवा विशेष सहायता का प्रस्ताव दिया जा सकता है। उपभोक्ताओं को किसी सोशल मीडिया पेज पर उपलब्ध मोबाइल नंबर को केवल इसलिए सही नहीं मानना चाहिए कि उस पेज पर गैस कंपनी का नाम या लोगो दिखाई दे रहा है। संपर्क करने से पहले आधिकारिक वेबसाइट अथवा संबंधित गैस एजेंसी से नंबर की पुष्टि करनी चाहिए।
साइबर अपराधियों द्वारा कई बार कॉल करने के लिए ऐसे मोबाइल नंबरों का उपयोग किया जाता है, जिनके नाम या प्रोफाइल में सरकारी विभाग अथवा गैस कंपनी का नाम दिखाई देता है। केवल कॉलर आईडी पर दिखाई देने वाले नाम के आधार पर किसी व्यक्ति को अधिकृत नहीं माना जाना चाहिए। साइबर अपराधी तकनीकी माध्यमों से कॉलर की पहचान को भ्रामक बनाने का प्रयास कर सकते हैं। इसलिए किसी भी संवेदनशील जानकारी को साझा करने से पहले संबंधित संस्था के आधिकारिक संपर्क नंबर पर स्वयं कॉल करके जानकारी की पुष्टि करना उचित है।
राज्य साइबर पुलिस ने यह भी बताया है कि गैस e-KYC के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को मोबाइल फोन का रिमोट एक्सेस नहीं देना चाहिए। AnyDesk, TeamViewer अथवा इसी प्रकार के अन्य रिमोट एक्सेस ऐप उपयोगकर्ता की स्क्रीन अथवा डिवाइस तक पहुंच प्रदान कर सकते हैं। इन ऐप का वैध उपयोग तकनीकी सहायता के लिए हो सकता है, लेकिन किसी अज्ञात कॉलर के निर्देश पर इन्हें डाउनलोड करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। यदि कोई व्यक्ति e-KYC कराने के लिए ऐसे ऐप इंस्टॉल करने को कहता है तो उसकी बात पर भरोसा न करें और संबंधित गैस कंपनी के अधिकृत माध्यम से जानकारी प्राप्त करें।










