
भोपाल। शिक्षा के साथ स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार द्वारा जारी स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) 2025-26 की राष्ट्रीय चयन सूची में प्रदेश के 10 विद्यालयों का चयन किया गया है। यह उपलब्धि राज्य में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्वच्छ विद्यालय परिसर, पर्यावरण संरक्षण और हरित पहल को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।
स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) का उद्देश्य विद्यालयों में स्वच्छता, सुरक्षित पेयजल, स्वच्छ शौचालय, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, हरित परिसर, जैव विविधता संरक्षण तथा पर्यावरण के प्रति विद्यार्थियों में जागरूकता जैसे मानकों को प्रोत्साहित करना है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित विद्यालय इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए अन्य विद्यालयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं।
प्रदेश के 10 विद्यालयों का राष्ट्रीय चयन सूची में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि मध्यप्रदेश में शिक्षा के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। विद्यालयों में विकसित की जा रही हरित संस्कृति, पौधारोपण अभियान, वर्षा जल संरक्षण, प्लास्टिक मुक्त परिसर, स्वच्छ परिसर और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में विद्यालयी शिक्षा के क्षेत्र में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था, डिजिटल शिक्षा, स्वच्छ विद्यालय अभियान और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रमों को निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी का सकारात्मक परिणाम है कि मध्यप्रदेश के विद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
स्कूल शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश द्वारा भी विद्यालयों में स्वच्छ एवं हरित वातावरण विकसित करने, विद्यार्थियों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी की भावना जागृत करने तथा सतत विकास के लक्ष्यों के अनुरूप गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग का लक्ष्य प्रत्येक विद्यालय को स्वच्छ, सुरक्षित, हरित और विद्यार्थियों के अनुकूल शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना है।
शिक्षा एवं पर्यावरण के क्षेत्र में मिली यह उपलब्धि न केवल चयनित विद्यालयों के लिए गौरव का विषय है, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश के लिए भी सम्मान की बात है। इससे प्रदेश के अन्य विद्यालयों को भी स्वच्छता, हरित विकास और पर्यावरण संरक्षण के मानकों को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी तथा भविष्य में राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक विद्यालय उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाएंगे।









