
डिजिटल अरेस्ट, ट्रेडिंग फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी से बचाव के आधुनिक उपायों की दी जानकारी, साइबर सुरक्षा की दिलाई शपथ
भोपाल, 06 जुलाई 2026।
डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए मध्य प्रदेश साइबर पुलिस द्वारा सोमवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित सभा भवन में ‘साइबर सिक्योर 2026’ के अंतर्गत विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शासकीय अधिकारियों को साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप, ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए तरीकों तथा उनसे बचाव के प्रभावी उपायों से अवगत कराना था, ताकि वे स्वयं सुरक्षित रहें और आम नागरिकों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक कर सकें।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कलेक्टर राघवेंद्र सिंह, नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार, अपर कलेक्टर नीता राठौर, रविशंकर राय तथा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक गहलोत सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों के अनुभव साझा किए और आधुनिक डिजिटल चुनौतियों से निपटने की जानकारी प्राप्त की।
कार्यक्रम के दौरान साइबर पुलिस के विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में सतर्कता, जागरूकता और तकनीकी जानकारी ही सबसे बड़ा बचाव है। अधिकारियों को ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, सोशल मीडिया और मोबाइल एप्लीकेशन के सुरक्षित उपयोग के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण में विशेष रूप से ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे नए साइबर अपराध पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर ठग स्वयं को पुलिस, सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर वीडियो कॉल के माध्यम से लोगों को डराते-धमकाते हैं और उन्हें घर में ही रहने या किसी से संपर्क नहीं करने के निर्देश देकर मानसिक दबाव बनाते हैं। इसके बाद विभिन्न बहानों से बैंक खातों में राशि जमा कराने के लिए मजबूर किया जाता है। अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताया गया कि किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा इस प्रकार का डिजिटल अरेस्ट नहीं किया जाता। ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल की तुरंत सूचना साइबर हेल्पलाइन 1930 अथवा निकटतम साइबर पुलिस थाने में देना चाहिए।
प्रशिक्षण के दौरान तेजी से बढ़ रहे ऑनलाइन ट्रेडिंग फ्रॉड पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप्स अथवा फर्जी निवेश प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को कम समय में अधिक लाभ का लालच देकर निवेश करने के लिए प्रेरित करते हैं। प्रारंभ में छोटे स्तर पर लाभ दिखाकर विश्वास अर्जित किया जाता है और बाद में बड़ी राशि जमा करवाकर संपर्क समाप्त कर दिया जाता है। अधिकारियों को सलाह दी गई कि किसी भी निवेश से पहले संबंधित संस्था की प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें और केवल अधिकृत वित्तीय संस्थानों के माध्यम से ही निवेश करें।

विशेषज्ञों ने मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करते समय केवल अधिकृत प्लेटफॉर्म का उपयोग करने, अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने, ओटीपी, यूपीआई पिन, सीवीवी, बैंक खाते की जानकारी तथा पासवर्ड किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मजबूत पासवर्ड, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन और समय-समय पर पासवर्ड बदलने जैसी छोटी सावधानियां भी साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाती हैं।
प्रशिक्षण के दौरान ई-मेल सुरक्षा, फिशिंग लिंक, क्यूआर कोड फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, सोशल मीडिया हैकिंग, पहचान चोरी तथा डिजिटल भुगतान से जुड़े विभिन्न जोखिमों पर भी जानकारी दी गई। अधिकारियों को वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से बताया गया कि साइबर अपराधी किस प्रकार लोगों की छोटी-सी लापरवाही का फायदा उठाकर आर्थिक नुकसान पहुंचाते हैं।
साइबर पुलिस के अधिकारियों ने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। शासकीय अधिकारी यदि स्वयं जागरूक रहेंगे तो वे आमजन को भी सही मार्गदर्शन देकर साइबर अपराधों की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। डिजिटल युग में प्रत्येक व्यक्ति को तकनीक का उपयोग जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ करना चाहिए।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपस्थित सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को साइबर सुरक्षा की शपथ दिलाई गई। उन्होंने संकल्प लिया कि वे स्वयं साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करेंगे, दूसरों को भी जागरूक करेंगे तथा किसी भी संदिग्ध साइबर गतिविधि की तत्काल सूचना संबंधित एजेंसियों को देंगे।
इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच शासकीय अधिकारियों का प्रशिक्षित और जागरूक होना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाएगा, बल्कि आम नागरिकों में भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति विश्वास और जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। साइबर पुलिस द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण डिजिटल रूप से सुरक्षित और जागरूक समाज के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।









