
भोपाल।
विकास भवन, भोपाल में आज मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एमपीएसआरएलएम) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता करते हुए मिशन के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं एवं गतिविधियों की प्रगति का विस्तृत परीक्षण किया गया। बैठक में संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की वर्तमान स्थिति, उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की जानकारी प्रस्तुत की। इस दौरान ग्रामीण विकास को गति देने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने तथा स्व-सहायता समूहों को अधिक मजबूत एवं आत्मनिर्भर बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यक्रमों की प्रगति की बिंदुवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी योजनाओं का क्रियान्वयन निर्धारित समयसीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से सुनिश्चित किया जाए। साथ ही यह भी कहा गया कि योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक बिना किसी बाधा के पारदर्शी एवं प्रभावी तरीके से पहुंचे, ताकि ग्रामीण परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक सुधार हो सके।
समीक्षा के दौरान ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण को मिशन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए कहा गया कि स्व-सहायता समूह आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बन चुके हैं। इन समूहों के माध्यम से महिलाओं को स्वरोजगार, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास तथा उद्यमिता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि स्व-सहायता समूहों को बैंकिंग सुविधाओं, प्रशिक्षण, विपणन तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं से अधिकाधिक जोड़ा जाए, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
बैठक में आजीविका संवर्धन से जुड़े कार्यक्रमों की भी विस्तृत समीक्षा की गई। कृषि आधारित गतिविधियों, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, लघु उद्योग, हस्तशिल्प तथा अन्य स्वरोजगार गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों से कहा गया कि स्थानीय संसाधनों एवं क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप आजीविका के नए अवसर विकसित किए जाएं, ताकि ग्रामीण युवाओं और महिलाओं को अपने गांव में ही रोजगार उपलब्ध हो सके।
बैठक के दौरान शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विशेष बल दिया गया। निर्देश दिए गए कि प्रत्येक पात्र हितग्राही की पहचान कर उन्हें समयबद्ध रूप से योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए। योजनाओं के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत निगरानी सुनिश्चित करने के लिए नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित करने तथा फील्ड स्तर पर अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में अधिकारियों से कहा गया कि मिशन के अंतर्गत संचालित कार्यक्रम केवल आर्थिक सहायता तक सीमित न रहें, बल्कि ग्रामीण समाज में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामुदायिक भागीदारी को भी बढ़ावा दें। स्व-सहायता समूहों को स्थानीय स्तर पर छोटे उद्यम स्थापित करने, उत्पादों की ब्रांडिंग एवं विपणन की आधुनिक व्यवस्था से जोड़ने तथा डिजिटल माध्यमों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

अध्यक्षता करते हुए कहा गया कि राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में समावेशी एवं सतत विकास को बढ़ावा देना है। प्रत्येक पात्र हितग्राही तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सभी अधिकारियों को पूरी जिम्मेदारी एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने, स्वरोजगार के अवसर सृजित करने तथा गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण विकास की योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचे और प्रदेश के गांव आर्थिक, सामाजिक एवं आजीविका के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें।
बैठक के अंत में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी योजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए, निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा किया जाए तथा कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। विश्वास व्यक्त किया गया कि सभी विभागों के समन्वित प्रयासों से ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण, स्व-सहायता समूहों की मजबूती तथा ग्रामीण आजीविका के नए अवसरों का विस्तार होगा, जिससे मध्य प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और समग्र विकास को नई गति मिलेगी।









